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Travel: बेहद भव्य है उत्तराखंड में स्थित पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर, जानें इसका इतिहास

Sun, 15 Oct 2023 01:17 PM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

vआज के लेख में हम आपको पार्वती कुंड और जागेश्वर धाम का महत्व और यहां जाने का सही तरीका बताने जा रहे हैं। 
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parvati kund jageshwar temple - फोटो : instagram
Travel: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड दौरे पर निकले थे। जहां पहुंचकर उन्होंने कुमाऊं क्षेत्र में स्थित पार्वती कुंड और जागेश्वर धाम के दर्शन किए। पीएम ने इन दोनों जगहों की तस्वीरों को ना सिर्फ सोशल मीडिया पर साझा किया, बल्कि साथ में उन्होंने लोगों से इन जगहों पर जाने की अपील की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा कि अगर कोई पूछे कि उत्तराखंड में एक जगह जरूर देखनी चाहिए, वह कौन सी जगह होगी, तो कहूंगा कि आपको राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर को जरूर देखना चाहिए।

उन्होंने ये भी कहा कि मेरे उत्तराखंड के दौरे में सबसे यादगार अनुभव के रूप में केदारनाथ और बद्रीनाथ के पवित्र स्थान भी शामिल हैं, लेकिन कई वर्षों के बाद पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर के दर्शन करना बेहद खास अनुभव रहा। अपने इस पोस्ट में उन्होंने इन जगहों की प्राकृतिक सुंदरता और दिव्यता के बारे में बताया है। ऐसे में आज के लेख में हम आपको पार्वती कुंड और जागेश्वर धाम का महत्व और यहां जाने का सही तरीका बताने जा रहे हैं। ताकि आप भी इन मंदिरों में जाकर इनकी भव्यता का नजारा देख सकें।
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parvati kund jageshwar temple - फोटो : instagram
कैसे पहुंचे पार्वती कुंड

अगर आप पार्वती कुंड जाना चाहते हैं तो उत्तराखंड के कुमाउं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पार्वती कुंड तक पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। यहां से सड़क के रास्ते पहाड़ों पर करीब 250 किमी के सफर के बाद 5,338 फुट की ऊंचाई पर पार्वती कुंड आता है। 
 
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parvati kund jageshwar temple - फोटो : instagram
जानें मंदिर का इतिहास

ऐसी मान्यता है कि इसी जगह पर भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती ने ध्यान किया था। इसी वजह से हर साल, हजारों श्रद्धालु माता पार्वती का आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं।

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parvati kund jageshwar temple - फोटो : instagram
कैसे जागेश्वर धाम का इतिहास

अल्मोड़ा से जागेश्वर धाम की दूरी करीब 40 किमी है। समुद्रतल से करीब 6,200 फुट की ऊंचाई पर मौजूद यह शिव मंदिर बेहद खास है। इस मंदिर का इतिहास तकरीबन 2500 साल पुराना बताया जाता है। यहां पत्थर से बने 124 छोटे-छोटे मंदिर भी मौजूद हैं। माना जाता है कि शिवपूजन की सबसे पहली परंपरा यहीं से शुरू हुई थी। इस मंदिर में लोग दूर-दूर से पूजा करने आते हैं। 
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parvati kund jageshwar temple - फोटो : instagram
कैसे पहुंचे जागेश्वर धाम

जागेश्वर धाम में जो सबसे अहम शिव मंदिर हैं, उसमें भगवान शिव की पूजा नागेश के रूप में की जाती है। भगवान शिव के अलावा इस मंदिर में भगवान विष्णु, देवी शक्ति और भगवान सूर्य की प्रतिमा भी मौजूद हैं। इन मंदिरों की भव्यता देखने लायक है। यहां जाने के लिए कोठगोदाम और देहरादून सबसे पड़ोसी जिले हैं।

अगर आप काठगोदाम जाने का सोच रहे हैं तो वहां रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है वहीं, दून हवाई सेवा से भी पहुंचा जा सकता है। यहां का निकटवर्ती हवाई अड्डा कुमाऊं में पंतनगर और गढ़वाल में देहरादून स्थित जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। कोठगोदाम और देहरादून से आपको जागेश्वर धाम की टैक्सी मिल जाएगी।
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