मेला
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सूरजकुंड का इतिहास
सूरज कुंड का अर्थ है "सूरज का तालाब"। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि यह 10वीं शताब्दी में तोमर राजा सूरज पाल के शासनकाल में बनाया गया था। राजा सूरजपाल सूर्य के उपासक थे और उन्होंने सूरजकुंड का निर्माण जल संचयन के लिए कराया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते इस मेले का नाम 'सूरजकुंड मेला' रखा गया।
सूरजकुंड मेला कैसे जाएं?
ये मेला फरीदाबाद में लगता है, जिसके लिए दिल्ली से मेट्रो के जरिए जा सकते हैं। इसके लिए निकटतम मेट्रो स्टेशन बदरपुर (वायलेट लाइन) है। वहां से आप आटो या कैब के माध्यम से मेला स्थल तक पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग के जरिए दिल्ली से सूरजकुंड की दूरी लगभग 23 किमी है, जिसे निजी वाहन या बस से पूरा किया जा सकता है। दिल्ली, गुड़गांव और फरीदाबाद से हरियाणा रोडवेज और डीटीसी की बसें उपलब्ध हैं, जो आपको मेला स्थल तक पहुंचाएंगी।