डलहौजी की सुंदरता को बढ़ाते है यहां के देवदार और चीड के हरे-भरे पेड़
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डलहौजी की सुंदरता को बढ़ाते हैं यहां के देवदार और चीड़ के हरे-भरे पेड़। कहते हैं इस शहर से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर का पुराना नाता है। पर्यटन के साथ यहां देश के सबसे बेस्ट बोर्डिंग स्कूल भी हैं। यहां देश के कोने-कोने से बच्चे पढ़ने आते हैं, तो वहीं इस वक्त ठंड के साथ यहां बर्फबारी भी शुरू हो चुकी है। पूरा डलहौजी बर्फ का चादर ओढ़े हुए है। डलहौजी में इस साल की पहली बर्फबारी हुई है। जिसके बाद वहां के स्थानीय लोगों और पर्यटकों के चेहरे पर दोगुनी खुशी की लहर है। यहां के व्यवसायी लंबे समय से मंदी की मार झेल रहे थे। बर्फबारी के बाद उनके चेहरे की रौनक वापस आ गई है।
बर्फबारी की वजह से कई रास्ते बंद हो चुके है
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बर्फबारी की वजह से कई रास्ते बंद हो चुके है तो वहीं कई इलाकों में बिजली भी चली गई है। पीने का पानी भी जम गया है, इसके बावजूद लोग वहां खूब एंजॉय कर रहे हैं। सर्दियों में डलहौजी का दृश्य स्विटजरलैंड जैसा हो जाता है, जिसे कुछ लोग मिनी स्विटजरलैंड भी कहते हैं।
- डलहौजी से महज चार किलोमीटर की दूरी पर यह गांव स्थित है
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सड़क मार्ग से जाने वाले पर्यटकों के लिए डलहौजी पहुंचना बहुत आसान है
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कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग से जाने वाले पर्यटकों के लिए डलहौजी पहुंचना बहुत आसान है। दिल्ली एनसीआर से हर रोज सुबह और शाम को डलहौजी के लिए बस जाती है। जिसका किराया महज 1000 से 1200 रुपये है। बस चंडीगढ़ के रास्ते डलहौजी पहुंचती है। अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन कांगड़ा है। यहां से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर डलहौजी स्थित है। यहां लोग सर्दियों में आना ज्यादा पसंद करते हैं इसके साथ ही लोग अप्रैल और जून में भी आना पसंद करते है। यहां सुबह-शाम मौसम बहुत सुहावना होता है।