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दिल्ली के स्पेशल टूरिस्ट स्पॉट से कम नहीं है सिग्नेचर ब्रिज, जानें इससे जुड़ी दिलचस्प बातें 

Wed, 22 Jan 2020 07:44 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सिग्नेचर ब्रिज
दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज लोगों के लिए किसी टूरिस्ट स्पॉट से कम नहीं है। यह एक विश्वस्तरीय ब्रिज है, जो कि दिल्ली एनसीआर के लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत की तरह है। इससे यमुना पर स्थित वजीराबाद पुल पर दशकों से लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को बहुत बड़ी राहत मिल गई। इसकी ऊंचाई की बात करें तो यह कुतुबमीनार से भी दोगुनी है। आइए जानते हैं सिग्नेचर ब्रिज से जुड़े कुछ दिलचस्प बातों के बारे में: 
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सिग्नेचर ब्रिज - फोटो : pti
भारत का यह पहला एसिमिट्रिकल केबल स्टेड ब्रिज है। 675 मीटर का यह ब्रिज धनुष के आकार का है और लगभग 154 मीटर ऊंचा है, जो कुतुब मीनार से लगभग दोगुना ऊंचा है। 
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सिग्नेचर ब्रिज - फोटो : अमर उजाला
ब्रिज के शीर्ष पर जाकर दिल्ली की विहंगम तस्वीर देखी जा सकती है। सबसे ऊपर करीब 22 मीटर ऊंचा ग्लास का एक बॉक्स बनाया गया है, जिसके अंदर से लोग बाहर का नजारा देख सकेंगे। यहां जाने के लिए चार एलिवेटर लगाए गए हैं, जिसके सहारे एक बार में कुल 50 लोग पुल के शीर्ष तक पहुंच सकेंगे। 

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सिग्नेचर ब्रिज - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली सरकार ने इस ब्रिज को बनाने के लिए एक एरियल सर्वे किया था और सिग्नल फ्री कॉरिडोर के रीएलाइनमेंट के लिए और दक्षिण दिल्ली में डीएनडी फ्लाईवे से ब्रिज को जोड़ने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इस तरह के प्रोजेक्ट में ड्रोन का यह अपनी तरह का अनूठा प्रयोग था। 
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signature bridge - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली और गाजियाबाद के बीच आवाजाही का माध्यम बने वजीराबाद ब्रिज का बोझ इससे हल्का हुआ है। ब्रिज पश्चिमी किनारे पर आउटर रिंग रोड को पूर्वी किनारे के वजीराबाद रोड से जोड़ता है। गाजियाबाद और भोपुरा बॉर्डर के बीच आने-जाने के समय में 30 मिनट कम लगता है। 
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signature bridge - फोटो : कुमार संजय
ब्रिज का काम पूरा न होने के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी, जिसमें साल 2011 से लेकर 2018 तक सिग्नेचर ब्रिज का प्रॉजेक्ट पूरा होने की डेडलाइन बार बार क्रॉस होने की बात कही गई थी। इस पर दिल्ली के लोक निर्माण विभाग ने हाईकोर्ट में जवाब दिया था।
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signature bridge - फोटो : कुमार संजय
सिग्नेचर ब्रिज नॉर्थ दिल्ली को नॉर्थ ईस्ट दिल्ली और गाजियाबाद से जोड़ता है। साथ ही इससे रिंग रोग पर होने वाला ट्रैफिक भी कुछ कम होता है। मालूम हो कि साल 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सिग्नेचर ब्रिज प्रोजेक्ट तैयार किया था। दिल्ली कैबिनेट ने प्रोजेक्ट को 2007 में मंजूरी दी थी। ब्रिज साल 2018 में बनकर तैयार हुआ। 
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