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पितृ पक्ष 2026: गया में पिंडदान कराने का है प्लान? जानिए कैसे पहुंचें और कितना आएगा खर्च

Thu, 24 Sep 2026 03:47 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। यहां फल्गु नदी के तट पर तर्पण और पिंडदान के साथ विष्णुपद मंदिर में पूजा की परंपरा है। अगर आप 2026 में गया पिंडदान के लिए जा रहे हैं, तो बिहार पर्यटन की मौजूदा जानकारी के अनुसार पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी है। 
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गया में पिंडदान के लिए जाना है, जानिए रूट और खर्च - फोटो : Ai

Gaya Pind Daan Travel: पितृपक्ष 26 सितंबर 2026 से आरंभ हो रहे हैं। पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष में पिंडदान और तर्पण के लिए गया जी जाना चाहते हैं तो यात्रा की तैयारी पहले से करना आपके लिए सुविधाजनक रहेगा। बिहार का गया हिंदू धर्म में पितृ कर्म और पिंडदान के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। बिहार पर्यटन के मुताबिक गया में पिंडदान के लिए 48 प्रमुख वेदियां हैं, जिनमें फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, पंचतीर्थ, सीता कुंड और गया शिरोमणि मंदिर प्रमुख हैं। 

पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। यहां फल्गु नदी के तट पर तर्पण और पिंडदान के साथ विष्णुपद मंदिर में पूजा की परंपरा है। अगर आप 2026 में गया पिंडदान के लिए जा रहे हैं, तो बिहार पर्यटन की मौजूदा जानकारी के अनुसार पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी है। पर्यटन विभाग ने अलग-अलग यात्रा और पिंडदान पैकेज की दरें भी जारी की हैं।

गया पहुंचने के लिए ट्रेन एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। पटना से गया जी तक ट्रेन से लगभग 2 घंटे लगते हैं। गया पहुंचने के बाद स्थानीय स्तर पर ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य स्थानीय परिवहन से प्रमुख स्थानों तक पहुंचा जा सकता है। 

 

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फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट - फोटो : Instagram

गया में पिंडदान कहां किया जाता है?

गया में पिंडदान के लिए कई धार्मिक स्थल हैं। इनमें फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट प्रमुख स्थानों में शामिल हैं। पितृपक्ष पैकेज में भी इन स्थानों पर पिंडदान व तर्पण की जानकारी मिलती है। 

विष्णुपद मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां पिंडदान की परंपरा जुड़ी हुई है। मंदिर भगवान विष्णु के पदचिह्न के लिए प्रसिद्ध है।

 

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ट्रेन - फोटो : Amar Ujala

गया पहुंचने का रूट


ट्रेन से

पटना और आसपास के शहरों से गया रेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। बिहार पर्यटन के अनुसार पटना से गया जी की ट्रेन यात्रा लगभग 2 घंटे की हो सकती है। ट्रेन से आने वाले श्रद्धालु गया जी स्टेशन उतरकर स्थानीय ऑटो या टैक्सी से पिंडदान स्थलों तक जा सकते हैं।


सड़क मार्ग से

पटना से गया सड़क मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। निजी कार, टैक्सी या बस से यात्रा करने वाले लोग गया शहर पहुंचने के बाद स्थानीय परिवहन का इस्तेमाल कर सकते हैं।


हवाई मार्ग से

दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के लिए गया एयरपोर्ट एक विकल्प है। यात्रा की तारीख के अनुसार उड़ानों और स्थानीय परिवहन की उपलब्धता पहले जांच लेना बेहतर रहेगा।

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पिंड दान - फोटो : AI

2026 में पिंडदान का खर्च कितना है?

  • खर्च यात्रा के तरीके, ठहरने, भोजन, स्थानीय परिवहन और पूजा-पिंडदान की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
  • दिल्ली से गया तक ट्रेन का टिकट लगभग 600 रुपये से 2000 रुपये तक प्रति व्यक्ति मिल सकता है।
  • अगर आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो 6000 रुपये से 10000 रुपये तक एक तरफ का फ्लाइट टिकट मिल रहा है।
  • गया में ठहरने का खर्च 2000 से 6000 रुपये का प्रतिदिन का आ सकता है।
  • वहीं पिंडदान के लिए पंडित या शास्त्री की आवश्यकता होती है, इसका खर्च लगभग 11000 या 21000 रुपये आ सकता है।
     
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पिंड दान - फोटो : Adobe

पिंडदान के लिए जाते समय इन बातों का रखें ध्यान

पितृपक्ष में गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है, इसलिए ट्रेन, होटल और स्थानीय परिवहन की बुकिंग पहले करना उपयोगी हो सकता है। पूजा-पिंडदान से जुड़ी दक्षिणा और सामग्री की कीमत पहले स्पष्ट कर लें। किसी भी पैकेज की बुकिंग करने से पहले उसमें शामिल सुविधाओं और ताजा दरों की पुष्टि जरूर करें।

पिंडदान की विधि और आवश्यक सामग्री परिवार की परंपरा तथा संबंधित पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित/पुरोहित से पहले जानकारी लेना उचित रहेगा।

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