Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने की 16 दिवसीय अवधि है, जिसकी शुरुआत इस वर्ष 7 सितंबर 2025 से हो गई है। पितृपक्ष में लोग श्राद्ध कर्म और पिंडदान करते हैं। पिंडदान एक हिंदू अनुष्ठान है, जिसमें चावल या जौ के आटे से बने पिंड को पूर्वजों को समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है।
माना जाता है कि देश के कुछ ऐसे पवित्र स्थान हैं जहां किया गया पिंडदान विशेष फलदायी होता है। जब भी पिंडदान की बात आती है, सबसे पहले बिहार के गया का नाम याद आता है। लेकिन गया के अलावा भी कुछ पवित्र स्थान हैं, जहां पिंडदान किया जा सकता है।
वैदिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में पिंडदान के लिए 13 प्रमुख तीर्थ स्थल माने जाते हैं। मान्यता है कि इन स्थलों पर तर्पण करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष मिलता है। पिंडदान कहां किया जाए, यह अक्सर उलझन का विषय बनता है, क्योंकि लोग स्थान, परंपरा और श्रद्धा के आधार पर निर्णय नहीं ले पाते, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। यहां आपको 10 स्थलों के बारे में बताया जा रहा है, जहां श्राद्ध पक्ष में पिंडदान करना चाहिए।