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Odisha Famous Temple: जगन्नाथ पुरी ही नहीं ओडिशा जाएं तो इन प्रसिद्ध मंदिरों के भी करें दर्शन

Sat, 02 Jul 2022 04:14 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Jagannath Rath Yatra - फोटो : Amar Ujala
Odisha Famous Temple: विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा शुरू हो चुकी है। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु देशभर से ओडिशा के पुरी पहुंचे। रथ यात्रा में शामिल होने के अलावा साल भर भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी स्थित मंदिर में श्रद्धालु आते हैं। भगवान जगन्नाथ पुरी मंदिर अपनी प्राचीनता और मान्यताओं के कारण विश्व विख्यात है। इस मंदिर से जुड़ी कई कहानियां और चमत्कारों की बातें की जाती है। मंदिर के ऊपर लहराने वाला झंडा हवा की उल्टी दिशा में लहराता है। मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या हवाई जहाज नहीं उड़ सकता। मंदिर परिसर में ही बनी रसोई में भगवान को भोग मटकियों में बनता है, जिसमें सबसे ऊपर वाली मटकी के अंदर का भोग सबसे पहले पकता है और इस दौरान चूल्हे के सीधे संपर्क में आने वाली सबसे नीचे वाली मटकी के अंदर का भोग जलता भी नहीं। ऐसे ही न कई चमत्कार पर्यटकों को जगन्नाथ पुरी मंदिर की ओर आकर्षित करते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि ओडिशा में जगन्नाथ पुरी मंदिर के अलावा भी कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। इन मंदिरों की भी अपनी महिमा है। अगर आप ओडिशा जा रहे हैं तो पुरी में भगवान जगन्नाथ के मंदिर जाने के साथ ही वहां के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों के भी दर्शन जरूर करें। ये रही ओडिशा के मशहूर मंदिरों की सूची।
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लिंगराज मंदिर - फोटो : facebook
भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर

लिंगराज मंदिर पुरी के जगन्नाथ मंदिर का सहायक शिव मंदिर है। जगन्नाथ धाम जाने वाले श्रद्धालु लिंगराज मंदिर में दर्शन करके अपनी यात्रा को पूरा करते हैं। भुवनेश्वर शहर के प्राचीन और सबसे बड़े मंदिरों में लिंगराज मंदिर शामिल हैं। यहां भगवान शिव की हरिहर के रूप में पूजा की जाती है, जिसमें शिव और विष्णु एक संयुक्त रूप में विराजमान हैं। लिंगराज मंदिर कलिंग और देउला शैली से बनाया गया है। मंदिर को चार भागों में बांटा गया है, जिस में गर्भ गृह, यज्ञ शाला, भोग मंडप और नाट्यशाला शामिल है। मंदिर के आंगन में देवी भगवती को समर्पित मंदिर है।
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कोणार्क सूर्य मंदिर - फोटो : Facebook/Beauty Of India
कोणार्क सूर्य मंदिर

ओडिशा आने वालों के लिए कोणार्क सबसे आकर्षक गंतव्य है। कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के सात अजूबों में से एक है, जिसकी नक्काशी को देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से आते हैं। इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया है। कोणार्क सूर्य मंदिर में भगवान सूर्यनारायण विराजमान हैं। मंदिर को 13वीं शताब्दी में बनवाया गया था। कोणार्क सूर्य मंदिर के चारों तरफ 12 रथ के पहिए लगे हुए हैं, जिसे 7 घोड़े खींच रहे हैं। इसके बीच में सूर्य देवता विराजमान है।

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मुक्तेश्वर मंदिर - फोटो : Facebook
मुक्तेश्वर मंदिर

भुवनेश्वर में ही मुक्तेश्वर मंदिर है। इस मंदिर को 10वीं शताब्दी में बनाया गया था। कलिंग शैली का उत्कृष्ट उदाहरण इस मंदिर में देखने को मिलता है। मंदिर के शीर्ष पर देवताओं की मूर्तियां है, जिसमें बौद्ध प्रभाव नजर आता है। मंदिर की एक खास बात ये है कि यहां लगे तोरण या मेहराब को महिलाओं के गहनों या दूसरी जटिल डिजाइनों से तैयार किया गया है।
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राजारानी मंदिर - फोटो : facebook
राजरानी मंदिर

भुवनेश्वर में राजा रानी मंदिर स्थित है, जिसे प्रेम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल मंदिर में जोड़ों की कुछ कामुक नक्काशी देखने को मिलती है। इस मंदिर में 11वीं शताब्दी के कलिंग वास्तुकला का नमूना देखने को मिलता है। मंदिर की मूर्तियां भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को दर्शाती हैं। हालांकि मंदिर के गर्भगृह में कोई भी चित्र नहीं है, इसलिए मंदिर को हिंदू धर्म के किसी विशेष संप्रदाय से जुड़ा हुआ नहीं माना जाता। मंदिर की खास बात यह कि इसका निर्माण तभी हुआ था, जब जगन्नाथ मंदिर बना था।
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