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Nag Panchami 2024: ये हैं नाग देवता के चमत्कारी मंदिर, नागपंचमी पर यहां करें सर्पराज के दर्शन

Fri, 09 Aug 2024 09:41 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

नाग पंचमी के मौके पर नाग देव के मंदिरों के दर्शन के लिए जा सकते हैं और यहां पूजा अर्चना की जा सकती है। इस लेख में भारत के प्राचीन सर्प देव मंदिरों के बारे में बताया जा रहा है।
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नागराज मंदिर - फोटो : amar ujala
Nag Panchami 2024: हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। भगवान भोलेनाथ सर्पों की माला पहनते हैं यानी उनके गले में नाग देवता किसी आभूषण की तरह सजते हैं।

मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने या सर्प को दूध पिलाने से जीवन में सौभाग्य और समृद्धि आती है। इस बार 9 अगस्त, शुक्रवार को नाग पंचमी मनाई जा रही है। नाग पंचमी के मौके पर नाग देव के मंदिरों के दर्शन के लिए जा सकते हैं और यहां पूजा अर्चना की जा सकती है। इस लेख में भारत के प्राचीन सर्प देव मंदिरों के बारे में बताया जा रहा है।
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नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन - फोटो : instagram
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर

मध्य प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग मंदिर स्थित हैं। वहीं यहां नाग देवता का एक प्राचीन मंदिर भी है। नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। यह मंदिर के कपाट साल में एक बार नागपंचमी के दिन ही भक्तों के दर्शन के लिए खुलते हैं। मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं।
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करकोटक नाग देवता मंदिर, भीमताल - फोटो : instagram
भीमताल का कर्कोटक नागराज मंदिर

उज्जैन के महाकाल में कर्कोटक नाग मंदिर स्थित है, जहां पूजा करने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। लेकिन कर्कोटक नागराज का सबसे प्राचीन मंदिर नैनीताल के पास है। भीमताल के कर्कोटक नाम की पहाड़ी के टाॅप पर मंदिर बना है। मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण के मानसखंड में मिलता है। मंदिर का इतिहास लगभग 5 हजार साल से अधिक पुराना है।

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मन्नारशाला मंदिर केरल - फोटो : Instagram
केरल का मन्नारशाला नाग मंदिर

केरल के अलेप्पी जिले में लगभग 40 किमी दूर मन्नारशाला नाग मंदिर स्थित है। इस मंदिर में एक या दो नहीं बल्कि 30 हजार नागों की प्रतिमाएं हैं। यहां नागराज के साथ उनकी जीवनसंगिनी नागायक्षी देवी विराजमान हैं।
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शेषनाग मंदिर, जम्मू कश्मीर - फोटो : instagram
जम्मू कश्मीर का शेषनाग मंदिर

जम्मू कश्मीर में भी नाग देवता का प्राचीन मंदिर है। शेषनाग मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह नाग मंदिर पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला में पटनीटाॅप में स्थित है। इस मंदिर का इतिहास 600 साल पुराना है। कश्मीर का अनंतनाग क्षेत्र पहले नागवंशियों का गढ़ था। इस मंदिर में नागपंचमी का भव्य उत्सव होता है, जिसमें हजारों तीर्थयात्री शामिल होते हैं।
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