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Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

Wed, 14 Jan 2026 07:52 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Makar Sankranti 2026 Places to Visit: मकर संक्रांति पूरे भारत में एक जैसी नहीं मनाई जाती है। हर क्षेत्र इस पर्व को अलग नाम, संस्कार और उत्सव के तौर पर मनाता है।  
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कहां मनाएं मकर संक्रांति - फोटो : Adobe Stock
Makar Sankranti 2026 Places to Visit: सूर्य के उत्तरायण होते ही उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है। शुरुआत मकर संक्रांति के पावन पर्व से होती है जो 14 या 15 जनवरी 2026 को ंमनाई जाएगी। मकर संक्रांति पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन अलग-अलग नामों और तरीकों से। मकर संक्रांति का पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर और शीत से ऊर्जा की ओर बढ़ने का समय है।

यह वही दिन है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा शुरू होती है। भारतीय परंपरा में इसे अत्यंत शुभ माना गया है। खेतों में नई फसल की खुशी, घरों में तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें, मकर संक्रांति हर रूप में उल्लास रचती है।

लेकिन यह पर्व पूरे भारत में एक जैसा नहीं मनाया जाता। हर क्षेत्र इसे अपने रंग, नाम और संस्कार के साथ जीता है। आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में, जहां मकर संक्रांति की धूम देखते ही बनती है। 

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गुजरात की मकर संक्रांति - फोटो : istock
गुजरात

गुजरात में मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं, बल्कि जन-उत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अंतर्राष्ट्रीय पतंग फेस्टिवल का आयोजन होता है। छतों पर लोग “काई पो चे” के नारों के साथ पतंगबाजी करते हैं। ऊंधियू, जलेबी और चिक्की यहां की पहचान हैं। रात में टुक्कल (लैंप पतंग) आसमान को जादुई बना देते हैं।
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प्रयागराज की मकर संक्रांति - फोटो : adobe stock
प्रयागराज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम में आस्था की डुबकी लगाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यूपी में मकर संक्रांति का अर्थ है पवित्र स्नान। प्रयागराज के संगम पर लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं। दान-पुण्य, खिचड़ी, तिल और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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तमिलनाडु की मकर संक्रांति - फोटो : अमर उजाला
तमिलनाडु

तमिलनाडु में पोंगल के रूप में चार दिन का उत्सव मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। यह चार दिन तक चलने वाला पर्व है, भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। नई फसल से बना मीठा पोंगल, गाय-बैलों की पूजा और घरों के सामने रंगोली, यह त्योहार किसानों के सम्मान का उत्सव है।
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राजस्थान की मकर संक्रांति - फोटो : Adobe Stock
राजस्थान 

यहां पतंगबाजी और लोक-संस्कृति का संगम है। जयपुर और अन्य शहरों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन त्योहार को खास बना देते हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
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महाराष्ट्र की मकर संक्रांति - फोटो : adobe stock
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति सामाजिक सौहार्द का पर्व है। लोग एक-दूसरे को तिलगुल देकर कहते हैं, “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला।” यह संदेश है कि जैसे तिल और गुड़ मिलकर मिठास देते हैं, वैसे ही जीवन में भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।
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