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Mahashivratri 12 Jyotirling: 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का है प्लान? जानें यात्रा से जुड़ी सारी जानकारी

Wed, 26 Feb 2025 09:22 AM IST
दीक्षा पाठक लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

12 Jyotirling:  तो आज की इस खबर में हम आपको 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही इनका महत्व और यहां तक पहुंचने की सारी जानकारी भी दे रहे हैं। इस महाशिवरात्रि पर इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का प्लान कर सकते हैं। 
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कैसे करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन? - फोटो : अमर उजाला

ज्योतिर्लिंग (ज्योति + लिंग) का शाब्दिक अर्थ है "प्रकाश का प्रतीक लिंग"। यह भगवान शिव के उन पवित्र और दिव्य स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है, जो अग्नि-स्तंभ (ज्योति) के रूप में स्वयं प्रकट हुए थे। हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है, जो भारत के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर स्थित हैं।

 ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति और धार्मिक मान्यता
 शिव पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। इस विवाद को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने एक अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योति) का रूप धारण किया। उन्होंने दोनों से कहा कि जो इस स्तंभ का अंत खोज लेगा, वही सबसे श्रेष्ठ माना जाएगा। भगवान विष्णु वराह (सूअर) का रूप धारण कर नीचे की ओर गए, जबकि ब्रह्मा जी हंस रूप धारण कर ऊपर की ओर उड़ चले। विष्णु जी ने हार मान ली, लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ कह दिया कि उन्होंने ज्योति का अंत देख लिया। इस झूठ से भगवान शिव क्रोधित हुए और ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि उनकी पूजा कभी नहीं होगी। वहीं, भगवान विष्णु की सच्चाई और विनम्रता से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी पूजा सदा की जाएगी। यही ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का अनंत, असीम और अनश्वर स्वरूप है, जो ब्रह्मांड की अखंड शक्ति और आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है।ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और शिव कृपा प्राप्त होती है।

तो आज की इस खबर में हम आपको 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही इनका महत्व और यहां तक पहुंचने की सारी जानकारी भी दे रहे हैं। इस महाशिवरात्रि पर इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का प्लान कर सकते हैं। 

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। इसे "शिव का अनादि धाम" कहा जाता है और यह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और इतिहास का अद्भुत संगम है।

क्या है महत्व
 सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव (चंद्रमा) को अपने ससुर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या करनी पड़ी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया और यहां "सोमनाथ" के रूप में स्वयं प्रकट हुए।

कैसे जाएं

रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
  •  सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन: वेरावल रेलवे स्टेशन (7 किमी)
 प्रमुख ट्रेनें:
  • सोमनाथ एक्सप्रेस (मुंबई से)
  • वेरावल एक्सप्रेस (अहमदाबाद से)
  • जूनागढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस (राजकोट से)
  •  वेरावल रेलवे स्टेशन से मंदिर तक: स्टेशन से ऑटो, टैक्सी, या लोकल बस से 15-20 मिनट में मंदिर पहुंच सकते हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
  •  दीव एयरपोर्ट (DIU) – 85 किमी
  • राजकोट एयरपोर्ट (RAJ) – 195 किमी

 
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग - फोटो : iStock
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के द्वितीय ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है और इसे "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है और भगवान शिव तथा देवी पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है।

 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव (मल्लिकार्जुन) और माता पार्वती (भ्रमराम्बा) दोनों की पूजा होती है। यह शक्ति पीठ भी है, जिससे इसकी आध्यात्मिक शक्ति और बढ़ जाती है।पौराणिक कथा के अनुसार, जब कार्तिकेय और गणेश में विवाह को लेकर विवाद हुआ, तो भगवान शिव और माता पार्वती कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैलम पर्वत आए। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।


 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
  1.  रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
 सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:
  •  मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन (85 किमी)
  •  नांदयाल रेलवे स्टेशन (158 किमी)
  • कर्नूल रेलवे स्टेशन (180 किमी)

प्रमुख ट्रेनें:
  • हैदराबाद, चेन्नई, विजयवाड़ा और बेंगलुरु से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस या ऑटो द्वारा श्रीशैलम मंदिर पहुंच सकते हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)

 सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
  •  राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद (HYD) – 215 किमी
  • विजयवाड़ा एयरपोर्ट (VGA) – 190 किमी

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
  •  श्रीशैलम तक सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
  •  आंध्र प्रदेश राज्य परिवहन (APSRTC) की बसें – हैदराबाद, विजयवाड़ा, कर्नूल और अन्य शहरों से सीधी बस सेवा।
  •  प्राइवेट वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं।

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है और कालों के काल (महाकाल) भगवान शिव को समर्पित है।

 महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट (स्वयंभू) ज्योतिर्लिंग है, जिसका उल्लेख कई ग्रंथों, विशेष रूप से शिवपुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। भगवान शिव यहां महाकाल (समय और मृत्यु के स्वामी) के रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं। महाकालेश्वर दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। कहा जाता है कि इसका दर्शन मात्र से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
  •  उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन (UJN) – मंदिर से सिर्फ 2-3 किमी दूर

 प्रमुख ट्रेनें:
  • दिल्ली, मुंबई, जयपुर, भोपाल, इंदौर और अन्य प्रमुख शहरों से उज्जैन के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या पैदल मंदिर पहुंच सकते हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
  •  देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर (IDR) – 55 किमी दूर

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
  •  मध्य प्रदेश परिवहन निगम (MPRTC) की बसें – इंदौर, भोपाल, उज्जैन, कोटा और अन्य शहरों से सीधी बस सेवा।
  •  प्राइवेट वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं।
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भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर का विहंगम दृश्य। - फोटो : अमर उजाला
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच में स्थित ओंकार पर्वत पर स्थित है, जो "ॐ" के आकार में बना है और इसी कारण इसे "ओंकारेश्वर" कहा जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच बने प्राकृतिक ॐ (ओंकार) आकार के द्वीप पर स्थित है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो भी भक्त यहां श्रद्धा से पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि नर्मदा नदी शिवजी की पुत्री के रूप में पूजी जाती है और भगवान शिव इस स्थान पर हमेशा वास करते हैं।

 ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
  •  रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
  •  ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन (OM) – 12 किमी दूर
  •  खंडवा रेलवे स्टेशन (KNW) – 66 किमी दूर

 प्रमुख ट्रेनें:
  • मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नागपुर, वाराणसी और अन्य प्रमुख शहरों से खंडवा और ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस या ऑटो द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
  •  देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर (IDR) – 77 किमी दूर


 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
 ओंकारेश्वर तक सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
  •  इंदौर, उज्जैन, भोपाल, खंडवा, बड़वाह से नियमित बस सेवाएं मिलती हैं।
  •  मध्य प्रदेश परिवहन निगम (MPRTC) और निजी वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं।

 
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रविवार को सुहावने मौसम मे बीच बर्फ से आच्छित केदारनाथ मंदिर परिसर। बीकेटीसी

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।केदारनाथ मंदिर हिमालय की गोद में मंदाकिनी नदी के किनारे बसा हुआ है और यह भगवान शिव के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व
मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की खोज की। शिवजी पांडवों से बचने के लिए केदारनाथ में एक बैल के रूप में छिप गए लेकिन जब भीम ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, तो उनका शरीर पांच भागों में विभाजित हो गया। केदारनाथ में भगवान शिव का पृष्ठभाग (पीठ) प्रकट हुआ, जबकि अन्य भाग तुंगनाथ (हाथ), रुद्रनाथ (मुख), मध्यमहेश्वर (नाभि), कल्पेश्वर (जटा) में स्थापित हुए। ये पांच मंदिर मिलकर "पंच केदार" कहलाते हैं।

 केदारनाथ कैसे जाएं?
 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)

  •  ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (RKSH) – 216 किमी दूर
  •  हरिद्वार रेलवे स्टेशन (HW) – 240 किमी दूर


 प्रमुख ट्रेनें:

  • दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, वाराणसी, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों से हरिद्वार और ऋषिकेश तक सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • हरिद्वार / ऋषिकेश से टैक्सी, बस या हेलीकॉप्टर द्वारा केदारनाथ पहुंच सकते हैं।


 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)

  •  जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून (DED) – 250 किमी दूर


 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)

  •  केदारनाथ तक सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
  •  दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून से सीधी बसें गौरीकुंड तक जाती हैं।
  •  गौरीकुंड से केदारनाथ तक ट्रेकिंग करनी होती है।

 

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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग - फोटो : Instagram
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। यह मंदिर सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों में स्थित है और भीमा नदी का उद्गम स्थल भी यही माना जाता है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है और इसे देखने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग राक्षस भीम के अंत से जुड़ा हुआ है। राक्षस भीम भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन उसने देवताओं और ऋषियों को कष्ट पहुंचाना शुरू कर दिया। जब उसका आतंक बढ़ गया, तो भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर उसका वध किया और उसके अनुरोध पर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। तभी से इस स्थान को भीमाशंकर कहा जाता है।

 भीमाशंकर कैसे जाएं?

 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
  •  पुणे रेलवे स्टेशन (PUNE) – 110 किमी दूर
  • मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) – 210 किमी दूर

 प्रमुख ट्रेनें:
  • दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों से पुणे तक सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • पुणे रेलवे स्टेशन से बस, टैक्सी या निजी वाहन से भीमाशंकर पहुंच सकते हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
  •  पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट (PNQ) – 110 किमी दूर
  • मुंबई छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (BOM) – 210 किमी दूर

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
 भीमाशंकर तक सड़क मार्ग से सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
  •  पुणे से महाराष्ट्र राज्य परिवहन (MSRTC) की बसें भीमाशंकर जाती हैं।
  •  मुंबई, नासिक और अहमदनगर से भी टैक्सी और प्राइवेट बसें उपलब्ध हैं।

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काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे भगवान शिव के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) शहर में स्थित है, जिसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां शिव स्वयं निवास करते हैं और जो कोई भी यहां दर्शन करता है, उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

 काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वाराणसी भगवान शिव की प्रिय नगरी है और वे स्वयं यहां वास करते हैं। कहा जाता है कि जब पूरी सृष्टि का अंत हो जाएगा, तब भी काशी का अस्तित्व बना रहेगा। मान्यता है कि काशी में मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र देकर मोक्ष प्रदान करते हैं।यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु यहां अंतिम समय में आकर रहना चाहते हैं।


 काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे जाएं?
 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
 सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:
  •  वाराणसी जंक्शन (BSB) – 4 किमी दूर
  • मुगलसराय जंक्शन (DDU) – 16 किमी दूर

 प्रमुख ट्रेनें:
  • दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों से वाराणसी के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • रेलवे स्टेशन से ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी या पैदल मंदिर तक जा सकते हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
  •  लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, वाराणसी (VNS) – 25 किमी दूर

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
 वाराणसी तक सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए प्रमुख मार्ग:
  •  लखनऊ से वाराणसी: 320 किमी (6 घंटे)
  •  पटना से वाराणसी: 250 किमी (5 घंटे)
  •  प्रयागराज से वाराणसी: 120 किमी (2.5 घंटे)

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक - फोटो : Instagram
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। यह मंदिर पवित्र गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित है और इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है।

 त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में तीन मुख हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का प्रतीक माने जाते हैं। यह ज्योतिर्लिंग एक गहरी गुफा में स्थित है और एक चांदी के मुकुट से ढका हुआ रहता है। यह मंदिर गोदावरी नदी के उद्गम स्थल कुशावर्त तीर्थ के पास स्थित है, जिसे दक्षिण गंगा कहा जाता है। मान्यता है कि इस नदी में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

 त्र्यंबकेश्वर मंदिर कैसे जाएं?
 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
 सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:
  •  नासिक रोड रेलवे स्टेशन (NK) – 28 किमी दूर

 प्रमुख ट्रेनें:
  • मुंबई, पुणे, दिल्ली, अहमदाबाद, नागपुर, चेन्नई और अन्य शहरों से नासिक के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • रेलवे स्टेशन से त्र्यंबकेश्वर तक बस, टैक्सी या ऑटो द्वारा 45-60 मिनट में पहुंच सकते हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
 सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
  •  ओझार एयरपोर्ट, नासिक (ISK) – 50 किमी दूर
  • मुंबई छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (BOM) – 180 किमी दूर

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
 नासिक से त्र्यंबकेश्वर जाने के प्रमुख मार्ग:
  •  नासिक से त्र्यंबकेश्वर – 28 किमी (45 मिनट - 1 घंटा)
  •  मुंबई से त्र्यंबकेश्वर – 180 किमी (4-5 घंटे)
  •  पुणे से त्र्यंबकेश्वर – 240 किमी (5-6 घंटे)
  • शिर्डी से त्र्यंबकेश्वर – 120 किमी (3 घंटे)

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बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, जिसे वैद्यनाथ धाम या देवघर भी कहा जाता है, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह झारखंड के देवघर जिले में स्थित है और इसे मोक्ष प्राप्ति का द्वार माना जाता है। इस मंदिर का उल्लेख कई पुराणों में मिलता है और इसकी महिमा भक्तों के लिए अपार है।

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, लंका के राजा रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की और अपना सिर अर्पित किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ज्योतिर्लिंग दिया और कहा कि इसे जहां रखेंगे, वहीं यह स्थापित हो जाएगा। रावण इसे लेकर लंका जा रहा था, लेकिन एक चाल के तहत इसे देवघर में रख दिया गया और यह यहीं स्थापित हो गया। मान्यता है कि बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और जलाभिषेक करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?

 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
 सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:
  •  बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशन (BDME) – 2 किमी दूर
  • जसीडीह जंक्शन (JSME) – 8 किमी दूर (मुख्य रेलवे स्टेशन)

 प्रमुख ट्रेनें:
  • दिल्ली, कोलकाता, पटना, वाराणसी, रांची और हावड़ा से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • जसीडीह जंक्शन से देवघर के लिए ऑटो, टैक्सी और लोकल ट्रेन मिलती हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
 सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
  •  देवघर एयरपोर्ट (DGH) – 10 किमी दूर
  • बोधगया एयरपोर्ट (GAY) – 220 किमी दूर
  • पटना एयरपोर्ट (PAT) – 270 किमी दूर
  •  कोलकाता एयरपोर्ट (CCU) – 350 किमी दूर

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
 देवघर जाने के प्रमुख मार्ग:
  •  पटना से देवघर – 270 किमी (6-7 घंटे)
  •  रांची से देवघर – 250 किमी (5-6 घंटे)
  •  कोलकाता से देवघर – 350 किमी (7-8 घंटे)
  • भागलपुर से देवघर – 130 किमी (3-4 घंटे)

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे रक्षक एवं संकटमोचन शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। यह गुजरात के द्वारका से 15 किमी दूर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यह पूरी तरह स्वयंभू (स्वतः प्रकट) माना जाता है और इसकी पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के भय और रोगों से मुक्ति मिलती है।

 नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
कहा जाता है कि राक्षस दरुक ने अपनी शक्ति से एक नगरी बनाई और वहां लोगों को कैद कर रखा था। उन कैदियों में एक परम शिव भक्त सुहस्त नामक व्यक्ति भी था, जिसने अपनी श्रद्धा से भगवान शिव को प्रसन्न किया। शिवजी प्रकट होकर राक्षस दरुक का अंत किया और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की।यह भय, जादू-टोने और सर्प दोष से मुक्ति देने वाला ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

 नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
 सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:

  •  द्वारका रेलवे स्टेशन (DWK) – 18 किमी दूर
  •  ओखा रेलवे स्टेशन (OKHA) – 30 किमी दूर


 प्रमुख ट्रेनें:

  • अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, दिल्ली, राजकोट और वडोदरा से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • द्वारका रेलवे स्टेशन से नागेश्वर ज्योतिर्लिंग तक टैक्सी और बसें उपलब्ध होती हैं।


 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)

  •  जामनगर एयरपोर्ट (JGA) – 125 किमी दूर
  •  राजकोट एयरपोर्ट (RAJ) – 220 किमी दूर
  • जामनगर और राजकोट एयरपोर्ट पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद से सीधी उड़ानें मिलती हैं।
  • वहां से द्वारका के लिए टैक्सी या बस द्वारा यात्रा कर सकते हैं।


सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)

  •  अहमदाबाद से द्वारका – 450 किमी (8-9 घंटे)
  •  राजकोट से द्वारका – 220 किमी (4-5 घंटे)
  •  जामनगर से द्वारका – 125 किमी (2-3 घंटे)
  •  वडोदरा से द्वारका – 550 किमी (10 घंटे)

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है। इसे "दक्षिण का काशी" भी कहा जाता है। यह ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि यह भगवान राम से जुड़ा हुआ है।

 रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का महत्व
रामायण के अनुसार, जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ लंका जाने से पहले समुद्र किनारे पहुंचे, तो उन्होंने भगवान शिव की पूजा करने के लिए यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। उन्होंने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने भेजा, लेकिन देरी के कारण माता सीता ने रेत से शिवलिंग बना दिया। इस शिवलिंग को "रामनाथस्वामी" कहा जाता है और यह रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजनीय है।

 रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
 सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:

  •  रामेश्वरम रेलवे स्टेशन (RMM) – 1.3 किमी दूर


 प्रमुख ट्रेनें:

  • चेन्नई, मदुरै, तिरुचिरापल्ली, कोयंबटूर, बैंगलोर और दिल्ली से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • रेलवे स्टेशन से रामेश्वरम मंदिर ऑटो, टैक्सी और रिक्शा से 5-10 मिनट में पहुंच सकते हैं।


 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)

  • मदुरै एयरपोर्ट पर चेन्नई, बैंगलोर, दिल्ली और मुंबई से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।
  • वहां से रामेश्वरम के लिए बस या टैक्सी द्वारा 3-4 घंटे में पहुंच सकते हैं।


 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)

  •  मदुरै से रामेश्वरम – 170 किमी (3-4 घंटे)
  • चेन्नई से रामेश्वरम – 560 किमी (10-12 घंटे)
  •  कोयंबटूर से रामेश्वरम – 370 किमी (7-8 घंटे)
  •  त्रिची से रामेश्वरम – 230 किमी (5 घंटे)
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे श्रद्धा, भक्ति और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है, जो ऐतिहासिक एलोरा गुफाओं के पास है। यह 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है और यहां दर्शन करने से सभी पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
इस ज्योतिर्लिंग का नाम घृष्णा नाम की एक भक्त महिला के नाम पर पड़ा। घृष्णा ने अपनी भक्ति से शिवजी को प्रसन्न किया और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वयं यहां ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर भक्तों को आशीर्वाद देने का वचन दिया। यह स्थान सच्चे प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

 घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?

 रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
  • मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर, हैदराबाद और दिल्ली से औरंगाबाद के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
  • औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग तक टैक्सी और बसें आसानी से मिल जाती हैं।

 हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
  • मुंबई, दिल्ली, पुणे, नागपुर और हैदराबाद से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।
  • एयरपोर्ट से घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने के लिए टैक्सी या कैब सर्विस उपलब्ध है।

 सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
 औरंगाबाद जाने के प्रमुख मार्ग:
  •  मुंबई से औरंगाबाद – 400 किमी (8-9 घंटे)
  •  पुणे से औरंगाबाद – 230 किमी (4-5 घंटे)
  •  नासिक से औरंगाबाद – 180 किमी (3-4 घंटे)
  • नागपुर से औरंगाबाद – 485 किमी (9-10 घंटे)
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