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Lohri Famous Gurudwara: पंजाब से हिमाचल तक, लोहड़ी पर कौन से गुरुद्वारे जरूर जाएं?

Tue, 13 Jan 2026 07:46 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Lohri 2026 Famous Gurudwara in India: 13 जनवरी 2026 को लोहड़ी मनाई जा रही है। इस मौके पर भारत के कुछ प्रसिद्ध गुरुद्वारे के दर्शन करने जा सकते हैं।
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दिल्ली के प्रसिद्ध गुरुद्वारा - फोटो : Adobe
Lohri 2026: पंजाब की ठंडी रात, अग्नि की लपटें, लोकगीतों की गूंज और अरदास की शांति—लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, कृतज्ञता और सामुदायिक एकता का उत्सव है। खेतों की मेहनत, प्रकृति का आभार और गुरु की शरण—तीनों का संगम लोहड़ी को खास बनाता है। लोहड़ी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले आता है और शीत ऋतु के विदा होने तथा रबी फसल के स्वागत का संकेत देता है।

लोहड़ी पर गुरुद्वारे जाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और कृतज्ञता का भाव है। सिख परंपरा में इस दिन वाहेगुरु का शुक्रिया अदा किया जाता है। नई फसल, संतान-सुख और समृद्धि के लिए अरदास होती है। लंगर के माध्यम से समानता और सेवा का संदेश दिया जाता है। लोकनायक दुल्ला भट्टी की स्मृति में साहस और न्याय को नमन किया जाता है। अग्नि के चारों ओर घूमने से पहले या बाद में गुरुद्वारे में मत्था टेकना, यह याद दिलाता है कि उत्सव से पहले विनम्रता जरूरी है।

लोहड़ी ढोल-नगाड़ों और मिठास का पर्व जरूर है, लेकिन इसकी आत्मा गुरु की शरण, सेवा और समानता में बसती है। गुरुद्वारे जाना हमें याद दिलाता है कि खुशियां बांटने से पहले सिर झुकाना जरूरी है।
 
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स्वर्ण मंदिर, अमृतसर - फोटो : instagram
भारत के प्रसिद्ध गुरुद्वारे जहां लोहड़ी पर जा सकते हैं

श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर), अमृतसर

सिख धर्म का सबसे पवित्र गुरुद्वारा अमृतसर में स्थित है। श्री हरमंदिर साहिब को स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि इसपर सोने की परत चढ़ी है। इसकी नींव संत हजरत मियां मीर ने रखी थी और निर्माण गुरु अर्जन देव जी ने कराया था। लोहड़ी पर यहां की शांति और भव्यता अलग ही अनुभव देती है। शबद-कीर्तन, सरोवर की परिक्रमा और विशाल लंगर आस्था को नई ऊर्जा देते हैं।
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केसगढ़ साहिब - फोटो : Instagram
तख्त श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब

पंजाब के आनंदपुर साहिब में स्थित सिखों के पांच तख्तों में से एक है। ये खालसा पंथ की जन्मभूमि है। यहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा की नींव रखी थी। लोहड़ी के दिन यहां विशेष दीवान और अरदास होती है। इतिहास और आस्था का दुर्लभ संगम देखने को मिलता है। 

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गुरुद्वारा बंगला साहिब - फोटो : instagram
गुरुद्वारा बंगला साहिब, दिल्ली

दिल्ली का हृदय। लोहड़ी पर यहां हजारों श्रद्धालु मत्था टेकते हैं। सरोवर और लंगर सेवा मन को स्थिर कर देती है। गुरुद्वारा बंगला साहिब नई दिल्ली में स्थित एक प्रमुख और पवित्र सिख गुरुद्वारा है, जो 8वें सिख गुरु श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी से जुड़ा है और ऐतिहासिक रूप से राजा जय सिंह के बंगले में बना है, जहां गुरु हरकृष्ण जी ने चेचक महामारी के दौरान मानवता की सेवा की थी। यह अपने पवित्र सरोवर और विशाल लंगर के लिए प्रसिद्ध है।
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शीश गंज साहिब - फोटो : Instagram
गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, दिल्ली

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत से जुड़ा यह स्थान लोहड़ी पर त्याग और सत्य की याद दिलाता है। दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा को नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर की शहादत की याद में 1783 में बघेल सिंह द्वारा बनवाया गया था।
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गुरुद्वारा दमदमा साहिब - फोटो : Instagram
गुरुद्वारा दमदमा साहिब, तलवंडी साबो

पंजाब के बठिंडा में गुरुद्वारा दमदमा साहिब है। यह ‘गुरुओं की काशी’ के नाम से प्रसिद्ध है। लोहड़ी पर यहां आध्यात्मिक वातावरण विशेष होता है। यह गुरुद्वारा सिख धर्म के पांच तख्तों (सिंहासनों) में से एक है, जो पंजाब के बठिंडा जिले में स्थित है,। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम रूप दिया और स्थापित किया था।
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