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इस देश में है डरावनी सुरंग और खोपड़ियों से बनी दीवारें, बड़ी दिलचस्प है इसकी कहानी

Wed, 23 Oct 2019 09:40 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
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दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। इंसान को रहस्यमय चीजें सबसे ज्यादा लुभाती हैं। लाखों-करोड़ों की संख्या में हर साल लोग पहाड़, नदी, बर्फ और झरनों को छोड़ डरावनी जगहें भी देखने जाते हैं। यहां हम आपको दुनिया की सबसे डरावनी लंबी सुरंग के बारे में बता रहे हैं जो उस शहर में बनी है जो प्यार का शहर कहलाता है। जिसकी संस्कृति में रोमांस बसा है। जो शहर अपने फैशन के लिए जाना जाता है और दुनियाभर के सेलिब्रिटी जिस शहर की गोद में हर साल अपनी छुट्टियां बिताते हैं। इंसानी कंकालों से बनी है 18वीं सदी की सुरंग
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यह डरावनी सुरंग ब्यूटी और लव के शहर पेरिस में है। पूरी सुरंग 60 लाख लोगों के कंकालों से बनी है। 320 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पेरिस कैटाकॉम्ब के नाम से मशहूर है। सुरंग में कंकाल से ही दीवारें बनी हुई हैं। ये सुरंग रोशनी से जगमगाते शहर पेरिस की सबसे रहस्यमयी जगह है। पूरी सुरंग को पब्लिक के लिए नहीं खोला गया है लेकिन सुरंग के कुछ हिस्सों को पर्यटक देख सकते हैं। सुरंग ही नहीं पूरा कब्रिस्तान है ये जगह
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इस डरावनी सुरंग में आपको जगह-जगह इंसानी कंकाल दिखेंगे। कपाल की हड्डियों से बनी दीवारें दिखेंगी। सुरंग की कहानी बड़ी ही रोचक है। 18वीं सदी में पेरिस में कब्रिस्तान के लिए जगह कम पड़ गई और कई शवों को पूरी तरह से जलाया नहीं जा सका। ऐसे में अधिकारियों ने इन शवों को भूमिगत खदानों में डलवा दिया। ऐसे ही 1780 से लेकर 1814 तक करीब 60 लाख से ज्यादा शवों को इस सुरंग में डाला गया। सुरंग में मिला था सिनेमा रूम

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साल 2014 में पेरिस पुलिस इस कैटाकॉम्ब में ट्रेनिंग कर रही थी। उसने यहां एक सिनेमा रूम खोज निकाला। यह सिनेमा रूम स्क्रीन से लैस था। यहां रेस्टोरेंट और बार भी बनाया गया था। फोन और पावर लाइन की सुविधा भी थी। आज तक इस बात का पता नहीं चल पाया कि यहां सिनेमा रूम और बार किसने बनाया था। सुरंग में छोड़ा गया था नोट
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सुरंग में एक नोट छोड़ा गया था जिसमें लिखा था कि हमें खोजने की कोशिश न करें। यानी इस डरावनी सुरंग को सिनेमा रूम और रेस्टोरेंट व बार में तब्दील करने वाले शरारती तत्व नहीं चाहते थे कि पुलिस उनका पता लगाए। पादरी के कहने पर बनाई कंकाल की दीवार
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1780 में जब कंकालों की लंबी कतार लग गई तो एक पादरी के कहने पर कंकालों से दीवारनुमा आकृति बना दी गई ताकि मृत लोगों के आत्मा को शांति मिल सके। 19वीं सदी में इस सुरंग में मशरूम भी उगाई गई थी। कई लोगों ने इस सुरंग के अंदर तक जाकर यहां की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं। पेरिस जाने वाले पर्यटक इस सुरंग की तरफ भी जाते हैं। पेरिस में डरावनी सुरंग ही नहीं बल्कि एफिल टावर भी है जिसे देखने करोड़ों पर्यटक जाते हैं। हिटलर नहीं चढ़ पाया था एफिल टावर की आखिरी सुरंग
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एफिल टावर बेहद खूबसूरत है। इसका निर्माण 1889 में हुआ था। इस लोहे के टावर की ऊंचाई 300 मीटर है।इस टावर के सबसे ऊपरी माले पर पहुंचने के लिए आपको करीब 1,665 सीढ़ियां चढ़नी होंगी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर जब पेरिस पहुंचा तो एफिल टावर के लिफ्ट की केबल काट दी गई थी, ताकि वो इस टावर के सबसे ऊपर न पहुंच सके। कैसे पड़ना इसका नाम एफिल टावर?
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एफिल टावर का नाम एक इंजीनियर गुस्तव एफिल के नाम पर रखा गया है। रात के वक्त यहां की तस्वीर खींचना गैरकानूनी है। दरअसल, इस टावर पर लगी लाइट्स के डिजाइन पर उसके कलाकारों का कॉपीराइट है। एफिल टावर के निर्माण 300 कारीगरों ने काम किया था। इसे बनाने में 18,038 लोहे के टुकड़े और 2.5 मिलियन कील का इस्तेमाल हुआ था। 18,038 लोहे के टुकड़े से बना है यह टावर
 
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