फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना के कारण नहीं देख पा रहे हैं अटल टनल, जानिए विश्व की सबसे बड़ी टनल से जुड़ी हर जानकारी

Thu, 07 Jan 2021 05:32 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
टनल का निर्माण बहुत गर्व का विषय है - फोटो : अमर उजाला

कोरोनाकाल में अटल टनल का उद्घाटन होने के बाद से ही पर्यटकों को जिज्ञासा है कि विश्व की सबसे बड़ी टनल आखिर कैसी होगी? कई सारे लोग टनल को देखना तो चाहते हैं लेकिन कोरोना के कारण इतनी दूर की यात्रा करना अभी सही नहीं समझ रहे हैं। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं टनल के निर्माण और उसके इतिहास के बारे में। भारत के लिए इस टनल का निर्माण बहुत गर्व का विषय है। अगली स्लाइड्स से जानिए अटल टनल से जुड़ी खास जानकारी के बारे में। 

 

 

 

 

 

 

 

विज्ञापन

2 of 5
अटल बिहारी वाजपेयी ने इस टनल के निर्माण की घोषणा की थी - फोटो : अमर उजाला

अटल टनल का इतिहास 
पहली बार 1960 में प्रधानमंत्री नेहरू ने स्थानीय जनजातियों से रोहतांग दर्रे के लिए रस्सी के एक रास्ते के बारे में बात की थी। जून में अटल बिहारी वाजपेयी ने इस टनल के निर्माण की घोषणा की थी। 2002 में टनल के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। तय किया गया था कि इस पर लगभग 500 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे। 2014 तक टनल का निर्माण हो जाना चाहिए था। कई सारी बाधाओं के बाद 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने टनल का उद्घाटन किया । 

 

विज्ञापन

3 of 5
प्रतिदिन 3000 कारें और 1500 ट्रक आसानी से गुजर सकते हैं - फोटो : अमर उजाला

विशेषताएं
अटल टनल योजना की लागत 3,200 करोड़ है। इस सुरंग से प्रतिदिन 3000 कारें और 1500 ट्रक आसानी से गुजर सकते हैं। यहां से गुजरने वाले वाहनों की अधिकतम गति 80 किमी और न्यूनतम गति 30 किमी हो सकती है। सुरंग लेह- मनाली राजमार्ग का हिस्सा है। सुरंग के अंदर हर 500 मीटर पर एक आपातकालीन निकास सुरंग है। इसे दुनिया की सबसे लंबी सुरंग होने का दर्जा प्राप्त है। 

4 of 5
टनल को बनने में लगभग 15 साल का समय लगा - फोटो : अमर उजाला

टनल की लंबाई 
सुरंग समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी लंबाई लगभग 9.02 किलोमीटर है। टनल को बनने में लगभग 15 साल का समय लगा क्योंकि इसकी आधारशिला 2002 में रख दी गई थी, वहीं इसका निर्माण पूर्ण रूप से 2017 में पूरा हुआ और कोरोनाकाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन भी कर दिया। जिसके बाद से भारतीयों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
2003 में बादल फटने से यहां कई सारे मजदूरों की मौत भी हो गई थी - फोटो : अमर उजाला

निर्माण में आईं बाधाएं
सर्दियों में यहां काम करना बहुत मुश्किल होता है। भारी बर्फबारी में खुदाई करना बार-बार श्रमिकों को परेशान करता था। 2003 में बादल फटने से यहां कई सारे मजदूरों की मौत भी हो गई थी। टनल निर्माण में कई सारी आपदाएं भी बाधा बनीं। पहले इस दर्रे पर चढ़ने- उतरने में ही मात्र 4 से 6 घंटे लगते थे और अब 30 मिनट में पूरी टनल आसानी से पार की जा सकती है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें