फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए अंडमान के उस द्वीप के बारे में जो अब नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम से जाना जाता है

Sat, 23 Jan 2021 06:31 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम से भी जाना जाता है - फोटो : Social media

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में वैसे तो कुल 572 द्वीप हैं। यह सभी द्वीप अपने विशाल तटों एवं खूबसूरती के कारण संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हैं। अंडमान का एक द्वीप है रॉस आइलैंड, जो कि अब नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम से भी जाना जाता है। फिलहाल तो इस आइलेंड पर कब्रिस्तान के खंडहर, चर्च, बॉलरूम आदि हैं। इस आइलैंड का नाम नेताजी के नाम पर कैसे पड़ा, यह जानने के लिए देखिए अगली स्लाइड्स। 






 

विज्ञापन

2 of 5
अधिकारी इस आइलैंड पर न रहते हुए जहाज में ही रहा करते थे। - फोटो : Social media

जहाज पर रहते थे अंग्रेज
कहा जाता है कि भारत की आजादी के पहले संग्राम के बाद ब्रिटिश साम्राज्यों ने बागियों को अंडमान के द्वीपों पर बंदी बनाकर रखा था। यह सारे द्वीप घने जंगलों से घिरे हुए थे। मात्र 0.3 किलोमीटर में बसे रॉस आइलेंड पर सभी बंदियों को रखा गया था। इस दौरान ब्रिटिश अधिकारी इस आइलैंड पर न रहते हुए जहाज में ही रहा करते थे। 


 

विज्ञापन

3 of 5
अंग्रेजों ने एक से बढ़कर एक खूबसूरत इमारतें बनवाईं - फोटो : Social media

खूबसूरत इमारतों का निर्माण
एक समय ऐसा भी आया जब ब्रिटिश सरकार ने इस आइलैंड को अंडमान का प्रशासनिक मुख्यालय बना दिया। बीमारियों से बचने के लिए अंग्रेजों ने एक से बढ़कर एक खूबसूरत इमारतें बनवाईं, जिसमें उनके परिवार रहने लगे। यहां एक चर्च, टेनिस कोर्ट, सैना के बैरक और एक अस्पताल भी बनवाया गया। इस तरह ब्रिटिश सरकार के लिए यह जगह बहुत महत्वपूर्ण हो गई। 

4 of 5
रॉस आइलैंड का नाम बदलकर सुभाषचंद्र आइलैंड कर दिया गया - फोटो : पीटीआई

ऐसे बदला गया नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुभाषचंद्र बोस के तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर रॉस आइलैंड का नाम बदलकर सुभाषचंद्र आइलैंड कर दिया गया। इसी के साथ नील आइलैंड और हैवलॉक आइलैंड का नाम बदलकर शहीद द्वीप और और स्वराज द्वीप रख दिया गया। इसी दिन यहां 75 रूपये का सिक्का और एक डाक टिकट भी जारी किया गया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
खंडहरों के सिवा यहां कुछ है ही नहीं - फोटो : Social media

आज ऐसा है आइलैंड
नेताजी सुभाषचंद्र बोस आइलैंड कोई जानता ही नहीं है क्योंकि अब यह एक बहुत ही सुनसान आइलैंड है। खंडहरों के सिवा यहां कुछ है ही नहीं। जूनियर अफसरों के लिए बना सब- ऑर्डिनेट क्लब का लकड़ी का फर्श आज भी यहां मौजूद है। कहा जाता है कि एक समय लोग यहां संगीत पर खूब थिरकते थे लेकिन आज यहां पक्षियों की चहचहाटों के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं देता है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें