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क्या है कुंभ, महाकुंभ और अर्धकुंभ? भारत में कहां लगता है कौन-सा कुंभ

Wed, 09 Jan 2019 04:19 PM IST
सारंग उपाध्याय लाइफस्टाइल, अमर उजाला
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kumbh 2019
क्या आपको पता है भारत में कितने तरह का कुंभ लगता है और कहां-कहां लगता है? इस आर्टिकल में हम आपको कुंभ के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। दरअसल, प्रयागराज में होने वाले कुंभ 2019 की शुरुआत में अब सात ही दिन बचे हैं। हिंदू धर्म का यह सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव 15 जनवरी से शुरू हो रहा है। कुंभ मेला 3 मार्च तक चलेगा। इस धार्मिक मेले में भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों से श्रद्धालु आएंगे। मान्यता है कि कुंभ मेले में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप कट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइये जानते हैं कौन-से हैं ये तीन तरह के कुंभ 
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प्रयागराज कुंभ 2019
प्रयागराज गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के पावन तट पर बसा है। यहीं इस बार कुंभ मेला लग रहा है। भारतीय परंपरा के हिसाब से कुंभ हिंदू धर्म का सबसे पुराना और पवित्र धार्मिक मेला है। भारत में तीन तरह के कुंभ लगते हैं। ये कुंभ, महाकुंभ और अर्धकुंभ हैं। कुंभ का अर्थ घड़ा होता है। कुंभ मेले का संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से जुड़ा है। मान्यता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रह थे तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। तभी से कुंभ का आयोजन हो रहा है।
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प्रयागराज कुंभ 2019
सबसे पहले महाकुंभ के बारे में जानते हैं। महाकुंभ 144 साल में सिर्फ एक ही बार लगता है। महाकुंभ का आयोजन इलाहाबाद में होता है। महाकुंभ 12 पूर्ण कुंभ के बाद होता है। 

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Prayagraj Kumbh 2019
महाकुंभ के बाद आता है पूर्णकुंभ। पूर्णकुंभ 12 साल में एक बार लगता है। पूर्णकुंभ भारत में चार स्थानों पर लगता है। ये स्थान प्रयागराज हरिद्वार, नासिक और उज्जैन हैं। 
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कुंभ मेला
अर्धकुंभ छह साल में एक बार होता है। यह भारत में सिर्फ दो जगहों हरिद्वार और प्रयागराज में लगता है।अर्ध का अर्थ आधा होता है। हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ लगता है।
 
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