घुमक्कड़ी इंसानी प्रवृत्ति का हिस्सा है। इसी प्रवृत्ति की वजह से उसके मुंह से बरबस ही निकल पड़ता है- सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां...। ऐसे में हम महापंडित, 30 भाषाओं के जानकार और 140 किताबों के लेखक राहुल सांस्कृत्यायन को भारत का सबसे बड़े ट्रैवलर माने तो इसमें अतिशियोक्ति नहीं होगी। यही वजह है कि राहुल सांकृत्यायन को अपने दौर का कबीर कहा जाता है। उनकी विद्वता की वजह से ही उन्हें सोवियत संघ और श्रीलंका में पढ़ाने के लिए बुलाया गया। आइए जानते हैं भारत का यह सबसे बड़ा ट्रैवर कैसे खच्चरों पर लादकर तिब्बत से भारत किताबें लाया
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rahul sankratiyayan
राहुल सांकृत्यायन का बचपन में केदारनाथ पांडेय था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के पदहा गांव में 9 अप्रैल 1893 को भूमहिार ब्राहम्ण परिवार में हुआ था।
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राहुल सांकृत्यायन की बचपन में ही शदी करा दी गई, जिससे वह नाराज होकर घर छोड़कर भाग गए और दयानंद सरस्वती के अनुयायी बन गए। इसके बाद वह साधु बने तो उनका नाम रामोदर साधु हो गया। इसके बाद वह श्रीलंका पहुंचे और बौद्ध धर्म की शिक्षा ली। फिर वह रामोदर साधु से राहुल बने और सांकृत्य गोत्र होने के चलते उनका नाम राहुल सांकृत्यायन कहलाने लगे।
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उन्होंने कोलकाता, काशी, दार्जिलिंग, तिब्बत, नेपाल, चीन, श्रीलंका, सोवियत संघ जैसे कई देशों में भ्रमण किया। राहुल सांकृत्यायन को श्रीलंका और सोवियत संघ में पढ़ाने के लिए बुलाया गया।
राहुल सांकृत्यायन को दर्जन से अधिक भाषाओं का ज्ञान था। उनका समाजशास्त्र, धर्म, अध्यात्म, दर्शन, साम्यवाद, इतिहास जैसे कई विषयों पर पकड़ बना रखा था।
राहुल सांकृत्यायन ने अपने जीवन में तीन शादियां की। पहली शादी उनकी बचपन में हो गई थी। वहीं उनकी दूसरी शादी लेनिनग्राद यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के दौरान लोला येलेना से हुई। दूसरी पत्नी से उनका एक बेटा हुआ। फिर उनकी तीसरी शादी जीवन के अंतिम चरण में डॉ.कमला से हुई।
राहुल सांकृत्यायन ने कई पुस्तकें लिखी थीं। बताया जाता है कि उन्होंने सौ से ज्यादा करीब किताबें लिखी थीं। इसके अलावा उन्हें साल 1958 में उन्हें साहित्य अकादमी अवॉर्ड मिला। इसके बाद साल 1963 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
करीब 70 साल की उम्र में 14 अप्रैल, 1963 को दार्जिलिंग में उनका निधन हुआ.