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Jallianwala Bagh: अब कैसा दिखता है जलियांवाला बाग, इन तस्वीरों में देखें

Sun, 13 Apr 2025 11:50 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद से अब तक ये स्थान काफी बदल गया है। लेकिन उस काले दिन के निशान आज भी वहां की दीवारों पर दर्ज हैं। यहां जलियांवाला बाग की कुछ तस्वीरें दी जा रही हैं।
 
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कैसा दिखता है जलियांवाला बाग - फोटो : Adobe
Jallianwala Bagh Massacre: जलियांवाला बाग का नाम सुनते ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम का वह खौफनाक और दुखद पल आंखों के सामने आ जाता है, जब सैकड़ों निर्दोष भारतीयों को बिना किसी चेतावनी के मौत के घाट उतार दिया गया था। यह घटना भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक अहम मोड़ बन गई थी। 13 अप्रैल को जलियांवाला बाघ हत्याकांड की बरसी होती है। ये दिन गुलाम भारत के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसके किस्से आज भी लोगों के रोंगते खड़े कर देते हैं।

 जलियांवाला बाग पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है, जो स्वर्ण मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यह बाग एक सार्वजनिक स्थल था, जहां लोग अक्सर इकट्ठा होते थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद से अब तक ये स्थान काफी बदल गया है। लेकिन उस काले दिन के निशान आज भी वहां की दीवारों पर दर्ज हैं। यहां जलियांवाला बाग की कुछ तस्वीरें दी जा रही हैं।
 
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कैसा दिखता है जलियांवाला बाग - फोटो : Adobe
जलियांवाला बाग का इतिहास

1919 में ब्रिटिश सरकार ने भारत में 'रॉलेट एक्ट' लागू किया था, जिसके तहत किसी भी भारतीय को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार किया जा सकता था। देशभर में इस काले कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। अमृतसर में भी लोग शांतिपूर्वक इकट्ठा होकर विरोध जता रहे थे। इसी दिन बैसाखी का त्योहार था जो कि पंजाब का एक बड़ा पर्व माना जाता है। 
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यहां निहत्थे भारतीयों पर चलाई गईं थीं गोलियां - फोटो : Adobe
सैकड़ों निहत्थे भारतीयों की हत्या

बैसाखी के लिए हजारों लोग जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए इकट्ठा हुए थे। उसी दौरान ब्रिटिश सेना के जनरल रेजिनाल्ड डायर ने बगैर किसी चेतावनी के बाग का मुख्य द्वार बंद करवा दिया और अपने सिपाहियों को गोली चलाने का आदेश दे दिया।  करीब 10 मिनट तक 1650 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में करीब 1000 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।

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जलियांवाला बाग का शहीदी कुआं - फोटो : Adobe
घटना के बाद का प्रभाव

इस हत्याकांड की दुनिया भर में निंदा हुई। महात्मा गांधी ने इसके विरोध में असहयोग आंदोलन शुरू किया। रवींद्रनाथ टैगोर ने अपना नाइटहुड सम्मान लौटा दिया। इस घटना ने भारतीयों के दिल में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ गुस्से की ज्वाला और भी तेज कर दी। आज भी यहां उस काले दिन के निशान अपनी गवाही दे रहे हैं। 
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जलियांवाला बाग में गोलियों के निशान - फोटो : Adobe
जलियांवाला बाग स्मारक

अब यह स्थल एक राष्ट्रीय स्मारक बन चुका है। वहां एक संग्रहालय, शहीदी कुआं और गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं जो उस दिन के दर्द को जीवंत बनाए रखते हैं। हर साल हजारों लोग इस स्थल पर श्रद्धांजलि देने आते हैं।
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