फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ganesh chaturthi 2019: भारत के दस बड़े गणपति मंदिर,जहां बॉलीवुड स्टार भी जाते हैं मत्था टेकने

Mon, 02 Sep 2019 07:09 AM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 11
शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा
2 सितंबर से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू हो रहा है। भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को श्री गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन को गणपति के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भारत में भगवान गणेश के मंदिर के रूप में सिद्धिविनायक मंदिर ज्यादा प्रसिद्ध है लेकिन इसके अलावा भी बहुत से प्राचीन मंदिर हैं जिन पर भक्तों का अटूट विश्वास हैं। इन मंदिरों में दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्टों का निवारण हो जाता है। इन मंदिरों में भी गणेश चतुर्थी की बहुत ही अद्भुत छटा होती है तो इस बार गणेश उत्सव पर आप इन मंदिरों के दर्शन के लिए जरूर जाएं। तो आइए जानते हैं वो कौन से मंदिर हैं।


इस गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता के आशीर्वाद से असफलता व् बाधाओं पर विजय पाएं : 2-सितम्बर-2019 - अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)
 
विज्ञापन

2 of 11
- फोटो : social media
श्री सिद्धिविनायक मंदिर
गणपति के प्रसिद्ध मंदिरों में इस मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। यह मंदिर मुंबई में स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर को एक निसंतान महिला ने बनवाया था। इस मंदिर में माथा टेकने बड़े-बड़े बॉलीवुड सेलिब्रिटी आते हैं। 

 
विज्ञापन

3 of 11
- फोटो : pixa
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई मंदिर
गणपति बप्पा का यह मंदिर पुणे में बना हुआ है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर के बाद भक्तों की आस्था इस मंदिर में बहुत है। इस मंदिर के ट्रस्ट को देश के सबसे अमीर ट्रस्ट का खिताब हासिल है। कहा जाता है कि कई साल पहले श्रीमंत दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने अपना इकलौता बेटा प्लेग में खो दिया था। जिसके बाद दोनों ने इस गणेश मूर्ति की स्थापना यहां करवाई थी। जिसके बाद अब हर साल ना केवल श्री दगडूशेठ का परिवार बल्कि आसपास के सभी लोग बड़े जोश के साथ यहां गणेशोत्सव मनाते हैं। 

 

4 of 11
- फोटो : social media
कनिपकम विनायक मंदिर चित्तूर
विघ्नहर्ता गणपति का यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर में है। माना जाता है कि यहां मौजूद गणपति अपने भक्तों के सारे पाप हर लेते हैं।विनायक के इस मंदिर की खासियत यह है कि ये विशाल मंदिर नदी के बीचों बीच बना हुआ है। इस मंदिर की स्थापना 11वीं सदी में चोल राजा कुलोतुंग चोल प्रथम ने की थी।जिसका विस्तार बाद में 1336 में विजयनगर साम्राज्य में किया गया। 

 
विज्ञापन

5 of 11
- फोटो : social media
मनकुला विनायक मंदिर, पुडुचेरी 
मंदिर का इतिहास पुडुचेरी में फ्रेंच लोगों के आने के साल 1666 से भी पहले का है। शास्त्रों में गणेश के कुल 16 रूपों की चर्चा की गई है। इनमें पुडुचेरी के गणपति जिनका मुख सागर की तरफ है उन्हें भुवनेश्वर गणपति कहा गया है।तमिल में मनल का मतलब बालू और कुलन का मतलब सरोवर से है। किसी जमाने में यहां गणेश मूर्ति के आसपास बालू ही बालू था। इसलिए लोग इन्हें मनकुला विनयागर पुकारने लगे।

 
विज्ञापन

6 of 11
मधुर महागणपति मंदिर, केरल 
मधुर महागणपति मंदिर का मंदिर केरल में है। कहा जाता है कि शुरुआत में ये भगवान शिव का मंदिर था लेकिन पुजारी के छोटे से बेटे ने मंदिर की दीवार पर भगवान गणेश की प्रतिमा का निर्माण किया। कहते हैं मंदिर के गर्भगृह की दीवार पर बनाई हुई बच्चे की प्रतिमा धीरे-धीरे अपना आकार बढ़ाने लगी। वो हर दिन बड़ी और मोटी होती गई। उस समय से ये मंदिर भगवान गणेश का बेहद खास मंदिर हो गया।

 
विज्ञापन

7 of 11
रणथंभौर गणेश मंदिर, राजस्थान 
राजस्थान के सवाई माधौपुर से लगभग 10 किमी. दूर रणथंभौर के किले में बना गणेश मंदिर भगवान को चिट्ठी भेजे जाने के लिए मशहूर है।खास बात यह है कि यहां रहने वाले लोगों के घर जब कभी कोई मंगल कार्य होता है तो वो सबसे पहले रणथंभौर वाले गणेश जी के नाम कार्ड भेजना बिल्कुल नहीं भूलते। यह मंदिर 10वीं सदी में रणथंभौर के राजा हमीर ने बनवाया था। 

 

8 of 11
- फोटो : social media
मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर 
मोती डूंगरी गणेश मन्दिर राजस्थान में जयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। लोगों की इसमें विशेष आस्था तथा विश्वास है।जयपुर में सेठ जय राम पालीवाल ने 18वीं शताब्दी में यह मंदिर बनवाया था। 'गणेश चतुर्थी' के अवसर पर यहां काफी भीड़ रहती है। 

 

9 of 11
गणेश टोक मंदिर, गंगटोक
गणेश टोक मंदिर के लिए तीन मंजिले मकान के बराबर सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। मंदिर के अंदर नेपाली पुजारी तैनात दिखाई देते हैं। वे भक्तों को प्रसाद देते हैं और हाथों में कलावा बांध देते हैं। मंदिर के अंदर गणेश जी की विशाल और सुंदर प्रतिमा है। मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा पथ बना है। इस परिक्रमा पथ से गंगटोक शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है। 

 

10 of 11
गणपतिपुले मंदिर, रत्नागिरी, महाराष्ट्र 
इस मंदिक की खासियत यह है कि यहां मौजूद भगवान गणेश की मूर्ति उत्तर दिशा में नहीं बल्कि पश्चिम दिशा की ओर हैं। यहां आने वाले लोगों का मानना है कि इस मंदिर में गणेश जी की स्थापना किसी व्यक्ति ने खुद नहीं की बल्कि यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई है।  

 
विज्ञापन

11 of 11
उच्ची पिल्लयार मंदिर, तमिलनाडु 
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में त्रिचि नाम के स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी है जहां भगवान गणेश का उच्ची पिल्लयार नाम का प्रसिद्ध मंदिर बसा हुआ है। यह मंदिर लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर है और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें