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दशहरा 2026: मैसूर से कुल्लू तक, देश के इन शहरों में अलग अंदाज में मनाया जाता है दशहरा

Sat, 17 Oct 2026 01:11 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Dussehra 2026: 20 अक्तूबर 2026 को दशहरा मनाया जा रहा है। देशभर में दशहरा अलग-अलग तरह  से मनाया जाता है। कहीं 75 दिन का उत्सव होता है तो कहीं रावण की पूजा होती है।
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देशभर में दशहरा मनाने के तरीके - फोटो : AI

Dussehra Celebration Places: भारत में दशहरा सिर्फ रावण दहन और भगवान राम की विजय का पर्व नहीं है, बल्कि यह देश की समृद्ध संस्कृति, धार्मिक आस्था और क्षेत्रीय परंपराओं का भी प्रतीक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी को मनाने के तरीके इतने अनूठे हैं कि हर जगह इस त्योहार का एक नया रंग देखने को मिलता है। कहीं राजसी ठाठ-बाट के साथ भव्य शोभायात्रा निकलती है, तो कहीं सैकड़ों देवी-देवताओं की पालकियां एकत्र होती हैं।

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के समापन की भावुक परंपरा दिखाई देती है, वहीं दिल्ली में रामलीला और रावण दहन आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं देश के उन शहरों के बारे में, जहां दशहरा अपने खास अंदाज के लिए मशहूर है।

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देशभर में दशहरा मनाने के तरीके - फोटो : AI

मैसूर: शाही अंदाज में दशहरा

 

 

 

 

कर्नाटक का मैसूर दशहरा अपनी भव्यता और ऐतिहासिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां उत्सव का संबंध देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय से है। मैसूर पैलेस को रोशनी से सजाया जाता है और विजयादशमी के दिन प्रसिद्ध जंबू सवारी निकाली जाती है। इस शोभायात्रा में सजे हुए हाथी, पारंपरिक झांकियां, संगीत और लोककलाओं की शानदार झलक देखने को मिलती है। यहां दशहरा धार्मिक आस्था के साथ राजसी विरासत का भी उत्सव है।

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देशभर में दशहरा मनाने के तरीके - फोटो : AI

कुल्लू: जहां सैकड़ों देवी-देवता होते हैं शामिल

 

 

हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में दशहरा देश के अन्य हिस्सों से अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां उत्सव विजयादशमी के दिन शुरू होकर लगभग एक सप्ताह तक चलता है। ढालपुर मैदान में आसपास के गांवों से सैकड़ों देवी-देवताओं की सुसज्जित पालकियां पहुंचती हैं। भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा, पारंपरिक वाद्ययंत्र और कुल्लू नाटी इस उत्सव को खास बनाते हैं। यहां का दशहरा हिमाचल की लोकसंस्कृति और देव परंपरा का अनूठा संगम है।

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देशभर में दशहरा मनाने के तरीके - फोटो : AI

कोलकाता: दुर्गा पूजा और सिंदूर खेला

 

 

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दशहरा दुर्गा पूजा के समापन से जुड़ा है। यहां विजयादशमी पर देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। विवाहित महिलाओं के बीच प्रचलित सिंदूर खेला इस अवसर की खास पहचान है। ढाक की गूंज, आकर्षक पूजा पंडाल और भावुक विदाई का दृश्य उत्सव को यादगार बनाते हैं।

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देशभर में दशहरा मनाने के तरीके - फोटो : AI

दिल्ली: रामलीला और रावण दहन

 

 

दिल्ली में दशहरे का सबसे बड़ा आकर्षण रामलीला और रावण दहन है। शहर के विभिन्न मैदानों में भगवान राम की कथा का मंचन किया जाता है। विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। आतिशबाजी, मेले और खानपान के स्टॉल उत्सव की रौनक बढ़ाते हैं। यहां दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश जन-जन तक पहुंचाता है।

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रावण दाहन किन जगहों पर नहीं होता हौ - फोटो : Ai

बस्तर: 75 दिनों तक चलने वाली अनूठी परंपरा

 

 

छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। यहां उत्सव मुख्य रूप से देवी दंतेश्वरी को समर्पित है और इसकी रस्में सामान्य दशहरा उत्सव से काफी अलग हैं। रथ परंपरा, सामुदायिक अनुष्ठान और स्थानीय रीति-रिवाज इसकी खासियत हैं। बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाले उत्सव के रूप में जाना जाता है।


भारत के दशहरे में दिखती है विविधता की झलक

 

 

मैसूर की शाही शोभायात्रा से लेकर कुल्लू की देव परंपरा, कोलकाता की दुर्गा पूजा, दिल्ली के रावण दहन और बस्तर के अनूठे अनुष्ठानों तक, दशहरा भारत की सांस्कृतिक विविधता को खूबसूरती से सामने लाता है। परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन इन सभी उत्सवों का संदेश आस्था, सद्भाव और अच्छाई की विजय से जुड़ा है। यही विविधता भारत के त्योहारों को खास बनाती है।

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