रावण दाहन किन जगहों पर नहीं होता हौ
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बस्तर: 75 दिनों तक चलने वाली अनूठी परंपरा
छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। यहां उत्सव मुख्य रूप से देवी दंतेश्वरी को समर्पित है और इसकी रस्में सामान्य दशहरा उत्सव से काफी अलग हैं। रथ परंपरा, सामुदायिक अनुष्ठान और स्थानीय रीति-रिवाज इसकी खासियत हैं। बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाले उत्सव के रूप में जाना जाता है।
भारत के दशहरे में दिखती है विविधता की झलक
मैसूर की शाही शोभायात्रा से लेकर कुल्लू की देव परंपरा, कोलकाता की दुर्गा पूजा, दिल्ली के रावण दहन और बस्तर के अनूठे अनुष्ठानों तक, दशहरा भारत की सांस्कृतिक विविधता को खूबसूरती से सामने लाता है। परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन इन सभी उत्सवों का संदेश आस्था, सद्भाव और अच्छाई की विजय से जुड़ा है। यही विविधता भारत के त्योहारों को खास बनाती है।