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Ravan Dahan: भारत का ऐसा शहर जहां नहीं होता रावण-दहन, करते हैं लोग पूजा

Fri, 30 Sep 2022 11:05 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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dussehra - फोटो : istock
नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दशहरे का पर्व आता है। जिसे अच्छाई पर बुराई का प्रतीक माना जाता है। भगवान राम ने रावण का वध जिस दिन किया, उसे दशहरे के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन हर साल रावण का पुतला जलाकर त्योहार मनाया जाता है। दशहरे के कई दिन पहले से ही जगह-जगह राम लीला और भगवान राम की कथाओं का मंचन होता है। जिसे देखने लोग इकट्ठे होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। दशहरे के दिन इस जगह पर पुतला जलाने की बजाय उसकी शोभायात्रा निकाली जाती है। तो चलिए जानें कौन सी है वो जगह।
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dussehra - फोटो : pixabay
दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में जगह है कोलार, जहां वर्षों से रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। कहते हैं यहां नवरात्रि के नौ दिनों में रावण की पूजा होती है। जिसमे भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं। दरअसल, जिस दिन दशहरा मनाया जाता है। उसी दिन कोलार में फसल की पूजा होती है। इस मौके पर महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसे लंकेश्वर महोत्सव कहते हैं। 
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dussehra - फोटो : istock
इस मौके पर राणव की प्रतिमा को रथ पर रखकर शोभायात्रा निकाली जाती है। हालांकि इस बारे में एक लोक कथा प्रचलित है कि इस दिन कोलार में भगवान शिव की पूजा होती है। क्योंकि रावण शिव का भक्त था इसलिए भगवान शिव के साथ रावण को भी लोग पूजते हैं। हालांकि रावण दहन के पीछे लोगों का यह मानना भी है कि पुतलों में आग लगाते हैं तो फसल के जलने का डर रहता है। वहीं कई बार पूरी फसल ठीक से नहीं उगती। 
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dussehra - फोटो : pixabay
कर्नाटक के कोलार में रावण का बहुत बड़ा मंदिर है। इसके साथ ही कर्नाटक के मालवल्ली में भी रावण का मंदिर है। केवल कर्नाटक ही नहीं भारत के और भी हिस्से हैं जहां पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता।
 
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