Coolest Village In India: आपने अक्सर सुना होगा कि कई देशों में इतनी ठंड पड़ती है कि गीले कपड़े टंगे-टंगे जम जाते हैं। पर, आपको ये जानने की जरूरत है कि भारत में भी एक ऐसा ही गांव है, जहां ठंड में हाल काफी बेहाल हो जाते हैं। आइए आपको इस बारे में जानकारी देते हैं।
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भारत का पहला और दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा गांव, जहां गीले कपड़े टंगते ही जम जाते हैं
- फोटो : अमर उजाला
Coolest Village In India: भारत में जैसे ही सर्दियों का मौसम शुरू होता है, हम सभी मोटे-मोटे स्वेटर, जैकेट और गर्म कपड़े निकालकर ठंड से बचने की तैयारी कर लेते हैं। इनके बिना घर से निकलना संभव नहीं होता लेकिन क्या आप कभी किसी ऐसी जगह की कल्पना कर सकते हैं जहां ठंड इतनी चरम हो कि खून तक जम जाए, और हर सांस की बूंद भी बर्फ बन जाए? ऐसा अक्सर बाहर के कई देशों में होता है। पर क्या आप जानते हैं कि भारत में भी एक गांव ऐसा है, जहां इतनी ही भीषण सर्दी पड़ती है।
दरअसल, लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित द्रास गांव इसी ठंड के लिए जाना जाता है। इसे भारत का सबसे ठंडा और दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा गांव माना जाता है। यहां सर्दियों में तापमान कई - डिग्री तक गिर जाता है, और गीले कपड़े टांगते ही कुछ ही देर में जम जाते हैं। इस गांव में जीवन जीना एक चुनौती है, लेकिन स्थानीय लोग कठोर मौसम के बीच भी अपनी परंपराओं और जीवनशैली के अनुसार अनोखी ढंग से जीते हैं। द्रास की बर्फीली घाटियां और सर्द हवा इसे साहसिक यात्रियों और फोटोग्राफरों के लिए आकर्षक बनाती हैं।
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कहां है स्थित ?
- फोटो : instagram
कहां है स्थित ?
द्रास को 'लद्दाख का प्रवेश द्वार' यानी गेटवे ऑफ लद्दाख कहा जाता है। भारत में स्थित ये खूबसूरत जगह चारों तरफ से 16 हजार से 21 हजार फीट ऊंचे पहाड़ों से घिरी हुई है, जिस वजह से यहां हिमालय की बर्फीली हवाएं खूब तेजी से चलती हैं और ठंड को और बढ़ा देती हैं। लेह और कारगिल जाने वाले यात्रियों को यहीं से गुजरना पड़ता है।
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कितना रहता है तापमान
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कितना रहता है तापमान
सबसे पहले जान लेते हैं कि यहां का तापमान कितना होता है तो आपको बता दें कि सर्दियों के मौसम में यहां का तापमान आमतौर पर -20°C से -25°C तक पहुंच जाता है। कुछ समय पहले यहां का तापमान -60 डिग्री पहुंच गया था। आज भी सुबह की शुरुआत में झीलें, तालाब और गीले कपड़े जम जाते हैं। बर्फबारी कई महीने तक बनी रहती है, जिस वजह से यहां काफी ज्यादा ठंड होती है।
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कैसी है स्थानीय जीवनशैली
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कैसी है स्थानीय जीवनशैली
यहां रहने वाले लोग हमेशा मोटे ऊनी कपड़े पहनते हैं और घरों में हीटिंग का इस्तेमाल करते हैं। इनके घरों की दीवारें काफी मोटी होती हैं, जो हवा से लोगों का बचाव करती हैं। इसके साथ-साथ मांसाहारी खाना, गर्म भोजन, सूप और स्थानीय व्यंजन जैसे पकवान यहां से लोगों के शरीर को गर्माहट देते हैं। शारीरिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए मोटे कपड़े, दस्ताने, टोपी और गर्म जूते पहनना जरूरी है। ठंड
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पर्यटन और रोमांच के लिए है बेहद खूबसूरत
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पर्यटन और रोमांच के लिए है बेहद खूबसूरत
अक्टूबर के महीने से ही यहां बर्फीली हवाओं का तांडव शुरू हो जाता है जो अगले साल अप्रैल तक चलता है। ऐसे में सर्दियों के महीने ही यहां जाने के लिए परफेक्ट समय हैं। द्रास का कठोर मौसम फोटोग्राफी, ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। दुनिया भर के पर्यटक यहां बर्फीली घाटियों और अनोखी जीवनशैली का अनुभव लेने आते हैं।
द्रास, लद्दाख तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका हवाई मार्ग से है। सबसे नजदीकी हवाई अड्डा लेह एयरपोर्ट है, जो दिल्ली, श्रीनगर और अन्य बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। लेह एयरपोर्ट से आप टैक्सी या कार के जरिए द्रास पहुंच सकते हैं, जिसकी दूरी लगभग 140 किलोमीटर है और सफर 4-5 घंटे में पूरा होता है। लेह से NH1 मार्ग के जरिए द्रास जाने का रास्ता बेहद खूबसूरत है, जिसमें खारदुंग ला और सोनमर्ग जैसे दृश्य देखने को मिलते हैं। श्रीनगर से भी सड़क मार्ग से द्रास पहुंचा जा सकता है, लेकिन यह सफर लगभग 8-10 घंटे का होता है। सरकारी और प्राइवेट बसों के अलावा आप टैक्सी भी किराए पर लेकर जा सकते हैं।