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Chaitra Navratri 2026: भारत ही नहीं, विदेशों में भी हैं मां दुर्गा के चमत्कारी मंदिर! जानिए कहां हैं शक्तिपीठ

Thu, 19 Mar 2026 08:11 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Durga Mata Temples in Abroad: भारत के अलावा भी कई देशों में देवी मां के प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिपीठ स्थित हैं, जैसे नेपाल का गुह्येश्वरी मंदिर, श्रीलंका का नैनातिवु नागापोशानी अम्मन मंदिर, पाकिस्तान का हिंगलाज माता मंदिर और बांग्लादेश का ढाकेश्वरी मंदिर। इन स्थानों पर भक्त नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
 
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विदेशों में शक्तिपीठ - फोटो : AI
Videsh Me Mata Durga Ke Mandir: चैत्र नवरात्रि 2026 का पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। नवरात्रि देवी दुर्गा की आराधना का विशेष समय है। भारत में तो हर गली-मोहल्ले में मां के मंदिर हैं, साथ ही शक्तिपीठ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विदेशों में भी देवी मां के कई प्राचीन और शक्तिशाली धाम मौजूद हैं? ये मंदिर न केवल भारतीय संस्कृति की पहचान हैं, बल्कि लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र भी हैं।

विदेशों में मौजूद शक्तिपीठ और मंदिर भारत के बाहर रहने वाले हिंदूओं के लिए आस्था और जुड़ाव का प्रतीक हैं। ये मंदिर भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर जीवित रखते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा, भंडारा और उत्सव आयोजित होते हैं। अगर आप विदेश यात्रा पर जाना चाहते हैं लेकिन मंदिर दर्शन भी करना चाहते हैं तो इन देवी माता मंदिरों के दर्शन के लिए जा सकते हैं। आइए जानते हैं भारत के बाहर स्थित कुछ प्रमुख देवी मंदिर और शक्तिपीठों के बारे में। लेख के माध्यम से तस्वीरों में विदेशों के शक्तिपीठों के दर्शन भी कर सकते हैं।

 

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नेपाल का शक्तिपीठ - फोटो : Amar ujala

नेपाल

गुह्येश्वरी मंदिर

नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित गुह्येश्वरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती के शरीर का अंग गिरा था। यह मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर के पास बागमति नदी के किनारे स्थित है और तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध है। कहते हैं कि यहां माता सती के दोनों जानु यानी घुटने गिरे थे।

इसके अलावा नेपाल में दो और शक्तिपीठ हैं। पहला, गंडक नदी के पास आद्या शक्तिपीठ, जहां माता सती का बायां गाल गिरा था। इस मंदिर में देवी सती गंडकी रूप में पूजनीय हैं। दूसरा, दन्तकाली शक्तिपीठ, जहां माता सती के दांत गिरे थे। यह मंदिर नेपाल के बिजयापुर गांव में स्थित है। 

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पाकिस्तान का शक्तिपीठ - फोटो : Amar ujala

पाकिस्तान

हिंगलाज माता मंदिर

पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित हिंगलाज माता मंदिर (हिंगुला शक्तिपीठ) हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र स्थान है। यह शक्तिपीठ रेगिस्तान और पहाड़ों के बीच स्थित है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने जाते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का सिर गिरा था। इस प्राचीन शक्तिपीठ को नानी का मंदिर या नानी का हज कहा जाता है। 

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श्रीलंका की शक्तिपीठ - फोटो : Amar ujala

श्रीलंका

इंद्राक्षी शक्तिपीठ
 

श्रीलंका में इंद्राक्षी शक्तिपीठ स्थित है। यहां जाफना नल्लूर क्षेत्र में माता को इंद्राक्षी नाम से पुकारा जाता है। कहा जाता है कि यहां माता सती की पायल गिर गई थी। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम और देवराज इंद्र ने इस शक्तिपीठ में पूजा की थी।
 

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बांग्लादेश का शक्तिपीठ - फोटो : Amar ujala

बांग्लादेश

ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर

बांग्लादेश में हिंदू आस्था का सबसे बड़ा केंद्र ढाकेश्वरी मंदिर को माना जाता है। मान्यता है कि ढाका में स्थित इस शक्तिपीठ में माता सती का मुकुट गिरा था। इसके अलावा बांग्लादेश में कई शक्तिपीठ हैं। जैसे जेशोरेश्वरी माता मंदिर जहां माता की बाई हथेली गिरी थी। साथ ही सुगंधा शक्तिपीठ, भवानी शक्तिपीठ, ये सभी अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचीन हैं। उग्रतारा शक्तिपीठ में माती सती की नाक गिरी थी। चट्टल भवानी और श्रीशैल मंदिर को भी शक्तिपीठ में गिना जाता है। 
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तिब्बत शक्तिपीठ - फोटो : Amar ujala

तिब्बत 

दाक्षायणी शक्तिपीठ


भारत के पास ही तिब्बत स्थित है, जहां मानसरोवर नदी के तट पर माता सती की दाईं हथेली गिरी थी। बाद में इस स्थान पर मनसा देवी शक्तिपीठ की स्थापना हुई।

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