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Baisakhi 2026: दिल्ली में रहते हैं तो इस बैसाखी इन ऐतिहासिक गुरुद्वारों में टेके मत्था

Sun, 12 Apr 2026 09:35 AM IST
Shruti Gaur लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Famous Gurudwara In Delhi: अगर आप दिल्ली या दिल्ली के आस पास रहते हैं तो इस बैसाखी पर देश की राजधानी में स्थित इन गुरुद्वारों में जाकर माथा टेक सकते हैं। 
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दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारे - फोटो : AI
Famous Gurudwara In Delhi: बैसाखी का पर्व न सिर्फ किसानों और फसलों की खुशहाली का प्रतीक है, बल्कि ये सिख धर्म के अनुयायियों के लिए भी एक विशेष महत्व रखता है। ऐसे में लोग इस दिन गुरुद्वारा जाकर मत्था टेकना पसंद करते हैं। अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो ये लेख आपके काम का है।

दरअसल, दिल्ली देश की राजधानी अपने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित कई प्रसिद्ध गुरुद्वारों में लोग बैसाखी के अवसर पर माथा टेकने और आशीर्वाद लेने आते हैं। इन गुरुद्वारों की भव्यता और श्रद्धालुओं का उत्साह हर साल शहर में एक उत्सव का माहौल बना देता है। तो इस बैसाखी अगर आप दिल्ली में हैं तो इन गुरुद्वारों की यात्रा आपके त्योहार को और भी यादगार बना सकती है।

 
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दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारे - फोटो : Adobe
1. गुरुद्वारा बंगला साहिब, दिल्ली
 
  • यह सिख धर्म का प्रमुख स्थल है, जिसे साल 1783 में बनाया गया था।
  • ये गुरुद्वारा सिख गुरू हर गोबिंद साहिब से जुड़ा है।
  • यहां का सरोवर और लंगर सेवा बेहद प्रसिद्ध है।
  • भक्त यहां माथा टेकने, प्रार्थना करने और लंगर का स्वाद लेने आते हैं।
2. गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब, दिल्ली
 
  • ये सिख धर्म और भारतीय इतिहास में ऐतिहासिक महत्व रखता है।
  • ये गुरुद्वारा 1664 में बना था।
  • ये अपने शांत वातावरण और आध्यात्मिक अनुभव के लिए जाना जाता है।
  • भक्त यहां धर्मिक अनुष्ठान और ध्यान करने आते हैं।


3. गुरुद्वारा चांदनी चौक, दिल्ली
 
  • पुराने दिल्ली का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
  •   सीस गंज साहिब गुरुद्वारा नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर की शहादत की जगह है.
  • यहां लोगों का लगातार आना-जाना रहता है।
  •  ऐतिहासिक गलियों में स्थित यह गुरुद्वारा दर्शन और आध्यात्मिक शांति का अनुभव देता है।

4. मोती बाग साहिब गुरुद्वारा, दिल्ली
 
  • इसका इतिहास गुरु गोबिंद सिंह से जुड़ा है।
  • 1707 में गुरु जी और उनकी सेना ने दिल्ली यात्रा के दौरान यहां पहली बार विश्राम किया।
  • लोगों को गुरु साहिब के इतिहास और साहस की प्रेरणा मिलती है।


5. बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा, महरौली, दिल्ली
 
  • ये साउथ दिल्ली के महरौली गांव में स्थित।
  • यहां बाबा बंदा सिंह बहादुर के 40 शिष्यों को बलिदान दिया गया था।
  • वीरता और बलिदान की स्मृति में बना यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्पद है।
  • भक्तों को इतिहास की गहराई और सिख धर्म की वीरता का अनुभव होता है।


 
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