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अष्टविनायक दर्शन: महाराष्ट्र में कहां-कहां हैं अष्टविनायक मंदिर? जानिए 8 गणपति धामों के नाम और खासियत

Sat, 19 Sep 2026 05:23 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Famous Ganesha Temples In Maharashtra: अष्टविनायक के आठ मंदिर हैं। इन सभी मंदिरों की अपनी अलग कथा, स्थापत्य और धार्मिक मान्यता है। कहीं गणपति को बाल रूप में पूजा जाता है तो कहीं मंदिर पहाड़ी या प्राचीन गुफाओं में स्थित है।
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
Ashtavinayak Temples in Maharashtra: महाराष्ट्र की धरती पर भगवान गणेश के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन अष्टविनायक यात्रा का धार्मिक महत्व सबसे अलग माना जाता है। अष्टविनायक का अर्थ है भगवान गणेश के आठ प्रमुख स्वरूप और उनसे जुड़े आठ पवित्र मंदिर। ये मंदिर महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं और सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे हैं। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार पारंपरिक अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और समापन मोरगांव के श्री मयूरेश्वर मंदिर से माना जाता है। अष्टविनायक के आठ मंदिर हैं,
  1. मोरगांव के मयूरेश्वर
  2. सिद्धटेक के सिद्धिविनायक
  3. पाली के बल्लालेश्वर
  4. महड के वरदविनायक
  5. थेऊर के चिंतामणि
  6. लेण्याद्री के गिरिजात्मज
  7. ओझर के विघ्नेश्वर
  8. रांजणगांव के महागणपति।

इन सभी मंदिरों की अपनी अलग कथा, स्थापत्य और धार्मिक मान्यता है। कहीं गणपति को बाल रूप में पूजा जाता है तो कहीं मंदिर पहाड़ी या प्राचीन गुफाओं में स्थित है। यही विविधता अष्टविनायक यात्रा को सिर्फ धार्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति, इतिहास और स्थापत्य को करीब से जानने का अवसर भी बनाती है।
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
मयूरेश्वर गणपति, मोरगांव

स्थान: मोरगांव, पुणे जिला

अष्टविनायक यात्रा का पारंपरिक पहला पड़ाव मोरगांव का मयूरेश्वर मंदिर है। महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार यह यात्रा का पहला और अंतिम पड़ाव माना जाता है। यहां भगवान गणेश को मयूरेश्वर रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि गणपति ने मोर पर सवार होकर असुर सिंधु का वध किया था। मंदिर की एक खास विशेषता यहां मौजूद नंदी की प्रतिमा भी है, जो सामान्यतः शिव मंदिरों में दिखाई देती है। मंदिर का निर्माण काले बेसाल्ट पत्थर से हुआ है और इसकी स्थापत्य शैली इसे विशेष बनाती है। 
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
सिद्धिविनायक गणपति, सिद्धटेक

स्थान: सिद्धटेक, अहमदनगर क्षेत्र

अष्टविनायक यात्रा का दूसरा मंदिर सिद्धिविनायक है। यह भीमा नदी के किनारे स्थित है। यह वाले गणपति अपने दुर्लभ स्वरूप के लिए प्रसिद्ध हैं। मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई बताई जाती है, जिसे इस मंदिर की प्रमुख विशेषताओं में गिना जाता है। 

यहां पहाड़ी की परिक्रमा करने की भी परंपरा है। महाराष्ट्र पर्यटन की सामग्री के अनुसार श्रद्धालु इस स्थान को सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं। 

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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
बल्लालेश्वर गणपति, पाली

स्थान: पाली, रायगढ़ जिला

पाली का बल्लालेश्वर मंदिर अष्टविनायक यात्रा का तीसरा पड़ाव है। इसका नाम भगवान गणेश के भक्त बल्लाल से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के कारण पड़ा है।

महाराष्ट्र पर्यटन की आधिकारिक सामग्री के अनुसार मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी से जुड़ा है और वर्तमान पत्थर की संरचना बाद में विकसित की गई। मंदिर की घंटी और वास्तुकला भी इसकी खास विशेषताओं में शामिल हैं। 
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
वरदविनायक गणपति, महड

स्थान: महड, रायगढ़ जिला

चौथा अष्टविनायक मंदिर वरदविनायक है। यह महड में स्थित है। भगवान गणेश के इस स्वरूप को वर देने वाले गणपति के रूप में पूजा जाता है।

यह मंदिर अष्टविनायक यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल है और रायगढ़ जिले के धार्मिक स्थलों में इसकी खास पहचान है। पारंपरिक यात्रा क्रम में पाली के बाद महड का वरदविनायक मंदिर आता है। 
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
चिंतामणि गणपति, थेऊर

स्थान: थेऊर, पुणे जिला

अष्टविनायक यात्रा का पांचवां पड़ाव चिंतामणि मंदिर है। भगवान गणेश के इस स्वरूप को भक्त चिंतामणि नाम से पूजते हैं। थेऊर पुणे के आसपास स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल है और पारंपरिक अष्टविनायक मार्ग में इसका स्थान पांचवां है। 
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
गिरिजात्मज गणपति, लेण्याद्री

स्थान: लेण्याद्री, जुन्नर, पुणे जिला


अष्टविनायक मंदिरों में लेण्याद्री का गिरिजात्मज मंदिर सबसे अनोखे स्थलों में से एक है। यह किसी सामान्य मंदिर भवन में नहीं, बल्कि प्राचीन चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाओं में स्थित है।

महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार यहां पहुंचने के लिए 307 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश को यहां गिरिजात्मज यानी माता गिरिजा के पुत्र के रूप में पूजा जाता है। इसे गणेश के बाल रूप से भी जोड़ा जाता है। 

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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
विघ्नेश्वर गणपति, ओझर

स्थान: ओझर, पुणे जिला

सातवां अष्टविनायक मंदिर विघ्नेश्वर गणपति मंदिर है। यह पुणे जिले के ओझर में स्थित है। मंदिर का सुनहरा कलश, दीपमालाएं और मंदिर की दीवारों पर बनी गणेश कथाओं से जुड़ी कलाकृतियां इसकी पहचान हैं। 

लेण्याद्री और ओझर को एक साथ भी देखा जा सकता है, क्योंकि दोनों स्थानों के बीच की दूरी अपेक्षाकृत कम है। महाराष्ट्र पर्यटन की जानकारी के अनुसार लेण्याद्री की गुफाएं ओझर से करीब 15 किलोमीटर दूर हैं। 
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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala
महागणपति, रांजणगांव

यह मंदिर अष्टविनायक यात्रा का अंतिम पड़ाव है। महागणपति के दर्शन पुणे जिले के रांजणगांव में मिलते हैं। अष्टविनायक यात्रा का आठवां मंदिर महागणपति है। रांजणगांव का यह मंदिर पारंपरिक यात्रा क्रम में अंतिम पड़ाव माना जाता है। इसके बाद श्रद्धालु वापस मोरगांव जाकर यात्रा पूरी करते हैं। 
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