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Sugar Detox: नहीं छोड़ पा रहे शक्कर का सेवन तो अपनाएं ये तरीका, सेहत को मिलेगा फायदा

Wed, 28 Sep 2022 05:01 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शक्कर के सेवन पर नियंत्रण है जरूरी - फोटो : iStock
शक्कर यानी मीठा और मीठा यानी वह तत्व जिसे आजकल सेहत के लिहाज से सबसे खराब चीज माना जा रहा है। लोग सफेद रंग के इस स्वाद से बचने के लिए कई तरह की तिकड़में भी लगा रहे हैं। कोई चाय -कॉफी आदि बिना शक्कर के पी रहा है, तो कोई मिठाई से दूरी बना रहा है। कोई स्पेशल डाइट का प्रयोग कर रहा है, तो कोई जूस पीने तक से बच रहा है। पिछले कुछ समय में लोग शक्कर के सेवन को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क हुए हैं। खासकर कोरोना के आने के बाद से सतर्कता का यह प्रतिशत और भी बढ़ गया क्योंकि कई लोगों में शुगर का स्तर अचानक तेजी से बढ़ा। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें कोरोना हुआ था और दवाइयों व हार्मोनल चेंजेस की वजह से उनके शरीर में शुगर का स्तर बढ़ गया और वे लोग भी शामिल हैं जो अनियमित दिनचर्या और अव्यवस्थित खान-पान की वजह से इस समस्या के शिकार हो गए। 

शुगर डिटॉक्स को लेकर फिलहाल कई तरह के तरीके लोग अपना रहे हैं। प्रश्न यह है कि ये सारे तरीके कितने कारगर हैं? क्या शुगर डिटॉक्स वाकई सेहत को चमत्कारिक रूप से अच्छा बना देता है? जानिए करीब से। 
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शक्कर युक्त पदार्थों से दूरी - फोटो : social media
क्या है शुगर डिटॉक्स की प्रक्रिया

सामान्य शब्दों में समझा जाए तो शक्कर से पूरी तरह परहेज। यह तरीका लोग अलग अलग तरह से अपनाते हैं। कुछ लोग कुछ दिनों के लिए तो कुछ लोग कुछ महीनों के लिए शक्कर को अपनी डाइट से पूरी तरह हटा देते हैं। इसमें खास जोर एडेड शुगर यानी उन खाद्यों या डाइट पर दिया जाता है जिनमें ऊपर से शक्कर मिली हुई हो या डाली गई हो और इस तरह के पदार्थों से पूरी तरह किनारा कर लिया जाता है। इन पदार्थों में बाजार के लगभग सभी तरह के नाश्ते, सोडायुक्त ड्रिंक्स या शर्बत और जूस, चिप्स, बिस्किट, प्रोसेस्ड फूड, मिठाई, बेकरी उत्पाद और टोमैटो सॉस तक शामिल हो सकता है। इसे एक तरह से इन पदार्थों का व्रत भी कहा जा सकता है। 
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गलत तरह की शक्कर का सेवन लाता है मुश्किलें - फोटो : iStock
कितनी मात्रा है जरूरी?

जाहिर सी बात है कि हमारे भोजन में अतिरिक्त शक्कर का होना बहुत सारी मुश्किलों को बुलावा दे सकता है। सेहत के लिए जरूरत से ज्यादा शक्कर नुकसानदायक ही होती है। शरीर को प्रतिदिन एक निश्चित अनुपात में शक्कर की आवश्यकता होती है। यह इतनी मात्रा होती है जो एक स्वस्थ व्यक्ति के दिनभर के भोजन के स्वाद को बरक़रार रखते हुए आराम से ली जा सकती है लेकिन मुश्किल यह है कि आमतौर पर हम दिनभर में इस मात्रा से कई गुना अधिक का सेवन यूँही कर जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता। सामान्यतः एक स्वस्थ पुरुष के लिए दिनभर में करीब 36 ग्राम (लगभग 8-9 टीस्पून) और एक स्वस्थ महिला के लिए दिनभर में करीब 25 ग्राम (करीब-5-6 टीस्पून) शक्कर काफी होती है और सामान्य डाइट से यह हमें मिल भी जाती है। वहीं एक सामान्य सोडायुक्त कोल्डड्रिंक की छोटी कैन में 8 टीस्पून के करीब शक्कर होती है। यानी महिलाओं के एक दिन के कोटे से भी ज्यादा। और यहीं हम गलती कर जाते हैं। 

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तकलीफ देती शक्कर की अनियंत्रित मात्रा
कहाँ होती है गड़बड़?

हमारी सामान्य दाल-चावल, सब्जी-रोटी वाली डाइट के अलावा रोज खाये जाने वाले फलों से हमें पर्याप्त मात्रा में शक्कर मिल जाती है। मुश्किल को हम आमंत्रण देते हैं ज्यादातर बाजार की चीजें खाकर या पीकर। जब हम चिप्स का एक छोटा पैकेट खाकर खाली कर रहे होते हैं तब हमें पता भी नहीं चलता कि हमने अपने कई दिनों की शक्कर का कोटा एक झटके में शरीर में पहुंचा दिया है और यहीं से शुरू होती है गड़बड़। ज्यादातर एडेड शुगर वाले खाद्य इस तरह का स्वाद और संतुष्टि देते हैं कि हम एक तरह से उनके एडिक्ट हो जाते हैं और कम मात्रा पर रुक नहीं पाते, ज्यादा ही खा जाते हैं। इसे आप शक्कर का नशा या एडिक्शन भी कह सकते हैं। तकलीफ का कारण भी यही बनता है। यहां तक कि छोटे बच्चों में जिनका मेटाबॉलिज्म वयस्कों की तुलना में आमतौर पर अधिक होता है उनके लिए भी यह एडेड शुगर तकलीफ का कारण बनने लगती है। 
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डायबिटीज के अलावा और भी हैं मुश्किलें
ये हो सकती हैं मुश्किलें 

अगर आप शुगर को केवल डायबिटीज से ही जोड़कर देखते हैं तो सबसे पहले ऐसा सोचना बंद कीजिये। डायबिटीज केवल मीठा खाने से नहीं होती। इसके साथ और भी कई स्थितियां जुड़ी होती हैं। इसके अलावा खून में शक्कर का स्तर भी केवल मिठाई खाने से नहीं बढ़ता। बटर, चीज, नमकीन और गरिष्ठ भोजन आदि भी शुगर बढ़ा सकते हैं। शुगर का बढ़ा स्तर शरीर के हर अंग के काम करने की क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है। मोटापा, डायबिटीज तो इसके बहुत आम साइड इफेक्ट्स हैं, इससे त्वचा पर झुर्रियां आना या रैशेज और संक्रमण होने से लेकर कैंसर तक की आशंका कई गुना बढ़ सकती है। यानी खून में शक्कर का असंतुलित स्तर आपके जीवन को भी खतरे में डाल सकता है।   
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सही खान पान के होंगे फायदे - फोटो : pixa
शुगर डिटॉक्स का फायदा 

इस प्रक्रिया का कोई एक नियम नहीं है लेकिन आप अपने वजन, जीवनशैली और शारीरिक स्थितियों के हिसाब से इसे लागू कर सकते हैं। उदाहरण के लिए एक सामान्य वजन, कद-काठी और स्वास्थ्य वाला व्यक्ति, दिनभर में संतुलित भोजन के साथ फिजिकली एक्टिव भी रहता है तो उसे शुगर डिटॉक्स की जरूरत नहीं है। वह अपने इसी रूटीन के साथ स्वस्थ रह सकता है और कभी कभार संतुलित मात्रा में जंक फूड, मिठाई, चॉकलेट आदि भी खा सकता है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति डायबिटीज, प्री-डायबिटीज, हाई-ब्लडप्रेशर, मोटापा या अन्य किसी समस्या से ग्रसित है तो शुगर डिटॉक्स आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इससे ब्लड शुगर को कंट्रोल करने, वजन को संतुलित रखने और कई सारी बीमारियों से बचाव करने की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है। इतना ही नहीं आपकी इम्युनिटी भी इससे स्ट्रांग बन सकती है और पहले की तुलना में आपको जोड़ों में तकलीफ, त्वचा संबंधी संक्रमण आदि की आशंका भी काफी कम हो सकती है। 
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खान-पान के साथ व्यायाम भी है जरूरी
ऐसे अपनाएं 

आप चाहें तो एक महीने के लिए सभी तरह की एडेड शुगर को बिलकुल बंद करके और भोजन में भी चावल, आलू जैसी चीजों को हटाकर शुगर को कंट्रोल कर सकते हैं। एक बार कंट्रोल होने के बाद डाइट चार्ट बनाकर संतुलित मात्रा में चीजों का सेवन शुरू कर सकते हैं। इससे थोड़े लम्बे समय के लिए भी शुगर डिटॉक्स को अपनाया जा सकता है लेकिन जरूरी यह है कि शरीर के लिए आवश्यक शक्कर की मात्रा में कटौती न हो। यदि आप डायबिटीज के लिए किसी प्रकार की दवा लेते हैं तो खासतौर पर यह ध्यान रखें कि शरीर में शक्कर का स्तर कम न हो। यह भी तकलीफ का कारण बन सकता है। डिटॉक्स के साथ भी नियमित व्यायाम, भरपूर नींद और मेडिटेशन जैसे अभ्यास जरूर अपनाएं। यह फायदे को कई गुना बढ़ा सकते हैं।  

 
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