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Sugar control: मीठे से बचना है तो दिमाग को दें ट्रेनिंग

Fri, 28 Oct 2022 07:50 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हानिकारक है शकर - फोटो : istock
चॉकलेट, केक, गुलाब जामुन और तरह तरह की मिठाइयां, क्या आपके मुंह में भी ये नाम सुनकर पानी आता है? आप अकेले नहीं हैं और यहां बात स्वीट टूथ वालों यानी मीठा बहुत ज्यादा पसंद करने वालों की भी नहीं है। ये बात हर उस व्यक्ति की है जो सामान्य मात्रा में भी मीठा खाना पसंद करता है। मुश्किल यह है कि मीठे की इस पसंद का कोई ऑन-ऑफ़ स्विच नहीं होता, कि जब मन चाहा मीठा खाना एकदम से बंद कर दिया। खासकर अब जब डायबिटीज से ग्रसित लोगों की संख्या हमारे देश में भी बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। 

कम उम्र लोगों में भी अब डायबिटीज या प्री डायबिटीज के लक्षणों का उभरना आम होता जा रहा है। हालाँकि मीठा खाना इसका एकमात्र कारण नहीं है लेकिन यह एक कारण तो है। यह एक कारण सबसे ज्यादा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डायबिटीज को असंतुलित करने में ख़ास भूमिका निभा सकता है। मीठे के लालच में पड़ने के इस फेर से बचने और शुगर की मात्रा को नियंत्रण में रखने में आपका दिमाग आपका मददगार हथियार बन सकता है। आइए जानें कैसे। 
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अधिक पॉपकॉर्न भी खड़ी कर सकता है मुश्किल - फोटो : pixabay
जरूरत से ज्यादा शकर 

यह हममें से अधिकांश लोगों के साथ होता है। शकर का सेवन हम ज्यादातर अनजाने में और लापरवाही के साथ करते हैं। उदाहरण के लिए लापरवाही के रूप में इस तरह कि हम सभी को ये मालूम होता है कि कोल्डड्रिंक, सोडायुक्त ड्रिंक्स या पॉपकॉर्न तक में शकर की मात्रा अधिक है लेकिन हम यहां अपने दिमाग को कंट्रोल नहीं कर पाते। वहीं अनजाने में हम शकर का सेवन उन पदार्थों के रूप में कर लेते हैं जिनसे शकर के स्तर के बढ़ने को लेकर हम कनेक्शन ही नहीं बैठा पाते, उदाहरण के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर्स या शुगर फ्री चीजें। ये तमाम चीजें रक्त में शकर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण बन सकती हैं।  
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दिमाग को ललचाता है चिप्स का पैकेट - फोटो : iStock
दिमाग की भूख को करें कंट्रोल 

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि हम रोजाना अपना सामान्य भोजन और सामान्य रूटीन फॉलो करते हैं तो ब्लड शुगर के कंट्रोल में रहने का प्रतिशत कई गुना बढ़ जाता है। यही नहीं इससे प्री डायबिटिक लोगों को भी डायबिटीज से दूर रहने में बहुत मदद मिल सकती है। मुश्किल यह है कि अक्सर हम शुगर का एक्स्ट्रा डोज़ दिमाग के भड़काने पर लेते हैं। मतलब खाना खाने के बाद हमारा पेट भर चुका होता है लेकिन दिमाग कहता है चिप्स का पैकेट खोल लो या एक गुलाब जामुन और सही। यह एडेड शुगर यानी आवश्यकता से अधिक शकर कैलोरीज की मात्रा को तो बढ़ाती ही है, इससे कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है। बस इसी भूख को कंट्रोल करने की जरूरत होती है। इस भूख के कंट्रोल में आ जाने से आधी से ज्यादा लड़ाई तो यूँ ही जीत ली जाती है। 

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दिमाग पर नियंत्रण की जरूरत - फोटो : अमर उजाला
क्या है ब्रेन ट्रेनिंग?

दिमाग यानी शरीर का वह नन्हा सा खुरापाती हिस्सा जो इस सारी मुश्किल की जड़ भी होता है लेकिन यही वह हथियार भी होता है जो सही ट्रेनिंग मिलने पर आपका सबसे बड़ा रक्षक बन सकता है। बीमारियों या बुरी लतों से लड़ने के लिए ब्रेन का ट्रेनिंग का उपयोग नई बात नहीं है। अब तक मुख्यतः इसका उपयोग नशे की लत को छुड़ाने, सिगरेट से दूरी बनाने आदि के लिए किया जाता रहा है और इससे सफलता भी मिलती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसका उपयोग ईटिंग हैबिट्स में सुधार के लिए भी करने लगे हैं। इस ट्रेनिंग में दिमाग को केवल मीठा कम खाने या छोड़ने के लिए ही तैयार नहीं किया जाता, बल्कि हेल्दी खाने के लिए प्रेरित करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ इस तरह से-
 
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छोटे छोटे परिवर्तन अपनाएं - फोटो : Pixabay
शुरुआत छोटे कदम से 

कभी भी शकर को एकदम से न छोड़ें। मात्रा को धीरे धीरे घटाएं। जैसे सबसे पहले चाय या कॉफी से शुरू करें। इसमें पहले दिन रोज से आधी मात्रा में शकर डालें और एक हफ्ते में शकर डालना बिलकुल बंद कर दें। शुरूआती दो हफ्तों में आप चाय या कॉफी के साथ एक मीठा बिस्किट ले सकते हैं लेकिन फिर इसकी जगह, दो फीके बिस्किट, एक आटा टोस्ट, मुट्ठी भर भुने हुए चने या मूंगफली ले सकते हैं। चाय-कॉफी खाली पेट बिलकुल न पीएं। महीने भर में चाय-कॉफी की जगह कोई भी कम नुकसानदायक चीज जैसे ब्लैक टी या कॉफी, ग्रीन टी आदि शुरू कर दें। लेकिन अगर आपको दूध वाली ही चाय या कॉफी पसंद है तो दिन में 2 बार इसे कम दूध और बिना शकर के लें। इसके बाद धीरे धीरे खाने से वे चीजें हटाएँ या कम करें जो शुगर की मात्रा बढ़ा सकती हैं, जैसे चावल, मक्का, गेहूं आदि। इसकी जगह जौ, ज्वार और बाजरा को डाइट में शामिल करें। करीब एक महीने बाद आपके दिमाग को यह संकेत मिलने लगेंगे कि उसे बदलाव को ग्रहण करना है। 
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सही तरीके से खरीदें ग्रॉसरी - फोटो : Agency (File Photo)
लिस्ट में से हटाएँ 

जब भी हम सुपरमार्केट से या ऑनलाइन खरीदारी करते हैं तो एक ही कैटेगरी के कई सारे उत्पाद हमारे सामने इस तरह आते हैं कि जरूरत न होते हुए भी हम दो-तीन चीजें एक्स्ट्रा खरीद लेते हैं। यही उन खाने-पीने की चीजों के साथ भी होता है जो हमें स्वाद से ही नहीं, पैकेजिंग से भी ललचाती हैं। इसलिए किराने का सामान खरीदते समय इन चीजों को अपनी लिस्ट में लिखे ही नहीं। स्टोर में उन जगहों से खरीदी की शुरुआत करें जहाँ सब्जियां, फल, और अन्य हेल्दी चीजें रखी हैं। जब आपकी कार्ट इन सब सामानों से भर जाएगी तो आपके पास जंक फ़ूड के लिए जगह नहीं बचेगी। अगर जगह बचेगी तो भी आपके बजट में कम गुंजाईश होगी। इसी तरह ऑनलाइन शॉपिंग करते समय भी कार्ट में पहले हेल्दी ऑप्शन डालें। अगर एक-दो बार आपका बजट सीमा पार करेगा भी तो अगली बार से आप सचेत होने लगेंगे। कुछ समय तक लगातार यह अभ्यास करने से आपका दिमाग भी इस बात को स्वीकार करने लगेगा और आप अपने आप जंक फ़ूड वाली जगह की ओर जाना भूल जायेंगे। 
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खरीदने से पहले चैक करने की आदत डालें
इंग्रेडिएंट्स पढ़िए

चीजों को खरीदते समय अगर आप यह आदत डालते हैं तो इसके दो फायदे होते हैं। पहला फायदा यह कि आपको सामान की एक्सपायरी डेट पता चल जाती है और आप सही चीज खरीद पाते हैं। दूसरे, इंग्रेडिएंट्स को पढ़ते समय उसमें मौजूद शकर, फैट्स आदि की मात्रा को आपका दिमाग रजिस्टर करता जाता है और यह बात आपके सिस्टम में प्रोसेस होने लगती है कि कौन सी चीज आपके लिए तकलीफदायक हो सकती है। चिप्स के पैकेट से लेकर  सिगरेट के पैकेट तक को खरीदते समय लोग पैकेट को पढ़ते नहीं हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि पढ़ने पर दिमाग में चेतावनी का संकेत उभरने लगेगा और बार बार ऐसा होने पर दिमाग के एक कोने पर तर्क सिर उठाने लगेंगे। जब आप चिप्स, नमकीन या मीठे के पैकेट पर इंग्रेडिएंट्स को पढ़ने लगते हैं तो आपका दिमाग उस एक्टिविटी में व्यस्त होने लगता है और उस जानकारी को आगे प्रोसेस करता है। जिसका असर आपकी विचार और निर्णय क्षमता पर पड़ता है। 

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दिमाग को रखें शांत, ध्यान करें
ज्यादा शांत दिमाग, कम मीठे की भूख 

सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है लेकिन क्या आपने गौर किया है कि जब आप तनाव, स्ट्रेस या प्रेशर में होते हैं तो आप वे चीजें भी खाने लगते हैं जो आपको सामान्य स्थिति में पसंद न आती हों। जैसे कि कैंडीज, चिप्स, कुकीज, नमकीन आदि। ख़ास बात यह कि इस स्थिति में आपका दिमाग आपको सीधे जंक की ओर ही धकेलता है। यह भूख सलाद, रोटी-सब्जी या हेल्दी ऑप्शन से नहीं मिटती। इसलिए ध्यान, मेडिटेशन आदि का अभ्यास करें, संगीत सुनें और डांस करें। जितना हो सके खुद को तनाव, स्ट्रेस और काम के अतिरिक्त बोझ से दूर रखने की कोशिश करें। शोध यह साबित कर चुके हैं कि दिमाग जितना शांत, संतुलित रहेगा, हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल के गोल्स उतनी ही जल्दी और आसानी से प्राप्त होंगे। 

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अच्छी नींद सेहत के लिए जरूरी - फोटो : istock
आराम भी है जरूरी

नींद की कमी केवल चिड़चिड़ापन और उनींदनापन, आलस आदि ही नहीं लाती। इसकी वजह से रक्त में शकर की मात्रा भी असंतुलित हो सकती है। कई लोगों में नींद की कमी और स्ट्रेस भी  डायबिटीज का कारण बनता है। शोध यह भी साबित कर चुके हैं कि ज्यादा मीठा खाने वालों को नींद लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। खासकर उन लोगों को जो सोने से पहले मीठा खाकर सोते हैं। क्योंकि खून में शकर के असुंतलित स्तर से उनकी नींद बार बार खुलती है। तो सोने से पहले के अपने भोजन पर एक नजर डालिए और इसमें बदलाव कीजिये। शाम 7 बजे के बाद से अपने दिमाग में यह दोहराइये कि अगले एक घंटे बाद भोजन का समय नहीं रहेगा। यदि किसी कारण से आप रात को देर से भोजन करते हैं तो भोजन में ठोस आहार रोटी, चावल आदि को सीधे आधा कर दीजिये और ज्यादा मात्रा लिक्विड की रखिये। भोजन के आधे घंटे बाद कम से कम 15 मिनिट टहलिए। इसके बाद हाथ-पैर अच्छे से धोकर लाइट्स बंद कर दीजिये, मोबाइल को दूर रखिये और दिमाग को हल्के संगीत के हवाले कर दीजिये। 10-15 दिनों तक लगातार यह रूटीन रखने से दिमाग इसे खुद ही लागू करना सीख जाएगा और इसके बाद अपने आप रात को आपके भोजन और नींद का रूटीन बदल जायेगा। 
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सही रूटीन की शुरुआत तुरंत करें - फोटो : iStock
आज से ही लागू कीजिये 

कल से एक्सरसाइज करना शुरू करना है, कल से मैं डाइटिंग शुरू करूंगा/ करुँगी, ये विचार कितने लोगों का होता है और कितने लोग इसमें सफल हो पाते हैं? ज्यादातर लोग असफल हो जाते हैं। इसलिए उस कल पर निर्भर रहने की बजाय आज से ही प्रयास शुरू करें। याद रखिये आपके दिमाग को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी आपकी ही है और प्रयास करते रहने से सफलता मिल कर रहती है। लेकिन कोशिश आपको ही करनी होगी। आपका दिमाग आप पर हावी होने लगे इसके पहले आपको उसे कंट्रोल में करना होगा। इसलिए कोशिश आज से ही शुरू करें।  
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