सपने संजोना इंसान की फितरत है। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए ख्वाब देखना है भी जरूरी लेकिन बहुत बार हम सिर्फ ख्वाबों की दुनिया में रहने लगते हैं। ये सही नहीं है और बहुत बार कुछ ख्वाब सच्चाई बनकर जब सामने आते हैं, तो वो बिल्कुल ही अलग होते हैं। सिडनी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर लिसा विलियम्स इसे 'अफेक्टिव फोरकास्टिंग' का नाम देती हैं। जिसका मतलब है हम ऐसे सपनों की दुनिया में कई बार जीते हैं, जहां सब कुछ हरा-हरा नजर आता है लेकिन सच्चाई इसके बरअक्स होती है।
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अगर आपका दिल नौकरी से ऊबने लगा है तो करें ये काम
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नौकरी में नहीं लगता मन
मिसाल के लिए जब कोई लॉटरी में पैसा लगाता है तो उसे लगता है जीतने पर वो अपने सारे सपने पूरे कर लेगा। लेकिन देखा गया है कि जब कोई लॉटरी जीत जाता है तो उसकी खुशी पल भर की होती है। हम जो भी पेशा चुनते हैं अपनी मर्जी से चुनते हैं। अपनी मर्जी की नौकरी करते हैं। कुछ दिन तो उसमें खूब मजा आता है लेकिन जब लगने लगता है कि इस काम में आगे बढ़ने की उम्मीद कम है, तो हमारा दिल ऊबने लगता है। हम फिर कोई और सपना देखने लगता है।
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नौकरी में नहीं लगता मन
हमें लगता है हम अगर फलां काम करें तो शायद ज्यादा मजा आएगा। हम अपनी प्रतिभा का सही इस्तेमाल भी कर पाएंगे। दरअसल, अपने ख्वाबों की नौकरी पाकर हम खुश तो हो जाते हैं, लेकिन उस काम से जुड़ी चुनौतियां हमें बर्दाश्त नहीं होतीं। लंदन में रहने वाली सू आर्नोल्ड को तारीख के पन्ने पलटकर उनमें छुपी सच्चाईयां जानने का शौक था। इसलिए उन्होंने पुरातत्त्ववेत्ता बनने की सोची। वो बन भी गईं लेकिन जब उन्होंने काम करना शुरू किया तो उसका भरपूर आनंद नहीं ले सकीं।
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नौकरी में नहीं लगता मन
जैसा उन्होंने सोचा था वैसा कुछ भी उन्हें करने को नहीं मिल रहा था। हालांकि उन्हें अपने फैसले पर अफसोस नहीं था लेकिन खुद के बारे में उन्हें एक सच्चाई का अंदाजा हो गया कि वो इस काम के लिए नहीं बनी हैं। हालांकि ऐतिहासिक जगहों पर जाना और किताबें पढ़ना उन्हें आज भी अच्छा लगता है। ऑस्ट्रेलिया की तस्मानिया यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की सीनियर लेक्चरर प्रोफेसर रशेल ग्रीव का कहना है कि बहुत बार नौकरी के मामले में हमारे फैसले तार्किक नहीं होते।
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नौकरी में नहीं लगता मन
हम वही कर बैठते हैं जो उस वक्त हमें खुशी देता है लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए। हम जो भी नौकरी करते हैं उससे हमारी पहचान जुड़ जाती है और सारी जिंदगी का दारोमदार उसी पर टिक जाता है। इसलिए नौकरी के मामले में फैसला बहुत सोच समझ कर करना चाहिए। जल्दबाजी में जो भी फैसला करेंगे आगे चल कर आपको खुद ही अपना फैसला बदलना पड़ जाएगा। हर पेशे के साथ उससे जुड़ी चुनौतियां भी रहती हैं। लिहाजा कोई भी पेशा चुनने से पहले उसकी चुनौतियों के लिए भी खुद को तैयार रखें।
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नौकरी में नहीं लगता मन
- फोटो : Georgina Kenyon
किसी भी नौकरी की शुरुआत में कुछ दिन काम करने के बाद लगने लगता है शायद फैसला गलत था। लेकिन जब उसी काम में 20 साल लगा कर आप जहां पहुंच जाएंगे, तब ये याद भी नहीं रहेगा कि आप किन मुश्किलों से पार पाकर आप यहां तक पहुंचे हैं। इस लेख को लिखने वाली जॉर्जिना केनन खुद पेशे से एक पत्रकार थीं लेकिन बचपन से ही उन्हें जानवरों से प्यार था। लिहाजा तीन साल पत्रकारिता करने के बाद जब उन्हें मौका मिला कि वो जानवरों के लिए कुछ करें तो वो फौरन ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया के अभ्यारण्य चली गईं।
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नौकरी में नहीं लगता मन
यहां उन्हों ने अपने करियर का एक दूसरा विकल्प नजर आया था। लेकिन जिस तरह के काम उन्हें यहां आकर करने पड़े उससे उन्हें लगा कि ऐसा कुछ करने का सपना तो उन्हों ने नहीं देखा था। उन्हे सार्वजनिक शौचालय तक साफ करने पड़े। जानवरों को खिलाने से लेकर नहलाने, बीमार होने पर सेवा करने और मरने पर दफ़नाने तक के काम करने पड़े। कुछ वक्त की मुश्किलें झेलने के बाद वो अपने काम में दिलचस्पी लेने लगीं क्योंकि उन्हें क़ुदरत के नजदीक रहना अच्छा लगता था।
लिहाजा उन्हें लगा कि अपने जैसे जहन के लोगों के साथ रह कर ही वो अपने काम को ज्यादा बेहतर ढंग से कर पाएंगी। फिलहाल वो ऑस्ट्रेलिया के ब्लू माउंटेंस में रहती हैं जहां से जानवरों को जंगलों में घूमता देख जिंदगी का मजा ले रही हैं। ये जरूरी नहीं कि आपने जो सोचा है आपको वही मिल जाए लेकिन ये एक बड़ी सच्चाई है कि हरेक पेशे के साथ कुछ कुछ ना कुछ चुनौतियां हैं। लिहाजा जब भी अपने पेशे का इंतिखाब करें तो सोच समझ कर करें। जल्दबाज़ी में कोई फैसला ना लें।