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श्रीदेवी की फिल्मों के ये 5 शानदार डायलॉग्स जिसने भी सुने फायदे में रहा

Sun, 04 Mar 2018 11:35 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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भले ही बॉलीवुड की सबसे चुलबुली अदाकारा श्रीदेवी ने दुनिया को अलविदा कह दिया हो पर उनकी फिल्मों के ये 5 फेमस डायलॉग्स हमेशा लोगों को बिंदास लाइफ जीने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। अगर आप भी कभी जीवन के किसी मोड़ पर खुद को अकेला महसूस करें तो इन डॉयलॉग्स को याद कीजिए। यकीन मानिए आपकी लाइफ से टेंशन कोसो दूर चली जाएगी। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ दमदार डायलॉग्स के बारे में.... 
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फिल्म-घर संसार (1986) 
‘बड़ों के मुंह से निकली हुई गालियां, छोटों को दुआ बनकर लगती हैं। जो बड़ों की डांट खा लेता है वो जिंदगी की ठोकरें नहीं खाता।’
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फिल्म-लम्हे (1991) 
‘सभी बड़े होते हैं मगर कोई अपने बड़ों से बड़ा नहीं होता।’

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फिल्म-घर संसार (1986) 
 ‘बड़ों के मुंह से निकली हुई गालियां, छोटों को दुआ बनकर लगती हैं। जो बड़ों की डांट खा लेता है वो जिंदगी की ठोकरें नहीं खाता।’
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 फिल्म –मि. बेचारा (1996) 
‘लड़कियां कपूर की तरह होती हैं…तीली लगी नहीं की जलकर रोशनी देने लगती हैं…और तुम लड़के ट्यूबलाइट की तरह होते हो बहुत देर से जलते हो…’
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sridevi
फिल्म-सोने पे सुहागा (1990) 
 ‘हर इंसान अपने कर्मों से पहचाना जाता है, अपने बाप के कर्मों से नहीं।’ 
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