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रंग देखकर सामान खरीदने के फायदे कम नुकसान ज्यादा है, शोध में हुआ है ये खुलासा

Tue, 17 Apr 2018 06:48 PM IST
रूपायन डेस्क/ अमर उजाला
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gender discrimination
लड़कियों के लिए कोई सामान खरीदते समय गुलाबी रंग की प्रमुखता तो लड़कों के लिए ब्ल्यू रंग का चुनाव। देखने में यह बात बहुत छोटी लगे, मगर विशेषज्ञ इसे सही नहीं मानते हैं। 
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gender discrimination
एक शोध में पाया गया है कि यदि खिलौनों का रंग जेंडर (लिंग) पर आधारित होता है तो इससे बच्चों को आसानी से लिंग पर आधारित होने वाले भेदभाव की तरफ आकर्षित किया जा सकता है और इससे हमारे समाज में लिंग को लेकर होने वाले भेदभाव को कम करने की उम्मीदों को झटका लग सकता है, क्योंकि बच्चे जब एक बार लिंग पर आधारित पहचान को सीख जाते हैं, तब उनका बर्ताव भी उसी तरह का हो जाता है और उनके इस बर्ताव को बदलने में बहुत समय लगता है। 
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जर्नल सेक्स रोल्स में प्रकाशित इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने प्री-स्कूल के 129 बच्चों को शामिल किया था। इन बच्चों की उम्र पांच से सात वर्ष थी और इन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया था। 
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यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग-कॉन्ग के शोधकर्ता सूई पिंग येंग बताती हैं कि बच्चों में लिंग आधारित भेदभाव को रोकने के लिए खिलौना निर्माता और पेरेंट्स को रंगों पर आधारित मिलने वाले खिलौनों को खरीदने से बचना चाहिए। अगर आप भी अपनी बेटी के लिए गुलाबी और बेटे के लिए नीले रंग का खिलौना दिलाने की सोच रही हैं, तो थोड़ी सावधानी की जरूरत है, क्योंकि अनजाने में ही आप बेटे-बेटी में भेदभाव कर रही हैं।
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