लड़कियों के लिए कोई सामान खरीदते समय गुलाबी रंग की प्रमुखता तो लड़कों के लिए ब्ल्यू रंग का चुनाव। देखने में यह बात बहुत छोटी लगे, मगर विशेषज्ञ इसे सही नहीं मानते हैं।
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gender discrimination
एक शोध में पाया गया है कि यदि खिलौनों का रंग जेंडर (लिंग) पर आधारित होता है तो इससे बच्चों को आसानी से लिंग पर आधारित होने वाले भेदभाव की तरफ आकर्षित किया जा सकता है और इससे हमारे समाज में लिंग को लेकर होने वाले भेदभाव को कम करने की उम्मीदों को झटका लग सकता है, क्योंकि बच्चे जब एक बार लिंग पर आधारित पहचान को सीख जाते हैं, तब उनका बर्ताव भी उसी तरह का हो जाता है और उनके इस बर्ताव को बदलने में बहुत समय लगता है।
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gender discrimination
जर्नल सेक्स रोल्स में प्रकाशित इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने प्री-स्कूल के 129 बच्चों को शामिल किया था। इन बच्चों की उम्र पांच से सात वर्ष थी और इन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया था।
यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग-कॉन्ग के शोधकर्ता सूई पिंग येंग बताती हैं कि बच्चों में लिंग आधारित भेदभाव को रोकने के लिए खिलौना निर्माता और पेरेंट्स को रंगों पर आधारित मिलने वाले खिलौनों को खरीदने से बचना चाहिए। अगर आप भी अपनी बेटी के लिए गुलाबी और बेटे के लिए नीले रंग का खिलौना दिलाने की सोच रही हैं, तो थोड़ी सावधानी की जरूरत है, क्योंकि अनजाने में ही आप बेटे-बेटी में भेदभाव कर रही हैं।