आपको डांस करना अच्छा लगता है? यदि हां, तो अपनी इस आदत को जारी रखिए। जिस तरह संगीत की धुन सुनकर मन-मस्तिष्क प्रसन्न और तनाव से दूर रहता है, ठीक उसी तरह डांस करने से सेहत पर सकारात्मक असर होता है। कुछ लोग डांस करने में शर्माते हैं। कुछ इसलिए भी डांस करने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डांस की एबीसीडी भी नहीं आती। अपने मन से इस डर को निकालें। कोई डांस क्लास ज्वाइन करके देखें। आपको जो भी डांस आता है, उसे ही करें। हर तरह के डांस से शरीर को लाभ होता है। ऐसा करने से आप खुश तो रहेंगे ही, शारीरिक रूप से फिट भी रहेंगे।
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dance therapy
डांस एक थेरेपी
डास करना एक थेरेपी है। इससे दिमाग एक्टिव होता है। दिमाग की नसें खुलती हैं। यदि डांस थेरेपी को रुटीन में शामिल किया जाए, तो मूड में सकारात्मक रूप से परिवर्तन आता है।
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तनाव से मिलता है छुटकारा
प्रतिदिन आप दस से पंद्रह मिनट भी डांस करते हैं, तो एंडॉर्फिन लेवल ठीक रहता है। यह तनाव और चिंता को दूर रखता है। डांस करने के बाद हल्का महसूस होता है, क्योंकि इससे कैलोरी घटती है। डांस मन और शरीर के बीच सामंजस्य को बेहतर बनाता है। इसके अलावा डांस करने से शरीर लचीला होता है।
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दिल रहे स्वस्थ
इटली में हुए एक शोध के अनुसार, जो लोग दिल से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त हैं, उन्हें भी अपने रोजमर्रा की जिंदगी में डांस शामिल करना चाहिए। दिल को स्वस्थ रखने के लिए इससे बेहतर उपाय कोई और नहीं। डांस करने से हृदय में रक्त का संचार अच्छी तरह से होता है। बॉल डांसिंग से हृदय को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। साथ ही इससे रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि बॉल डांस से कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा कम हो जाता है। रक्तचाप नियंत्रित रहता है। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी सुधार आता है।
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डांस करें, वजन घटाएं
दि आप प्रतिदिन डांस करते हैं, तो इससे 150 से 500 कैलोरी तक आप कम कर सकते हैं। वजन कम करने के लिए जुम्बा डांस को बेहतर माना गया है। इस डांस फॉर्म को यदि आप 60 मिनट भी करते हैं, तो 400 से 600 कैलोरी बर्न कर सकते हैं। इससे पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। पेट की मांसपेशियां लचीली बनती हैं, जिससे पाचनक्रिया सुचारू रूप से काम करती है। डांस करने से रोगप्रतिरोध क्षमता दुरुस्त होती है। हालांकि अपनी सेहत और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही डांस करें।
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हड्डियां हों मजबूत
युवावस्था से ही यदि आप डांस को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो बढ़ती उम्र में हड्डियों से संबंधित रोगों से बचाव होता है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस ठीक होता है। डांस हार्मोन्स को नियंत्रित करता है। हड्डियों में से कैल्शियम को कम होने से रोकता है। डांस करने से हड्डियों के जोड़ भी मजबूत होते हैं।
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मांसपेशियां हों सक्रिय
डास करते समय शरीर की सभी मांसपेशियों का इस्तेमाल होता है। इससे मांसपेशियां मजबूत होने के साथ-साथ टोन भी होती हैं। अधिक सक्रिय बनी रहती हैं। शरीर सुडौल एवं स्वस्थ रहता है। डांस करने से मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति बढ़ जाती है और ऑक्सीजन का उपयोग करने की क्षमता में सुधार होता है।
एक्सपर्ट की राय
सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी कहती हैं कि डांस सबसे अच्छा तरीका है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का, जिसे कई बार लोग बोलकर व्यक्त नहीं कर पाते हैं। चूंकि शारीरिक गति विचारों और अहसासों से संबंधित होता है, इसलिए किसी भी फॉर्म का डांस करने से तुरंत ही आपके अंदर की भावनाओं और व्यवाहर में सकारात्मक बदलाव दिखने लगता है। डांस करने से शारीरिक रूप से तो आप फिट रहते ही हैं, ग्रॉस मोटर स्किल्स डेवलपमेंट में भी वृद्धि होती है। आप अधिक क्रिएटिव होते हैं। कल्पनाशकि्त बढ़ती है। कई अध्ययनों की मानें, तो डांस थेरेपी कैंसर से संबंधित थकान को दूर करने में मदद करती है। यह शारीरिक संतुलन को भी सुधारती है।