तन्हा रहना, पार्टियों से दूरी बनाना और मित्रों से मिलने में आना-कानी करना अगर ख़ुद का फ़ैसला है, तो ये काफ़ी फायदेमंद हो सकता है।अमरीका की सैन जोस यूनिवर्सिटी के ग्रेगरी फीस्ट ने इस बारे में रिसर्च की है। फीस्ट इस नतीजे पर पहुंचे कि ख़ुद के साथ वक़्त बिताने से आपकी क्रिएटिविटी को काफ़ी बूस्ट मिलता है। इससे आपकी ख़ुद-ऐतमादी यानी आत्मविश्वास बढ़ता है। आज़ाद सोच पैदा होती है। नए ख्यालात का आप खुलकर स्वागत करते हैं।
जब आप कुछ वक़्त अकेले बिताते हैं तो आपका जहन सुकून के पलों का बख़ूबी इस्तेमाल करता है। शोर-शराबे से दूर तन्हा बैठे हुए आपका जहन आपकी सोचने-समझने की ताकत को मजबूत करता है। आप पुरानी बातों के बारे में सोचकर अपनी याददाश्त मजबूत करते हैं।
अमरीका की ही बफ़ैलो यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक जूली बोकर के रिसर्च से फ़ीस्ट के दावे को मजबूती मिली है। जूली कहती हैं कि इंसान तीन वजहों से लोगों से घुलने-मिलने से बचते हैं। कुछ लोग शर्मीले होते हैं इसलिए दूसरों से मिलने-जुलने से बचते हैं। वहीं कुछ लोगों को महफ़िलों में जाना पसंद नहीं होता। कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो मिलनसार होने के बावजूद अकेले वक़्त बिताना पसंद करते हैं।
जूली और उनकी टीम ने रिसर्च में पाया कि जो लोग ख़ुद से अकेले रहना पसंद करते हैं, उनकी क्रिएटिविटी बेहतर होती जाती है। अकेले रहने पर वो अपने काम पर ज़्यादा ध्यान दे पाते हैं। अपनी बेहतरी पर फोकस कर पाते हैं। नतीजा उनकी क्रिएटिविटी बढ़ जाती है।
वैसे, अकेलेपन के फायदे बताने वाले ये मनोवैज्ञानिक कोई नई चीज नहीं बता रहे हैं। हिंदू धर्म से लेकर बौद्ध धर्म तक, बहुत से मजहब हैं जो अकेले तप करने और चिंतन-मनन करने की सलाह देते हैं।असल में अकेले रहने पर हमारा दिमाग आराम की मुद्रा में आ जाता है। वो आरामतलबी के इस दौर में याददाश्त को मजबूत करने और जज़्बात को बेहतर समझने में जुट जाता है।वहीं आप किसी के साथ होते हैं, तो आपका ध्यान बंटता है। आपके जहन को सुकून नहीं मिल पाता।
ग्रेगरी फ़ीस्ट कहते हैं कि लोग अगर ख़ुद से अकेले रहना, तन्हाई में वक़्त बिताना पसंद करते हैं। तो ये उनके लिए ज़्यादा फायदेमंद है। लेकिन महफ़िलों के आदी लोग अकेलेपन के शिकार हों, ये परेशानी की बात है।अच्छा हो कि हम गिने-चुने दोस्त ही बनाएं। उनके साथ ही क्वालिटी टाइम बिताएं। बनिस्बत इसके कि हम रोजाना पार्टियां करें, महफ़िलें सजाएं। बीच-बीच में थोड़ा वक़्त तन्हाई में बिताएं। ख़ुद पर फोकस करें। चिंतन-मनन करें। ये तालमेल बनाना हमारे लिए सबसे ज़्यादा अच्छा साबित होगा।