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Shardiya Navratri : शारदीय नवरात्रि पर जानें मां दुर्गा के 9 रूपों के नाम और उनसे जुड़े रहस्य

Thu, 11 Sep 2025 11:10 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत 22 सितंबर से होगी और विजयादशमी 2 अक्टूबर को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उत्पत्ति, इतिहास और महत्व।
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नवरात्रि के नौ स्वरूप - फोटो : adobe
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि का पर्व शक्ति, भक्ति और उत्साह का प्रतीक है। यह नौ दिनों का त्योहार मां दुर्गा और उनके नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित है। हर दिन देवी के एक अलग रूप की पूजा होती है, जिनका अपना विशेष महत्व, कथा और संदेश है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, मां दुर्गा के ये नौ रूप न केवल शक्ति और साहस का प्रतीक हैं, बल्कि जीवन जीने की कला और मानव मूल्यों की प्रेरणा भी देते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और धर्म की विजय की याद दिलाता है। यह पर्व स्त्री शक्ति के सम्मान और उनके महत्व को उजागर करता है। नवरात्रि के नौ दिन साधना, उपवास, भक्ति और आत्मशुद्धि के लिए माने जाते हैं। यह समय शक्ति की आराधना और अपने जीवन को सही दिशा देने का अवसर है।

शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत 22 सितंबर से होगी और विजयादशमी 2 अक्टूबर को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उत्पत्ति, इतिहास और महत्व।
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मां शैलपुत्री - फोटो : adobe stock
मां शैलपुत्री

शैलराज हिमालय की पुत्री पार्वती का यह स्वरूप नवरात्रि के पहले दिन पूजित होता है। मां शैलपुत्री पर्वत की स्थिरता और दृढ़ निश्चय का प्रतीक हैं। इनके दर्शन से जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
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मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : adobe
मां ब्रह्मचारिणी

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह स्वरूप तप, साधना और संयम का प्रतीक है। कहा जाता है कि इनके पूजन से विद्या, ज्ञान और आत्मबल प्राप्त होता है।

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मां चंद्रघंटा - फोटो : adobe stock
मां चंद्रघंटा

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना होती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र सजा होता है और यह शांति, सौंदर्य और वीरता की देवी हैं। इनके पूजन से साहस और निर्भयता मिलती है।
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कूष्मांडा देवी - फोटो : adobe
मां कूष्मांडा

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जिनके बारे में मान्यता है कि उन्होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति की। इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके पूजन से आयु, यश और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
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देवी स्कंदमाता के मंत्र - फोटो : adobe stock
मां स्कंदमाता

पांचवे दिन मां स्कंदमाता की आराधना होती है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें यह नाम मिला। मां स्कंदमाता की पूजा से भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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मां कालरात्रि - फोटो : adobe stock
मां कालरात्रि

सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। यह देवी अंधकार और बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। इन्हें ‘शुभंकरणी’ भी कहा जाता है क्योंकि यह भक्तों को हमेशा शुभ फल देती हैं।

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मां महागौरी - फोटो : Amar Ujala
मां महागौरी

आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। उनका स्वरूप श्वेत और अत्यंत मनमोहक है। इनके पूजन से पवित्रता, सौंदर्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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मां सिद्धिदात्री - फोटो : Amar Ujala
मां सिद्धिदात्री

नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। यह देवी सिद्धियों और शक्तियों को प्रदान करने वाली हैं। इनकी कृपा से भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
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