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शहीदी दिवस: तय हुई थी 24 मार्च की तारीख, पर एक दिन पहले ही दे दी गई थी भगत सिंह को फांसी

Mon, 22 Mar 2021 07:35 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शहीदी दिवस 2021 - फोटो : Twitter/@ind_Cyborg
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को आज देश में कौन नहीं जानता है। उन्हीं की याद में 23 मार्च को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, इसी दिन साल 1931 में इन तीनों वीर सपूतों को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दे दी थी। उन्हें लाहौर षड्यंत्र के आरोप में फांसी पर लटकाया गया था। लेकिन क्या आपको पता है कि इन तीनों को फांसी दिए जाने की तारीख 24 मार्च 1931 तय की गई थी, लेकिन उससे एक दिन पहले ही यानी 23 मार्च को ही उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। यह खबर देशभर में आग की तरह फैल गई थी। 
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शहीदी दिवस 2021 - फोटो : Social media
दरअसल, इन तीनों वीर सपूतों को फांसी दिए जाने की खबर से देश में लोग भड़के हुए थे और वो उन्हें देखना चाहते थे। तीनों की फांसी को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इससे अंग्रेज सरकार डर गई थी। उन्हें लगा कि माहौल बिगड़ सकता है, इसलिए उन्होंने फांसी का दिन और समय बदल दिया और भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को एक दिन पहले ही फांसी दे दी गई। 
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भगत सिंह - फोटो : Twitter/@IndiaHistorypic
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने आठ अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दे दी थी। इसके बाद करीब दो साल उन्हें जेल में रखा गया और फिर बाद में भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी पर लटका दिया गया था।

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भगत सिंह - फोटो : Twitter/@Singhfarmer1313
करीब दो साल तक जेल में रहने के दौरान भगत सिंह लेख लिखकर अपने क्रांतिकारी विचार व्यक्त करते रहते थे। अपने लेखों में उन्होंने कई तरह से पूंजीपतियों को अपना शत्रु बताया है। उन्होंने लिखा है कि मजदूरों का शोषण करने वाला चाहे एक भारतीय ही क्यों न हो, वह उनका शत्रु है। 
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भगत सिंह - फोटो : Twitter/@RamanGrew
भगत सिंह कई भाषाओं के जानकार थे। उन्हें हिंदी के साथ-साथ, पंजाबी, उर्दू, बांग्ला और अंग्रेजी आती थी। बांग्ला उन्होंने अपने साथी बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से भारतीय समाज में लिपि, जाति और धर्म के कारण आई दूरियों पर दुःख भी व्यक्त किया था। आज भी भारत की जनता भगत सिंह को आजादी के दीवाने के रूप में देखती है, जिसने अपनी जिंदगी देश के लिए समर्पित कर दी। 
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