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यौन हिंसा की शिकायत की क्या कीमत चुकाती हैं महिलाएं?

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ऐसा हो सकता है कि किसी औरत ने रेप की शिकायत की हो और उसके मामले में कार्रवाई भी हुई हो जिसके बाद उसे न्याय भी मिल गया हो, लेकिन ऐसे मामलों की भी कमी नहीं है, जिनमें जब किसी औरत ने अपने साथ हुए रेप की शिकायत की तो उसकी जिंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई। अगर आपको ये लगता है कि ऐसा सिर्फ भारत में होता है, तो ऐसा नहीं है।

क्या रेप की शिकायत करने के साथ ही औरत की जिंदगी बर्बाद हो जाती है? इस बात पर एकतरफा कुछ भी नहीं कहा जा सकता। क्योंकि ये सच है कि कुछ औरतों को न्याय मिलता है लेकिन इस सच को भी नकारा नहीं जा सकता कि कुछ औरतों को अपनी बात रखने की भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

बीते कुछ सालों में रेप से जुड़े मामलों को लेकर जागरुकता बढ़ी है। कई तो ऐसे मामलों भी सामने आए जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टन का मामला हो या फिर अभिनेता बिल कोस्बी का केस। इन हाई प्रोफाइल मामलों ने रेप और यौन हिंसा जैसे मामलों को सुर्खियों में ला दिया है। भारत में हुए गैंग रेप के मामलों और स्पेन में भी हुई ऐसी घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने व्यापक रूप से प्रकाशित किया।
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बच्ची से रेप और हत्या - फोटो : demo
#MeToo
इन सबका एक नतीजा ये हुआ कि #MeToo जैसे आंदोलन पूरी दुनिया में शुरू हो गए। द रेपिस्ट इज यू जैसे गाने पूरी दुनिया में छा गए। लेकिन सिर्फ जागरुकता ही पर्याप्त नहीं है। पीड़ित को न्याय भी तो मिले। रेप पीड़ितों के लिए अभियान चलाने वालों का कहना है कि अपनी शिकायतें लेकर आने वाली महिलाओं की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ी है लेकिन इससे किसी भी तरह रेप के मामले नहीं घटे हैं।

अकेले ब्रिटेन में साल 2019 के आंकड़े अपने निम्नतम स्तर पर रहे। इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए रेप केस के हर सौ मामलों में से सिर्फ तीन मामलों में ही अभियुक्तों को सजा मिली। जबकि 10 साल पहले रेप के अभियुक्त को कोर्ट से सजा मिलना आज की तुलना में काफी आसान था।
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साइप्रस का न्याय और शर्मिंदगी
इसी सप्ताह एक बेहद घबराई-परेशान ब्रिटिश किशोरी अपने घर लौटी। साइप्रस की कानूनी कार्रवाई के चलते यह किशोरी बीते छह महीने से हिरसात में थी। 

"साइप्रस का न्याय- धिक्कार है! महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ताओं के लिए यह नारा बन गया। इन प्रदर्शनों में वो औरतें भी शामिल थीं जो इसरायल से थीं, वे कोर्ट के बाहर खड़ी होकर ये नारे बार-बार दोहरा रही थीं।"

वे उस किशोरी के समर्थन में खड़ी थीं जिसे रेप का झूठा आरोप लगाने को लेकर सजा सुनाई गई थी। साइप्रस के सांसद कोउकोउमा ने बीबीसी से कहा "कुछ लोग कह सकते हैं कि यह राहत की खबर हो सकती है, उस लड़की के लिए भी।"

"लेकिन इस सारे मामले की कार्रवाई और इस सामले को जिस तरह से आगे बढ़ाया गया वो बिल्कुल भी ठीक नहीं था। बहुत से सवाल थे जिनका जवाब मिलना बाकी था।"

यह केस जुलाई 2019 का है। जब एक किशोरी ने पुलिस से कहा कि 12 इसरायली मर्द उसके कमरे में धमक पड़े। उस वक्त वो उनके एक दोस्त के साथ आपसी सहमति से सेक्स कर रही थी। उसका कहना था कि वो कमरे में धमक पड़े और उन्होंने उसका रेप किया। उन मर्दों को गिरफ्तार किया गया लेकिन गवाही की जरूरत नहीं समझी गई।

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 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' मामले - फोटो : AMAR UJALA
दावे पीछे रह गए
हालांकि उस किशोरी से घंटों तक पूछताछ की गई और जिस वक्त पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी वहां उसके साथ कोई वकील नहीं था। अंत में वह अपने ही किए दावों से पीछे हट गई। सभी 12 इसरायली आजाद कर दिए गए और वे घर लौट गए लेकिन इस लड़की को जेल भेज दिया गया। उनकी मां का कहना था कि उनकी बेटी अपने साथ हुए रेप की शिकायत कराने बतौर पीड़ित गई थी लेकिन...

उनकी मां ने बीबीसी से कहा, "उससे एक दूसरा बयान दर्ज कराने को कहा गया और उसने बताया कि उसे इस झूठा बयान को देने के लिए मजबूर किया गया। उसने मुझे बताया कि जिस वक़्त ये सारा कुछ हो रहा था वो बुरी तरह से डर हुई थी।"
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सांकेतिक तस्वीर
गिरफ्तारी का डर
'उन्होंने कहा कि वो उसे गिरफ्तार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उसने इस नए बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए तो वे उसके ख़िलाफ अंतरराष्ट्रीय वारंट लेकर आएंगे और उसे गिरफ़्तार कर लेंगे। और अगर वो उनके दिए बयान पर हस्ताक्षर कर देती है तो वे उसे जाने देंगे। और उस समय वो सिर्फ और सिर्फ वहां से निकलना चाहती थी।" उस किशोरी की वकील लेविस पावर क्यूसी ने बताया, "यह बेहद परेशान करने वाला और चिंता में डालने वाला था।"

"वो करीब साढ़े चार हफ्ते के लिए हिरासत में थी। वो एक ऐसी जेल में थी जहां पहले से ही आठ औरतें थीं। उसकी जमानत की शर्ते भी बेहद कठोर थीं।"

लेकिन अब वो आजाद है और अपने घर जा सकती है लेकिन उसका नाम पुलिस की लिस्ट में आ चुका है। उनकी मां का कहना है कि उनकी बेटी अब भी उस बुरे वक़्त के सदमे से बाहर नहीं आ सकी है। किशोरी का कहना है कि पुलिस ने उसे उसकी बात से पलटने के लिए मजबूर किया। उस पर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला। 

उनकी वकील का कहना है कि उनकी लीगल टीम यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स जाने के लिए विचार कर रही है। "यह केस अभी तक खत्म नहीं हुआ है।"
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Shutterstock
लड़कियों की इज्जत को दांव पर लगाने जैसा है ये
भले ही कोई रेप केस अमरीका में हुआ हो, स्पेन में हुआ हो, भारत में हुआ हो, साइप्रस में हुआ हो या फिर ब्रिटेन में, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि रेप के मामले में महिला को ही सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। बहुत से मामलों में पीड़ित को लग सकता है कि अभियुक्त के बजाय पुलिस, मीडिया और न्याय व्यवस्था और लोगों द्वारा उन्हें ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया है।

चैरिटी संस्था रेप क्राइसिस इंग्लैंड एंड वेल्स की प्रवक्ता कैटी रसेल का कहना है कि भले ही एक लंबी न्याय प्रक्रिया के बाद रेप पीड़िता को न्याय मिल भी जाए तो भी इस दौरान उनके साथ जिस तरह का व्यवहार होता है वो मनोबल तोड़ने के लिए काफी होता है।

"इन सबके पीछे लिंग भेद और गलत भावना निहित होती है। महिलाओं के लिए ऐसा मान लिया जाता है कि उनका उन्हीं के शरीर पर अधिकार नहीं है क्योंकि वो पुरुषों की तुलना में उतनी महत्वपूर्ण नहीं।"
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सांकेतिक तस्वीर
मेरे साथ भी बलात्कार हुआ
एक ओर जहां साइप्रस की रेप पीड़िता अपने घर लौट चुकी है वहीं बहुत सी औरतें हैं, जिन्होंने ये स्वीकार किया है कि साइप्रस में उनके साथ भी बलात्कार हुआ। उन्होंने माना कि उन्होंने अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार की शिकायत नहीं दर्ज कराई। उन्होंने माना कि इसके पीछे एक ही वजह थी और वो था उनका डर।

सोफी(बदला हुआ नाम) छुट्टियां बिताने साइप्रस गई थीं। उन्होंने बीबीसी से कहा "जो हुआ, वह देखना बेहद दुखद था।" "मैं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही थी। वहां ऐसा लग रहा था कि वहां मौजूद मर्द मुझे उनकी मर्ज़ी से छूने के लिए आजरद हैं।"

वह बताती हैं कि वो एक बीच पार्टी में थीं और तभी एक शख्स उनके लिए एक ड्रिंक लेकर आया। "मैं यह समझ पा रही थी कि मैं धीरे-धीरे अब अचेत हो रही हूं और उसके बाद मैं एक बात समझ गई थी कि कोई मेरे साथ यौन हिंसा कर रहा है।"

अगली सुबह जब सोफी टॉयलेट गईं तो उन्हें उनकी वजाइना से कंडोम मिला, जिससे पुष्टि हो गई कि उनके साथ रेप हुआ। सोफी कहती हैं कि वो शिकायत करना चाहती थीं लेकिन उन्हें किसी से समर्थन नहीं मिला। हालांकि अब वो अपने उस फैसले को लेकर खुश ही हैं कि उन्होंने शिकायत नहीं की वरना उन्हें भी उस किशोरी की तरह बहुत कुछ झेलना पड़ता।

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सांकेतिक तस्वीर
हमें बदलाव की जरूरत है
एक बड़ी समस्या यह है कि हर संस्कृति क़ानून के तहत सहमति को अपने तरीके से समझती है। कुछ देशों जैसे ब्रिटेन में, अगर सहमति से सेक्स नहीं किया है तो यह रेप की श्रेणी में आता है। साल 2018 के स्वीडन के कानून के तहत निष्क्रिय होना सेक्स के लिए सहमति देने का संकेत नहीं है। लेकिन हर जगह ऐसे नियम नहीं हैं।

केटी रसेल कहती हैं, "अगर हम चाहते हैं कि चीजें सुधरें तो सिर्फ कानून बनाना ही काफी नहीं है।" बात अगर भारत की करें तो यहां रेप अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कोर्ट जा रही एक महिला को उसके अभियुक्तों ने ही जला दिया।

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सांकेतिक तस्वीर
मान्यताओं को बदलने की जरूरत है
हमें एक तरह के सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत है जो रुढ़ियों और गलत विचारों से परे हो। इसरायल में रेप क्राइसिस सेंटर एसोसिएशन के प्रमुख ओरित सोलिट्ज़ेनू ने बताया कि वो किशोरी के परीक्षण के लिए साइप्रस गए थे। उन्होंने बीबीसी को बताया कि बलात्कार के बारे में झूठ बोलेने की सज़ा चौंकाने वाली थी।

"उन्होंने मुझे सजा के बारे में जो बताया वो पूरी तरह से एक पिछड़ी सोच को दिखाने वाला था। साफ समझ आ रहा था कि उन्हें बलात्कार की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं। वहां के जज को यह अवश्य समझना चाहिए कि क्या होता है जब एक लड़की कहती है कि उसके साथ रेप हुआ है।"
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रेप पीड़िता, सोशल मीडिया और बदले की भावना
बहुत बार ऐसा भी होता है कि रेप पीड़िता और उसके परिवार को सोशल मीडिया पर लोगों के भद्दे कमेंट्स झेलने पड़ते हैं और बहुत बार ऐसा भी होता है कि उन्हें बदले की भावना का भी शिकार होना पड़ता है। कई बार 'रीवेंज पॉर्न' का।

साइप्रस अटैक के घंटों बाद एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें बहुत से आदमी एक ब्रिटिश औरत के साथ सेक्स करते दिख रहे थे। स्पेन में जिस महिला के साथ गैंग रेप हुआ उसने भी इस बात की पुष्टि की कि उसके साथ रेप करने वालों ने उसका वीडियो बनाया था। जिसे बाद में बहुत से ग्रुप में शेयर भी किया गया।

रेप के झूठे आरोप लगाए जाते हैं लेकिन ये बहुत कम मामलों में होता है। शायद एक प्रतिशत से भी कम मामलों में ऐसा होता है। और कोई ऐसा करे भी क्यों...कौन इस तरह सामने आना चाहेगा और अपनी जिंदगी को तमाशा बनाना चाहेगा?
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