सांकेतिक तस्वीर
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लड़कियों की इज्जत को दांव पर लगाने जैसा है ये
भले ही कोई रेप केस अमरीका में हुआ हो, स्पेन में हुआ हो, भारत में हुआ हो, साइप्रस में हुआ हो या फिर ब्रिटेन में, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि रेप के मामले में महिला को ही सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। बहुत से मामलों में पीड़ित को लग सकता है कि अभियुक्त के बजाय पुलिस, मीडिया और न्याय व्यवस्था और लोगों द्वारा उन्हें ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया है।
चैरिटी संस्था रेप क्राइसिस इंग्लैंड एंड वेल्स की प्रवक्ता कैटी रसेल का कहना है कि भले ही एक लंबी न्याय प्रक्रिया के बाद रेप पीड़िता को न्याय मिल भी जाए तो भी इस दौरान उनके साथ जिस तरह का व्यवहार होता है वो मनोबल तोड़ने के लिए काफी होता है।
"इन सबके पीछे लिंग भेद और गलत भावना निहित होती है। महिलाओं के लिए ऐसा मान लिया जाता है कि उनका उन्हीं के शरीर पर अधिकार नहीं है क्योंकि वो पुरुषों की तुलना में उतनी महत्वपूर्ण नहीं।"