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आखिर यौन-संबंध जरूरी क्यों हैं?

Tue, 04 Feb 2020 05:51 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कुदरत का बुनियादी नियम है कि हर जीव अपनी नस्ल आगे बढ़ाता है। बहुत से जीव इसके लिए सेक्स करते हैं। यानी नर और मादा जिस्मानी ताल्लुक बनाते हैं। अब सवाल ये है कि आखिर तमाम जीव सेक्स क्यों करते हैं? यौन-संबंध आखिर इतने जरूरी क्यों हैं? बरसों से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। इंसान के विकास की थ्योरी देने वाले महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन भी सेक्स की जरूरत को लेकर दुविधा में थे। इसकी वजह कुदरत में मिलने वाले कुछ जीवों की मिसालें हैं।

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रेफलिसिया फूल - फोटो : Social media
फूल की कोशिश

दुनिया में बहुत-सी प्रजातियां तो ऐसी हैं जिनके जहन में हर वक्त यौन संबंध बनाने का भूत सवार रहता है। ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली बॉवरबर्ड के नर परिंदे मादा पार्टनर को रिझाने के लिए बड़े-बड़े घोंसले बनाते हैं। इसी तरह मादा जुगनू, नर को अपने पास बुलाने के लिए अपनी दुम को चमकाती है। फूलों में जो खुशबू होती है वो कीड़ों को रिझाने के लिए होती है। फूल की कोशिश होती है कि ये कीड़े पास आकर उनके पराग तोड़ें और दूसरे फूलों पर रख दें ताकि वहां उन्हें जरखेज होने का मौका मिले। कुदरत ने जब तक जीवों में यौन-संबंध बनाने की सलाहियत पैदा नहीं की थी तब तक इसके बिना ही नई नस्ल पनपती थी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नर-मादा संबंध

एक ही कोशिका या सेल दो हिस्सों में बंटकर दो अलग-अलग जीवों के तौर पर पनपनी थी। बैक्टीरिया तो अपनी तादाद में इसी तरह इजाफा करते हैं। बहुत से पौधे और दूसरे जीव भी इसी अमल के तहत अपनी नस्ल आगे बढ़ाते हैं। यौन संबंधों के मुकाबले ये तरीका आसान और कम पेचीदा है। यौन संबंध बनाने के लिए साथी तलाशने की भी जरूरत नहीं है। जबकि यौन-संबंधों से प्रजनन में नर-मादा दोनों के अंडे उपजाऊ होना जरूरी है। अगर किसी एक में भी कमी है तो प्रजनन हो ही नहीं सकता। जब यौन-संबंधों के बिना भी औलाद मुमकिन है तो सभी जीवों में सेक्स इतना जरूरी क्यों है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
प्रजनन की क्षमता

1886 में जर्मनी के जीव वैज्ञानित ऑगस्ट वाइजमन ने कहा था कि यौन-संबंध एक ही प्रजाति के दो अलग-अलग जीवों को प्रजनन के लिए अपनी क्षमताओं को साझा करने का मौका देता है। यौन-संबंधों से पैदा हुए वंशजों में अपने मां-बाप के बहुत से अच्छे जीन आते हैं जो बदलते माहौल से मुकाबला करने के लायक होते हैं। जबकि बिना यौन संबंधों के पैदा होने वाले जानदारों में ये मुमकिन नहीं होता। यौन-संबंधों से तादाद भी जल्द बढ़ाई जा सकती है। बहुत-सी स्टडी बताती हैं कि अगर पर्यावरण में जबरदस्त बदलाव आ जाए या कोई धूमकेतु धरती से टकरा जाए तो भी प्रजनन के अमल में बदलाव आ सकते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सेक्स के बगैर...

हो सकता है अभी तक जो जीव बिना यौन संबंधों के अपनी नस्ल आगे बढ़ा रहे हैं वो भी सेक्स करने लगें। दुनिया में जीवों का वजूद यौन-संबंधों से ही हुआ है। लेकिन मौजूदा हालात में भी हम बहुत से ऐसे जीव देखते हैं, जो सेक्स के साथ और उनके बगैर भी प्रजनन कर लेते हैं। खमीर, घोंघे, स्टारफिश और एफिड्स इसकी मिसाल हैं। लेकिन प्रजनन के लिए जो तरीका ये अपनाते हैं वो बहुत हद तक इनके आसपास के माहौल पर निर्भर करता है। दुनिया जिस वक्त वजूद में आ रही थी यहां का माहौल तेजी से बदल रहा था। जीने के लिए यहां माकूल माहौल नहीं था। ऐसे माहौल में प्रजातियों ने अपनी नस्ल आगे बढ़ाने का आसान तरीका चुना।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जीवाश्म का मिलना

बाद में जैसे-जैसे जीवों का विकास हुआ, वैसे-वैसे उनके प्रजनन का तरीका भी बदला। तो, आखिर धरती पर जीवों ने सेक्स करना कब शुरू किया? कौन से जीव थे, जिनके बीच जिस्मानी ताल्लुक बनने शुरू हुए? फिलहाल वैज्ञानिकों के पास इस सवाल का जवाब नहीं। इसके बारे में अटकलें ही लगाई जाती रही हैं कि धरती पर जीवों ने सेक्स करना कब से शुरू किया। एक रिसर्च के मुताबिक चट्टानों में पाए जाने वाले जीवाश्मों से यौन संबंधों के शुरू होने की जानकारी मिल सकती है। लेकिन जीवाश्म का मिलना तो मुश्किल है ही, साथ ही इनकी तादाद भी कम है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
साथी की तलाश

अमरीका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिस अडामी ने कहा है कि सेक्स असल में कुदरती चुनौतियों से निपटने का सबक है। सेक्स के जरिए ये सबक, पिछली पीढ़ी से अगली पीढ़ी के पास जाते हैं। कैसे चुनौतियों से बचना है और किन खूबियों की मदद से अपनी नस्ल बढ़ाई जा सकती है, ये सब सबक जीवों के डीएनए में होते हैं। ये जानकारी सेक्स के जरिए आने वाली पीढ़ी तक पहुंचती है। ये जानकारियां जीन में जमा होती है और यौन-संबंधों के जरिए ये काम और आसान हो जाता है। सेक्स के लिए ऐसे साथी की तलाश की जाती है जिसके साथ अच्छे वंशज पैदा किए जा सकते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नर की जरूरत

ये चुनाव ना सिर्फ यौन संबंध बनाने के लिए तमाम जीवों की समझ को बताता है बल्कि ये भी दिखाता है कि हरेक जीव अपनी जानकारियां दूसरी पीढ़ी को भली-भांति पहुंचाना चाहता है। इस तर्क के साथ एक और पहेली सुलझाने में मदद मिलती है। अगर मादा से ही वंशज पैदा होता है तो फिर नर की जरूरत क्यों होती है?

चार्ल्स डार्विन के मुताबिक मादा जिस नर के साथ संबंध बनाती है वो उसकी खूबियों को बाकी नरों पर तरजीह देती है। यानी जिन दो जीवों के बीच सेक्स होता है, उनमें मादा, नर को उसकी खूबियों की वजह से चुनती है। ये चुनाव आबादी में आनुवांशिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
डार्विन की किताब

इसी वजह से अच्छे गुण वाले जीन अगली पीढ़ी में जाते हैं। सेक्स क्यों जरूरी है, ये तो हमने जान लिया। लेकिन इसकी शुरुआत कहां से हुई ये अब भी पहेली ही बना हुआ है। कुछ जानकार कहते हैं इंसान का जन्म वानर से हुआ है। वानर का जन्म आदिम जीवों से हुआ था। इस बात का जिक्र डार्विन ने 1871 में अपनी किताब में भी किया था। लेकिन धरती पर वो कौन-सा जीव था जिसने सबसे पहले सेक्स किया था? वैज्ञानिकों का मानना है कि माइक्रोब्रैकियस डिकी नाम की आदिम मछली ने सबसे पहले सेक्स किया था। माइक्रोब्रैकियस का मतलब होता है छोटी बाहें। असल में इस मछली का जीवाश्म स्कॉटलैंड में मिला था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रिसर्च का रास्ता

38.5 करोड़ साल पहले की ये मछली पुरानी चट्टानों के बीच मिली थी। ये एक मादा मछली थी और इसके छोटे-छोटे हाथ थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन हाथों का इस्तेमाल ये मछली, नर मछली के साथ यौन-संबंध बनाने में करती थी। अब तक मिले जीवाश्मों में सिर्फ यही मछली हड्डी वाली जीव थी। ये इंसान की तरह भ्रूण को अपने अंदर रखती थी। हालांकि कई वैज्ञानिक इससे सहमत नहीं हैं। क्योंकि आज मछली अंडों के जरिए बच्चे पैदा करती है। लिहाजा इस बात को आसानी से नहीं माना जा सकता है। हां, इतना जरूर है कि मछली के इस जीवाश्म ने उसी तरह की प्रजातियों में प्रजनन की प्रक्रिया पर रिसर्च का रास्ता आसान कर दिया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शैवाल की किस्में

जीवाश्म रिकॉर्ड से ये भी पता चलता है सबसे पहले यौन-संबंध एक प्रकार की समंदरी घास में बने थे जिसे एल्गी या शैवाल कहा जा सकता है। इसके सबूत आर्कटिक कनाडा की चट्टानों पर मिलते हैं। ये चट्टान अब से करीब 1.2 अरब साल पहले पानी के अंदर होती थी। वैज्ञानिक बताते हैं कि इस घास से निकलने वाले सेल्स दो किस्म के होते थे। एक नर और दूसरे मादा। यानी ये पहली जीव थी जिसमें नर और मादा का फर्क आया था। आज हम जानते हैं कि शैवाल की बहुत सी किस्में मौजूद हैं। ये आज भी वैसी ही हैं जैसी अब से 1.2 अरब साल पहले थी। इन्हें हम जीवित जीवाश्म भी कह सकते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आगे की कहानी...

चट्टानों पर मिलने वाले ये जीवाश्म जिंदगी के वजूद में आने की कहानी को आग बढ़ाने में काफी मददगार हैं। इन चट्टानों का इतिहास समझने के बाद वैज्ञानिकों में ये समझ पैदा हुई कि कैसे बहुकोशिकीय जानदारों का वजूद अमल में आया। लगातार रिसर्च करने के बावजूद यौन संबंधों की शुरूआत, कब कहां और कैसे हुई आज भी पहेली ही बना हुआ है। तरह तरह के कयास लगाए जाते हैं लेकिन यकीनी तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
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