दीवार की पेंटिंग
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रंग तैयार करते हैं मन का गीत
चित्रकार निधि भाटिया बताती हैं, रंग एवं रोशनी का मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। इनकी वजह से ही मैं पेंट करती हूं। कई बार सीधे ही हाथों से कैनवास पर पेंट करती हूं, जिससे बहुत संतुष्टि मिलती है। मुझे अपने आस-पास बिखरे कई रंगों को कैनवास पर उकेरना अच्छा लगता है। एक पेंटर होने के नाते मैं बता सकती हूं कि जब मूड अच्छा होता है तो कैनवास पर रंग भी वैसे ही बिखरते हैं, जो मन को शीतलता और सुकून देते हों। रंग वो माध्यम है, जिससे हर प्रकार के भाव को अभिव्यक्त किया जा सकता है।
हम अपने कमरों को हल्के हरे, नीले या सफेद रंग में इसलिए पेंट कराते हैं, ताकि मन शांत रहे। असल में, रंगों में वह ताकत है, जिससे कविता रची जा सकती है। जब अनेक रंग आपस में मिलते हैं, तो एक गीत तैयार होता है। वे किसी मधुर राग की भांति होते हैं। इस प्रकार जब कोई पेंटिंग तैयार होती है तो उसमें जीवन होता है, जो अपनी भाषा में विचार को अभिव्यक्त कर पाती है।
खुशी और संतुष्टि के रंग
गंगाराम अस्पताल, दिल्ली की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट आरती आनंद कहती हैं, अपने भावों को अभिव्यक्त करने के लिए खास रंगों का उपयोग किया जाता है, यानी रंगों के जरिये हम अपनी भावनाएं प्रकट कर सकते हैं। किसी भी चीज में रंग भरते या आकृति बनाते समय हम जजमेंटल नहीं होते, किसी से कोई अपेक्षा नहीं रखते, कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होती, सिर्फ अपनी खुशी एवं संतुष्टि के लिए रंग भरते हैं। इससे मन और मस्तिष्क रिलैक्स होता है।
अमूमन कलरिंग को शौक के तौर पर देखा जाता है और शौक वह होता है, जिसमें हम खो जाते हैं। यह नहीं सोचते कि जीत हो रही है या हार, सिर्फ वर्तमान क्षण का आनंद लेते हैं। इससे तनाव दूर होता है। इसके अलावा कलर करते समय दिमाग के जिस हिस्से का उपयोग होता है, उससे फोकस और एकाग्रता, दोनों बढ़ती हैं। आप व्यर्थ बातों से खुद को डिस्कनेक्ट कर पाती हैं।