कोरोनाकाल में जन्म लेने वाले बच्चों का लालन पालन
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सामाजिकता से दूर
भारत में बच्चे के जन्म पर कई तरह के संस्कार कार्यक्रमों का आयोजन होता है। हिंदू बच्चों के जन्म के 6 दिन बाद छठी, बरही, अन्नप्राशन, मुंडन संस्कार आदि का आयोजन होता है। इस तरह के पारिवारिक आयोजनों में बहुत सारे रिश्तेदार, करीबी, आस पड़ोस वाले और दोस्त शामिल होते हैं। बच्चा इस तरह का सामाजिक माहौल जन्म से ही देखता है और समझदार होने पर इसे जीवन का हिस्सा मानता है। लेकिन कोविड दौर में जन्म लेने वाले बच्चों ने सामाजिक दूरी देखी। बच्चे के जन्म पर होने वाले कार्यक्रम में परिवार के ही 10-15 लोगों की मौजूदगी यानी कम भीड़ भाड़ देखी। ऐसे में बच्चे सामाजिकता से कुछ दूर हुए। चूंकि बच्चे दूसरों के स्पर्श के अहसास को समझते हैं लेकिन उन्हें ये अहसास महसूस ही नहीं हो सका, इसलिए वह अपने रिश्तेदारों और करीबियों से अनजान रहे।