तारीफ करें, संकोच नहीं
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तारीफ करें, संकोच नहीं
सराहना हर रिश्ते की संजीवनी है। अगर जेठानी, देवरानी के किसी कार्य की सराहना करे, जैसे- “तुम ऑफिस के साथ घर भी कितनी अच्छी तरह संभाल लेती हो”, तो देवरानी का मनोबल बढ़ेगा। वहीं, देवरानी कहे- “दीदी, आप कितने सलीके से घर संभालती हैं”, तो जेठानी को सम्मान का अनुभव होगा।
सब आप पर निर्भर
रिलेशनशिप काउंसलर शोभना बताती हैं, गृहस्थी संभालना और नौकरी करना, दोनों ही कार्य अपने आपमें बहुत महत्वपूर्ण हैं। दोनों कार्यों में ही नई-नई चुनौतियां आती रहती हैं। यह सोचना कि मेरा काम ज्यादा मुश्किल है, मानसिक अपरिपक्वता की निशानी है। अपने ‘मैं’ को दूसरे के ‘मैं’ से टकराने पर मानसिक अशांति ही पैदा होती है। लेकिन अगर दोनों मिलकर ‘हम’ बन जाएं तो पूरे परिवार में एक लयबद्धता निर्मित हो जाती है। जो रिश्ते में बड़ी है, वह छोटी का ख्याल रखे और जो छोटी है, वह बड़ी का सम्मान करे। एक-दूसरे की कमियां खोजने के स्थान पर उसके अच्छे गुणों पर ध्यान देने से जेठानी और देवरानी के बीच आत्मीयता बनी रह सकती है। आप विवाद में जीना चाहती हैं या संवाद में, इसका निर्णय आपके अतिरिक्त कोई और नहीं कर सकता।