wedding night
जब अगली सुबह मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने कहा कि वो ठीक नहीं थे। लेकिन आगे भी कुछ नहीं बदला। हमारी दूसरी, तीसरी और कई रातें ऐसे ही बीतीं। मैंने जब अपनी सास को यह बताया तो उन्होंने भी मेरे पति का बचाव किया। उन्होंने कहा, "वह शर्मीला है, उसे बचपन से ही लड़कियों से बात करने में झिझक रही है, उसने लड़कों के स्कूल में पढ़ाई की है। उसकी ना तो कोई बहन है और ना ही को महिला मित्र।"
हालांकि इस बात से मुझे अस्थायी राहत तो मिली लेकिन मैं इस विषय में सोचना बंद नहीं कर सकी। मेरी सारी उम्मीदें, सपने और इच्छाएं दिन ब दिन टूट रही थीं। मेरी बेचैनी का एकमात्र कारण सेक्स नहीं था। वो शायद ही मुझसे बात करते थे। मुझे लगता कि हमेशा मेरी उपेक्षा हो रही है। वो मुझसे दूर भागते, छुना पकड़ना तो दूर की बात थी।