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Micro Wedding: भारत में बढ़ा माइक्रो वेडिंग का चलन, जानिए इस तरह की शादी के फायदे और नुकसान

Mon, 17 Mar 2025 02:11 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

आइए जानते हैं माइक्रो वेडिंग क्या है और युवाओं के बीच इस  तरह की शादी का चलन क्यों बढ़ रहा है। साथ ही माइक्रो वेडिंग के फायदे और नुकसान क्या हो सकते हैं।
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माइक्रो वेडिंग क्या है - फोटो : Instsgram/weddingwire
What Is Micro Wedding: शादी की योजना बनाना एक बहुत बड़ा कार्य है जो आपको शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से थका देता है। शादी समारोह में सैकड़ों मेहमानों का शामिल होना एक दूल्हा-दुल्हन के साथ ही आयोजकों के लिए भी भारी पड़ सकता है। ऐसे में अब माइक्रो वेडिंग चलन में है, जो उपरोक्त दिक्कतों से बचा सकती है।

माइक्रो वेडिंग एक प्रैक्टिकल विकल्प बनती जा रही है, जो मध्यम और युवा पीढ़ी को काफी  पसंद आ रही है। इस तरह की किफायती, निजी और कम तनावपूर्ण होती है,  हालांकि भारतीय  पारंपरिक शादी की भव्यता इसमें कुछ कम देखने को मिलती है। अगर आप एक सीमित बजट में, करीबी लोगों के साथ, यादगार शादी करना चाहते हैं, तो माइक्रो वेडिंग आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आइए जानते हैं माइक्रो वेडिंग क्या है और युवाओं के बीच इस  तरह की शादी का चलन क्यों बढ़ रहा है। साथ ही माइक्रो वेडिंग के फायदे और नुकसान क्या हो सकते हैं।


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कोविड 19 के दौरान बढ़ा माइक्रो वेडिंग का चलन - फोटो : Instsgram/weddingwire
माइक्रो वेडिंग क्या है

माइक्रो वेडिंग एक छोटी और इंटीमेट शादी होती है जिसमें आमतौर पर 20 से 50 मेहमानों को ही आमंत्रित किया जाता है। इसमें भी पारंपरिक शादी की सभी रस्में होती हैं, लेकिन यह बड़े और भव्य विवाह समारोहों से अधिक निजी और कम खर्चीली होती है।  

भारत में माइक्रो वेडिंग का चलन

भारत में पारंपरिक रूप से भव्य और बड़ी शादियों का रिवाज रहा है, जहां सैकड़ों से हजारों मेहमान आमंत्रित किए जाते हैं। लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के नियमों के कारण लोग छोटे समारोहों की ओर बढ़े।  
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माइक्रो वेडिंग के फायदे - फोटो : Adobe
माइक्रो वेडिंग के फायदे

माइक्रो वेडिंग के कुछ फायदे और नुकसान भी हैं। भले ही यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है जो अपनी शादी और रिसेप्शन को अधिक व्यक्तिगत समारोह बनाना चाहते हैं, लेकिन हो सकता है कि आप पारंपरिक शादी की चहल-पहल और उत्सव जैसे माहौल से वंचित रह जाएं। आइए जानते हैं माइक्रो वेडिंग के फायदे और नुकसान।

बजट फ्रेंडली

पारंपरिक शादी की तुलना में एक माइक्रो वेडिंग कम महंगी हो सकती है क्योंकि इसमें मेहमान कुछ ही होते हैं। इस तरह की शादी में वेन्यू से लेकर खाने -पीने और निमंत्रण कार्ड समेत हर जगह पर पैसों की बचत की जा सकती है।

मेहमानों के साथ वक्त

बड़ी शादी समारोह में हर मेहमान के साथ वक्त बिताना संभव नहीं हो पाता है। इसके विपरीत माइक्रो वेडिंग में सीमित व कम मेहमान शामिल होते हैं, ऐसे में नवविवाहित जोड़ा और आयोजनकर्ता सभी से बातचीत कर सकते हैं। साथ ही इस तरह की शादी में मजेदार यादें और मजबूत रिश्ता बनाने का मौका मिल सकता है।

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माइक्रो वेडिंग कम खर्चीली और कम तनावपूर्ण - फोटो : Adobe Stock
गैर जरूरी सलाह से बचना

माइक्रो वेडिंग में शादी के कार्यक्रम की योजना और उसके क्रियान्वयन के बारे में लोगों की अवांछित राय पर ध्यान देने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तरह की शादी के आयोजन में उन्हें कार्यक्रम में अपना व्यक्तिगत स्पर्श शामिल करने की आजादी मिलती है।

कम तनावपूर्ण

बड़े समारोहों की तुलना में छोटी शादी की व्यवस्था करना आसान होता है। उन पर समारोह को ग्रैंड बनाने का दबाव नहीं होता और खर्च भी कम होता है। इसलिए शादी की तैयारी करना और सभी मेहमानों पर ध्यान देना कम तनावपूर्ण होता है।  

वेन्यू के ज्यादा विकल्प

कम मेहमानों के बीच कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए जगह के विकल्प भी बढ़ जाते हैं। रिसाॅर्ट, कैफे, पार्क, मंदिर, रेस्तरां आदि किसी  भी स्थान पर शादी का कार्यक्रम आसानी से किया जा सकता है। पारंपरिक शादियों में सैकड़ों मेहमानों को देखते हुए उतनी क्षमता के अनुसार लाॅन आदि बुक करने पड़ते हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए माइक्रो वेडिंग सबसे बढ़िया विकल्प है।
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माइक्रो वेडिंग के नुकसान - फोटो : Instsgram/weddingwire
माइक्रो वेडिंग के नुकसान
 
रिश्तेदारों की नाराजगी

माइक्रो वेडिंग एक छोटा व्यक्तिगत समारोह होता है, इसलिए कपल के लिए यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि शादी में किसे आमंत्रित करें और किसे नहीं। उन्हें कुछ ऐसे लोगों को लिस्ट से हटाना होता है जो जरूरी हो सकते हैं। ऐसे में कई दोस्त व रिश्तेदार इससे नाराज भी हो जाते हैं।

भव्यता की कमी

शादी को लेकर अक्सर लड़का-लड़की या उसके माता-पिता काफी सपने देखते हैं। अगर किसी ने भव्य शादी का सपना देखा है, तो यह विकल्प थोड़ा फीका लग सकता है। जब जोड़े माइक्रो वेडिंग का विकल्प चुनते हैं, तो वे अपने इस खास दिन पर पारंपरिक धूमधाम से चूक सकते हैं और उन्हें बड़े आयोजन का अवसर नहीं मिल सकता है।

सामाजिक दबाव

भारत में शादी को एक सामूहिक उत्सव माना जाता है, इसलिए माइक्रो वेडिंग करने पर लोगों की राय और समाज का दबाव झेलना पड़ सकता है।  चूंकि ये भारत में एक नया काॅन्सेप्ट है इसलिए इसे पारंपरिक शादी के खिलाफ माना जाता है, और इस तरह की शादी के लिए घर के बड़े बुजुर्गों को मनाने में मुश्किल आ सकती है।
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