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Ablutophobia: नहाने से डरता है आपका बच्चा तो हो सकती हैं ये मानसिक बीमारी, जानिए क्या हैं लक्षण

Mon, 20 Jan 2025 11:16 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्दी के मौसम में बच्चे पानी को देखते ही भागने लगते हैं। ऐसे में उन्हें नहलाना आसान काम नहीं है। लेकिन अगर वे हर मौसम में ऐसा करते हैं तो यह ‘एब्लूटोफोबिया’ हो सकता है।
 
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बच्चे को नहाने से डर लगे तो इसे एब्लूटोफोबिया कहा जाता है - फोटो : Amar Ujala
दीपिका शर्मा 

Ablutophobia :
सर्दियों में बच्चे अक्सर न नहाने की जिद करते हैं, क्योंकि उन्हें ठंडे पानी से डर लगता है। सर्द हवाओं के कारण बच्चों का ऐसा करना स्वभाविक है, लेकिन अगर वे हमेशा ही नहाने से डरते हैं तो यह आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, रोजाना नहाने से डरना एक प्रकार की मानसिक समस्या है। चिकित्सकीय भाषा में इसे ‘एब्लूटोफोबिया’ कहा जाता है।

एब्लूटोफोबिया को समझें

यदि कोई व्यक्ति किसी चीज से अत्यधिक डरता है तो उस डर को फोबिया कहा जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ट्रस्ट सोर्स के अनुसार, एब्लूटोफोबिया पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाया जाता है। बच्चे का एब्लूटोफोबिया से पीड़ित होने का सबसे नकारात्मक पहलू यह है कि वह स्वच्छता की आदतों से बचने की कोशिश करने लगता है, जिससे उसकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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क्या हैं एब्लूटोफोबिया के लक्षण - फोटो : Freepik
लक्षणों की पहचान

इस स्थिति में पीड़ित बच्चा शारीरिक स्वच्छता पर अधिक ध्यान नहीं देता है और अक्सर गंदा रहता है। साथ ही जब उसे जबरदस्ती नहलाने की कोशिश की जाती है तो वह डर के कारण सांस लेने में परेशानी, कंपकंपी, चक्कर आना, मुंह सूखना और पानी को देखकर घबराहट जैसी दिक्कतों के कारण जोर-जोर से रोने लगता है।
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बच्चे को नहाने से क्यों डर लगता है - फोटो : Adobe stock
क्या है वजह

चिकित्सकों के अनुसार, एब्लूटोफोबिया के कारणों पर अभी शोध किए जा रहे हैं। अभी तक जो केस सामने आए हैं, वे मुख्य रूप से किसी भयावह या दर्दनाक अनुभव के बाद विकसित हुए हैं। उदाहरण के लिए, किसी को पानी में डूबते देखना या पानी की वजह से उठाई गई कोई शर्मिंदगी प्रमुख रूप से एब्लूटोफोबिया की वजह बनी है। इसके अलावा आनुवंशिकता भी इसके प्रमुख कारणों में से एक पाई गई है।

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नहाता हुआ बच्चा - फोटो : Freepik
डर का खात्मा

वैसे तो इस बीमारी का दवाओं के जरिए कोई इलाज संभव नहीं है, लेकिन एक्सपोजर थेरेपी और रिलैक्सेशन टेक्निक की मदद से कुछ हद तक इस परेशानी से निजात पाई जा सकती है। साथ ही आप बच्चे को सफाई की प्रक्रिया से धीरे-धीरे परिचित कराएं, जैसे- पहले हाथ धोने से शुरुआत करें, फिर धीरे-धीरे स्नान की आदत डलवाएं। इस दौरान आप उसे छोटे-छोटे इनाम दें, जिससे उसे सकारात्मक प्रेरणा मिले। आप उसके लिए सफाई को एक सकारात्मक और मजेदार गतिविधि बनाएं, जैसे- नहाने के दौरान गीत गाना। अगर बच्चा फिर भी ठीक नहीं हो पा रहा है तो उसके डर को समझें और उसे  सहारा दें। याद रखें कि बच्चों के डर को दूर करने में समय लगता है, इसलिए धैर्य रखें।
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नहाता हुआ बच्चा - फोटो : Freepik
पानी को खेल की तरह जोड़ें

गंगाराम अस्पताल, दिल्ली के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आरती आनंद बताती हैं, कहा जाता है, तन स्वस्थ तो मन स्वस्थ। इसके लिए रोजाना नहाना जरूरी है। बच्चों या बड़ों का भी नहाने में आलस दिखाना सामान्य बात है, लेकिन पानी से डरना ‘एब्लूटोफोबिया’ हो सकता है। इस फोबिया से पीड़ित बच्चा पानी से दूर रहने की कोशिश में रहता है, जिस कारण रोजमर्रा के कामों में पानी के उपयोग से बचता है। इससे कई बार उसके शरीर से दुर्गंध आने लगती है और लोग उससे दूरी बना लेते हैं। इसका असर उसकी मानसिक सेहत पर पड़ता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए जहां तक संभव हो, पानी को उससे खेल की तरह जोड़ने का प्रयास करें और डॉक्टर से परामर्श लें।
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