प्रतीकात्मक तस्वीर
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'अकेले रहने में डर नहीं लगता'
संध्या को अगर उन्हें मनचाहा पार्टनर मिला तो वो उसके साथ भी रहना चाहेंगी लेकिन इस रिश्ते के भी अपने दायरे होंगे। वो कहती हैं, "परिवार शब्द से मेरे जहन में जो तस्वीर उभरती है उसमें मैं और मेरे पार्टनर साथ तो होते हैं लेकिन हमारे पास अपना स्पेस भी होता है। मैं सोचती हूं कि हम एक घर में रहें लेकिन हमारे कमरे अलग-अलग हों। हमारा किचन एक हो जिसमें हम साथ मिलकर खाना बनाएं। हम भले अलग कमरों में रहें लेकिन जब हमें भावनात्मक तौर पर एक-दूसरे की जरूरत पड़े, हम साथ हों।"
मां बनने और बच्चों के बारे में पूछे जाने संध्या साफ कहती हैं, "बच्चे मुझे दूसरों के ही अच्छे लगते हैं। अपना मैं अपना बच्चा नहीं चाहती और मुझे नहीं लगता कि बच्चे की चाहत न रखना किसी औरत को कमतर बनाता है।" वो कहती हैं, "लोग मुझसे अक्सर पूछते हैं कि अकेले रहोगी, बच्चे नहीं होंगे तो बुढ़ापे में तुम्हारी देखभाल कौन करेगा? मेरा सीधा सा सवाल है: क्या सभी बुजुर्ग लोगों के बच्चे उनकी देखभाल कर रहे हैं? मैं अपने बुढ़ापे के लिए सेविंग कर रही हूं, इन्वेस्ट कर रही हूं। मुझे पता है कि मैं अकेली हूं और मुझे अपना खयाल खुद ही रखना है इसलिए मैं अपनी सेहत और फिटनेस का पूरा ध्यान रखती हूं। मैं अच्छा खाना खाती हूं, योगा करती हूं और कोई भी फैसला अच्छी तरह सोच-समझ के ही लेती हूं।" संध्या के परिवार और रिश्तेदारों की ओर से शादी का दबाव भी लगातार बनाया जाता है लेकिन उन्होंने साफगोई से सबको मना कर दिया।