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Sawan 2025: शिव जी के ये पांच गुण बना देंगे शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल

Thu, 10 Jul 2025 04:43 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan 2025: इस वर्ष सावन की शुरुआत 11 जुलाई 2025 से हो रही है। इस मौके पर शिव जी के गुणों और शिक्षाओं को अपनाकर अपने घर को एक मंदिर बनाने की प्रयास करें।
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शिव परिवार - फोटो : Instagram
Sawan 2025 : सावन का महीना भगवान शिव की उपासना का पावन समय होता है। जहां एक ओर शिव को योगी कहा गया है, वहीं वे गृहस्थ जीवन में भी एक आदर्श माने जाते हैं। भगवान शिव के जीवन से हम कई ऐसे गुण सीख सकते हैं, जिन्हें अपनाकर दांपत्य और पारिवारिक जीवन को न सिर्फ खुशहाल बनाया जा सकता है, बल्कि जीवन की हर चुनौती को भी सहजता से पार किया जा सकता है। अगर हम उनके गुणों को अपने दांपत्य और पारिवारिक जीवन में अपनाएंगे तो न केवल संघर्ष आसान होंगे, बल्कि सच्चे सुख और संतोष की अनुभूति भी होगी। इस वर्ष सावन की शुरुआत 11 जुलाई 2025 से हो रही है। इस मौके पर शिव जी के गुणों और शिक्षाओं को अपनाकर अपने घर को एक मंदिर बनाने की प्रयास करें।
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शिव पार्वती की प्रतिमा - फोटो : Instagram
हर परिस्थिति में शांत रहना

भगवान भोलेनाथ का एक गुण उनमें समता और सहनशीलता का भाव था। शिव जी समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर भी शांत रहे। गृहस्थ जीवन में भी समस्याएं और तनाव आते हैं, लेकिन शांत रहकर, संयम से काम लेने वाला ही सुखी रहता है।
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भगवान शिव और पार्वती - फोटो : Instagram
समानता का व्यवहार

भोले बाला सबके प्रति समभाव की भावना रखते हैं। भगवान शिव ने कभी भेदभाव नहीं किया, चाहे भूत-प्रेत हों या देवता। गृहस्थ जीवन में भी जीवनसाथी, बच्चों, और परिवार के प्रति समान प्रेम और सम्मान का व्यवहार रिश्तों को मजबूत करता है।

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शिव जी - फोटो : instagram
सरलता और सादगी 

भगवान शिवशंकर दिखावे से दूर रहते हैं। शिव जी भस्म रमाए, सर्प धारण किए हुए, सबसे सरल और प्राकृतिक रूप में रहते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर थोड़ी सादगी आ जाए, तो तनाव कम होगा और जीवन अधिक संतुलित रहेगा।
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भगवान शिव और माता पार्वती - फोटो : Instagram
अर्द्धनारीश्वर रूप

शिव और पार्वती का अर्द्धनारीश्वर रूप इस बात का प्रतीक है कि गृहस्थ जीवन में स्त्री-पुरुष दोनों की समान भागीदारी जरूरी है। वैवाहिक जीवन में पति और पत्नी का समान महत्व होना चाहिए। जब दोनों मिलकर जिम्मेदारियां उठाते हैं, तभी सुख-शांति आती है।
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शिव गौरी - फोटो : freepik
क्षमा और त्याग

रिश्तों को बचाए रखने का मूलमंत्र है क्षमा और त्याग की भावना का होना। शिव जी ने कई बार अपमान सहकर भी क्षमा दी और अपनों के लिए सब कुछ त्याग दिया। दांपत्य जीवन में अहंकार नहीं, बल्कि माफी और समझदारी से रिश्ता मजबूत होता है।
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