फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Relationship Tips: सास-बहू के रिश्ते को बनाना है मजबूत तो अपनाएं ये पांच बातें, नहीं होगी कभी खटपट

Wed, 04 Jan 2023 10:37 AM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
खूबसूरत बन सकता है सास बहु का रिश्ता - फोटो : istock
किसी भी महिला के जीवन में विवाह के जरिये पति के साथ जुड़ने वाले नए परिवार में कई अन्य रिश्ते भी साथ जुड़ते हैं। ननद, देवर, जेठ, जिठानी, देवरानी आदि। लेकिन सास और बहु का रिश्ता इन सबमें महत्वपूर्ण भी होता है और सबसे जटिल भी। इसे लेकर सास-बहु दोनों के मन में कई पूर्वाग्रह भी हो सकते हैं और असमंजस भी। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि शुरुआत से ही इस रिश्ते को सहज भाव से और समझदारी से जोड़ा जाए, ताकि परिवार की खुशियां रहें बरकरार और सास-बहु के बीच का बॉन्ड रहे सदाबहार। 
 
इसलिए है जरूरी 
सास और बहु महिलाओं के रूप में परिवार की वह कड़ी होती हैं जो पूरे परिवार को सहेजने और एक बनाकर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन दो महिलाओं के रूप में दो पीढ़ियों का कल्चर साथ चल रहा होता है और अक्सर पीढ़ी का यह अंतर ही मुश्किल की वजह भी बनता है। जबकि यदि सास-बहु के बीच का बॉन्ड मजबूत हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार टूटता नहीं। 
विज्ञापन

2 of 6
सहभागी बनें प्रतिद्वंदी नहीं - फोटो : Istock
ऐसे बनायें बॉन्ड को मजबूत 

1. स्पेस दें


अगर घर में बहु नए सदस्य के रूप में आई है तो सास पहले से वहां हैं। यानी दोनों का अपना एक कम्फर्ट ज़ोन है, दोनों का अपना एक रूटीन है और अमूमन दिक्कत इसी से शुरू होती है कि दोनों ही इससे समझौता करने से कतराती हैं। इसका हल यह है कि दोनों शुरुआत से ही एक-दूसरे को स्पेस दें, बजाय दूसरे को अपने स्पेस में जबरन लाने के या उनके स्पेस में अतिक्रमण करने के। यहां स्पेस से मतलब है समझने और घुलने मिलने के लिए वक्त देना। उदाहरण के लिए यदि बहु कम बोलती है तो बेवजह उसे लोगों से मिलने और बात करने के लिए दबाव न बनायें। इसी तरह यदि सास ने घर में अपने लिए कोई रूटीन बना रखा है तो बेवजह उसे डिस्टर्ब करने की कोशिश न करें। 
विज्ञापन

3 of 6
साझा करें खुशियां और दुःख भी - फोटो : istock
2. छीनने नहीं, साझा करने की भावना

ये वह पूर्वाग्रह है जिससे सास सबसे ज्यादा ग्रसित होती है। उन्हें लगता है कि बहु आएगी और उनके इतने सालों से बसे साम्राज्य पर कब्जा कर लेगी। वहीं बहु को यह पूर्वाग्रह रहता है कि ससुराल में अपना अधिकार और जगह दोनों छीनने पर ही मिलेगी और सास इस मामले में हमेशा उसकी दुश्मन बनकर ही सामने आएँगी। यह पूर्वाग्रह ही कड़वाहट और दरारों की शुरुआत करता है। यह बात हमेशा याद रखें कि सास और बहु दोनों एक ही परिवार का हिस्सा हैं और परिवार में अधिकार और स्थान सहजता से बांटे जाते हैं, छीने नहीं जाते। सास कोशिश करे कि बहु को उसके दायित्व धीरे धीरे सौंप दे। हां मार्गदर्शन के लिए हमेशा मौजूद रहें और बहु को चाहिए कि सास के पूर्व के दायित्व और जिम्मेदारियां एकदम से अपने हाथ में लेने की जल्दी न करे। बहुत सरलता और विनम्रता से उन्हें मान देते हुए जिम्मेदारियां शेयर करें। 

4 of 6
विवाह के साथ जुड़ते परिवार - फोटो : istock
3. अपनी अपनी पसंद

बहु को कहाँ क्या पहनना चाहिए, क्या खाना चाहिए, कितने लम्बे बाल रखना चाहिए, वह फलां सीरियल क्यों देखती है, उसके कमरे के पर्दे कितने भड़कीले हैं और उसने बेटे को फ्लोरल प्रिंट की कमीज क्यों दी जैसी तमाम बातें बेमानी हैं। इसी तरह सास फलां जगह से सामान क्यों खरीदती हैं, सोफे के कुशन कितने खराब रंग के लाईं, नॉनस्टिक पैन यूज क्यों नहीं करतीं आदि जैसी चीजें भी मायने नहीं रखतीं। हर एक व्यक्ति की पसंद और काम करने का तरीका अलग और उसकी अपनी सुविधा के अनुरूप होता है। एक ही परिवार में किन्ही दो लोगों की पसंद तक एक जैसी नहीं होती। इसलिए इन बातों को मुद्दा न बनायें। हाँ अगर कोई आपसे राय मांगे तो उसे विनम्रता से अपनी पसंद जरूर बता दें, बजाय किसी पर भी अपनी पसंद थोपने के। 
विज्ञापन

5 of 6
एक दूसरे की सोच को सम्मान दें
4. सलाह का सम्मान

खाने में क्या पकेगा से लेकर घूमने के लिए कहाँ जाएंगे और घर का इंटीरियर कैसा होगा से लेकर मकान के लिए कहाँ इन्वेस्ट करना ठीक होगा तक जैसे तमाम मुद्दों में घर के हर सदस्य की राय महत्वपूर्ण होती है। कई बार कोई व्यक्ति किसी चीज को भूल भी रहा हो तो दूसरा उसे याद दिला सकता है। घर में आई नई सदस्य यानी बहु की राय को भी इसमें शामिल जरूर करें। इससे उसे यह महसूस होगा कि आपने उसके विचारों को महत्व दिया। इसी तरह किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर सास की सलाह को भी महत्व दें। अनुभव अक्सर मुश्किल स्थितियों से मुकाबला करने में काम आते हैं, इस बात को भूलें नहीं। खास बात यह कि यदि आपके पास (सास-बहु किसी के भी पास) किसी मुद्दे पर कोई ठोस तर्क है तो उसे भी शांति से समझाएं। यदि आपका तर्क सही है तो मतभेद की स्थिति ही नहीं बनेगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
मतभेद को मनभेद न बनाएं
5. बहस को टालें

ये मन्त्र अगर आपने सीख लिया तो समझ लीजिये जिंदगी भर के लिए सुकून पा लिया। यहाँ बहस को टालने का मतलब स्थिति को नजरअंदाज करने या मुद्दे से पीछे हट जाने से नहीं है। जिस भी समय किसी मुद्दे पर आप दोनों (सास-बहु) के विचार मिल नहीं रहे हों, उस समय गुस्सा होने, चिड़चिड़ाने या झगड़ने की बजाय यह कहकर पीछे हट जाएँ कि अभी मुझे इस विषय पर और सोचने का समय चाहिए, हम इसके बारे में शांति से बैठकर बात करते हैं।  आपका धैर्य से कोई बात कहना सामने वाले को भी शांति से विचार करने को प्रेरित करेगा और बिना झगड़े या कड़वाहट के बात सम्भल जायेगी। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें