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Dussehra 2025: राम और सीता से सीखें रिश्ते निभाने के 5 सुनहरे नियम

Sat, 27 Sep 2025 10:15 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Relationship lessons from Sri Ram Sita : आधुनिक दौर में जहां रिश्ते अक्सर आपसी मतभेदों और स्वार्थ के कारण कमजोर पड़ जाते हैं, वहीं राम और सीता का वैवाहिक जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम और विश्वास के साथ हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।
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ram sita - फोटो : adobe stock
Dussehra Ram Sita Relationship Tips:भारतीय संस्कृति में भगवान राम और माता सीता का विवाह केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि आदर्श वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। राम-सीता के संबंध में त्याग, विश्वास, मर्यादा और समर्पण जैसे गुण हैं, जो आज भी रिश्तों को मजबूत बनाने का आधार बन सकते हैं। आधुनिक दौर में जहां रिश्ते अक्सर आपसी मतभेदों और स्वार्थ के कारण कमजोर पड़ जाते हैं, वहीं राम और सीता का वैवाहिक जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम और विश्वास के साथ हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।

वनवास कर रहे राम ने माता सीता के लिए लंका नरेश से युद्ध लड़ डाला था। उसी की याद है दशहरा , जो इस वर्ष 2 अक्तूबर 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन प्रभु श्रीराम ने लंका नरेश रावण का वध कर अपनी पत्नी सीता को आजाद कराया था। आइए जानते हैं कि राम और सीता के संबंधों से आप क्या सीख लेकर अपने रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं।
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राम सीता - फोटो : Instagram
रिश्तों के लिए राम-सीता के विवाह से सीख

विश्वास है हर रिश्ते की नींव

राम और सीता के बीच गहरा विश्वास था। सीता जी ने वनवास में राम के साथ जाने का निर्णय लिया, वहीं राम ने हर परिस्थिति में पत्नी की मर्यादा और सुरक्षा का ध्यान रखा।
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राम सीता का रिश्ता - फोटो : Instagram
कठिनाइयों में भी साथ निभाना

सीता और राम का जीवन संघर्षों से भरा था। उन्होंने वनवास, युद्ध और अग्निपरीक्षा, सबकुछ अपने जीवन में देखा किया लेकिन दोनों ने मिलकर हर कठिनाई को पार किया। यह संदेश देता है कि मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ सबसे बड़ा संबल होता है।

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Shri Ram Naamkaran story - फोटो : istock
रिश्ते में मर्यादा का महत्व

राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उन्होंने परिवार, समाज और धर्म की मर्यादा का पालन किया। रिश्ते तभी सफल होते हैं जब उनमें अनुशासन और मर्यादा का पालन हो।
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सीता राम - फोटो : Adobe
त्याग और समर्पण की भावना

सीता ने अपने सुखों का त्याग करके राम के साथ वनवास स्वीकार किया। यह त्याग आज भी हमें सिखाता है कि रिश्ते स्वार्थ से नहीं, बल्कि निस्वार्थ भाव से निभाए जाते हैं।
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श्रीराम और माता सीता - फोटो : Adobe
एक-दूसरे के सम्मान को प्राथमिकता देना

राम और सीता ने एक-दूसरे की इच्छाओं और भावनाओं का सम्मान किया। रिश्तों को लंबा चलाने के लिए आपसी सम्मान सबसे जरूरी है। माता सीता ने राजा राम के सम्मान के लिए राजमहल त्याग दिया, तो वहीं राम ने माता सीता के सम्मान के लिए राजा होते हुए भी एक वनवासी का जीवन बिताया।
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