मजबूरी या शौक
हम दोनों ने शराब पी। उसने हिंदी गाने लगाकर डांस करना शुरू किया। हम दोनों डाइनिंग रूम से बेडरूम गए।अब तक उसने मुझसे प्यार से बात की थी। काम जैसे ही खत्म हुआ , पैसे देकर बोली, "चल कट ले, निकल यहां से।''उसने मुझे टिप भी दी। मैंने उससे कहा, "मैं ये सब पैसों की मजबूरी की वजह से कर रहा हूं।"उसने कहा, ''तेरी मजबूरी को तेरा शौक बना दूंगी।''मेरी मजबूरी जो कोलकाता से सैकड़ों किलोमीटर दूर मेरे घर से शुरू हुई थीं।मेरी लोअर मिडिल क्लास फैमिली को मैं अनलकी लगता था क्योंकि मेरे जन्म के बाद ही पिता की नौकरी चली गई। वक्त के साथ ये दूरियां बढ़ती गईं। मेरा सपना एमबीए करने का था लेकिन इंजीनियरिंग करने को मजबूर किया गया और नौकरी लगी कोलकाता में।ऑफिस में सब बांग्ला ही बोलते। भाषा और ऑफिस पॉलिटिक्स की वजह से मैं परेशान रहने लगा। शिकायत भी की। लेकिन कुछ नहीं हुआ। बाथरूम जाकर रोता तो कार्ड के इन और आउट टाइम को नोट करके कहा जाता, 'ये सीट पर नहीं रहता।'
मेरा आत्मविश्वास ख़त्म होने लगा था। धीरे-धीरे डिप्रेशन ने मुझे घेर लिया। डॉक्टर के पास भी गया लेकिन परेशानियां ख़त्म नहीं हुईं।ज़िम्मेदारियों और परेशानियों का गठ्ठर कंधों पर इतना भारी लगने लगा कि मैंने इंटरनेट पर सर्च करना शुरू किया। मुझे पैसे कमाने थे ताकि मैं एमबीए कर सकूं, घर पैसे भेज सकूं और कोलकाता की ये नौकरी छोड़कर भाग जाऊं। इस बीच मुझे इंटरनेट पर मेल एस्कॉर्ट यानी जिगोलो बनने का रास्ता दिखा। ऐसा फ़िल्मों में देखा था। कुछ वेबसाइट्स होती हैं जहां जिगोलो बनने के लिए प्रोफाइल बनाई जा सकती हैं। लेकिन ये कोई जॉब प्रोफाइल नहीं था।
यहां जिस्म की बोली लगनी थी
प्रोफाइल लिखने में डर लग रहा था। पर मैं उस दहलीज़ पर खड़ा था, जहां से मेरे पास सिर्फ़ दो रास्ते बचे थे।
- एक- दहलीज़ से पीछे हटकर सुसाइड कर लूं।
- दूसरा- दहलीज़ के पार जाकर जिगोलो बन जाऊं।
मैंने दहलीज़ को लांघने का फ़ैसला कर लिया था। मैं जिन औरतों से मिला, उनमें शादीशुदा तलाकशुदा, विधवा और सिंगल लड़कियां भी शामिल थीं। इनमें से ज़्यादातर के लिए मैं एक इंसान नहीं माल था। जब तक उनकी इच्छाएं पूरी न हो जाती। सब अच्छे से बात करतीं। कहती कि मैं अपने पति को तलाक देकर तुम्हारे साथ रहूंगी। लेकिन बेडरूम में बिताए कुछ वक्त के बाद सारा प्यार ख़त्म हो जाता।