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Parenting Tips: अब बच्चे खुद बनाएंगे स्वादिष्ट खाना, वो भी बिना आग के! जानिए 'नो फायर कुकिंग' का कमाल

Mon, 30 Jun 2025 05:30 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

No Fire Cooking Ideas For Kids Safety: छोटे बच्चे भोजन के लिए पूरी तरह से अपने माता-पिता पर निर्भर होते हैं। ऐसे में अगर आप कहीं व्यस्त हो जाएं तो आपको उनकी सबसे ज्यादा चिंता होती है, जिसे ‘नो फायर कुकिंग’ दूर कर सकता है।

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खाना बनाते बच्चे - फोटो : Adobe

मोनिका अग्रवाल

व्यस्त मां के लिए बच्चों के खाने को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक है। वे क्या खाएंगे, कौन बनाएगा, सही पोषण कैसे मिलेगा और कहीं वे बीमार न पड़ जाएं आदि? ऑफिस या किसी काम में व्यस्त होने पर मन में यह सवाल घूमते ही रहते हैं। लेकिन कल्पना कीजिए, अगर आपके बच्चे अपने छोटे-छोटे हाथों से खुद ही स्वादिष्ट और सुरक्षित तरीके से भोजन बना लें, वह भी बिना खुद को कोई नुकसान पहुंचाए। शायद आप कहेंगी, ऐसा हो जाए तो आपकी आधी चिंता दूर हो जाएगी। हालांकि यह असंभव नहीं है, कुकरी एक्सपर्ट के पास इसका एक खास तरीका है, जिसे ‘नो फायर कुकिंग’ के नाम से जाना जाता है। यह एक मजेदार, रचनात्मक और सुरक्षित तरीका है, छोटे शेफ्स को तैयार करने का।

कुकिंग स्टाइल को समझें

नो फायर कुकिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें खाना पकाने के लिए गैस, चूल्हा या किसी भी प्रकार की आग का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें मुख्य रूप से ऐसी रेसिपी बनाई जाती हैं, जिन्हें बिना पकाए भी खाया जा सकता है, जैसे- सलाद, सैंडविच, फ्रूट चाट। यह तरीका खासतौर पर बच्चों, स्टूडेंट्स या उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो जल्दी और हेल्दी खाना बनाना चाहते हैं। नो फायर कुकिंग पोषण से भरपूर, आसान और सुरक्षित होती है, इसलिए आज यह स्कूल प्रोजेक्ट्स और हेल्दी डाइट प्लान में शामिल है।
 

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बच्चे को सिखाएं बिना आग के कुकिंग - फोटो : freepik

आत्मनिर्भरता का भाव

नो फायर कुकिंग न सिर्फ बच्चों को खाना बनाने का तरीका सिखाती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार भी बनाती है। इस कुकिंग स्टाइल में बच्चे बिना आग के जरिए विभिन्न व्यंजन बनाना सीखते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी पसंद का भोजन खुद तैयार करने में सक्षम हो जाते हैं। यह प्रक्रिया बच्चों की फाइन मोटर स्किल्स, जैसे- जरूरी सामग्री की चीजें काटना, मिलाना या सजाना को भी बेहतर बनाती है। साथ ही बच्चे जब नई रेसिपी और स्वाद से परिचित होते हैं तो उनकी सोचने-समझने और रचनात्मक क्षमता का विकास होता है।

वे प्रयोग करना सीखते हैं और भोजन के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाते हैं। यह गतिविधि न केवल शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक है, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक विकास में भी योगदान करती है। जब बच्चे परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर किचन में काम करते हैं तो आपसी जुड़ाव और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक है।

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No Fire Cooking Ideas - फोटो : Adobe

सुरक्षा फिर भी जरूरी

जब बच्चे किचन में होते हैं तो उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए किचन में तेज चाकू और भारी उपकरणों को ऐसे स्थान पर रखें जहां बच्चे की पहुंच न हो। आप छोटे बच्चों को किचन के बुनियादी नियमों के बारे में समझाएं, जैसे कि गरम बर्तनों को न छूना, बिजली के उपकरणों से दूर रहना और साफ-सफाई का ध्यान रखना। इस तरह वे किचन में आत्मविश्वास से काम करेंगे और साथ ही सुरक्षित भी रहेंगे।

 

उनकी रुचि

जब बच्चों को खाना बनाना सिखाएं तो उनकी रुचियों का ध्यान रखें। अगर उन्हें खाना बनाना किसी बोझ की तरह लगेगा तो वे कभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे। ऐसे में उनके लिए इसे मजेदार और रंगीन बनाएं। उदाहरण के लिए, आप फल और सब्जियों को अलग-अलग रंगों और आकारों में काटकर बच्चों को दें, ताकि वे खुद अपने मन-मुताबिक सैंडविच या सलाद बना सकें। बच्चे अपनी पसंद से सामग्री चुनना पसंद करते हैं, इसलिए उन्हें विकल्प दें कि वे क्या बनाना चाहते हैं। इससे उनकी कल्पना शक्ति बढ़ेगी और खाना बनाने में उनका उत्साह बना रहेगा। साथ ही खेल-खेल में कुछ किचन एक्टिविटी करवाना भी बच्चों को इससे जोड़े रखता है। ऐसे में आप सजावट प्रतियोगिता रख सकती हैं, जिससे वे कुछ नया सीख पाएंगे।

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पोषण का ध्यान - फोटो : Freepik.com

पोषण का ध्यान

भोजन का सिर्फ स्वादिष्ट होना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसमें पोषण भी होना बहुत जरूरी है, खासकर बच्चों के लिए। इसलिए नो फायर कुकिंग में ताजे फल, हरी सब्जियां, दही, नट्स और बीज जैसे हेल्दी और पौष्टिक पदार्थ शामिल करें। ये न सिर्फ बच्चों के शरीर के विकास में मदद करते हैं, बल्कि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। उदाहरण के लिए, फलों का कटोरा बनाते समय संतरे, सेब, केला और अनार जैसे फल डालें, जिनमें विटामिन भरपूर होते हैं। दही या नट्स खाने से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है, जो हड्डियों के लिए अच्छा है। बच्चों को यह समझाएं कि खाना केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर को मजबूत बनाने के लिए भी होता है। इससे वे खाने को ज्यादा सम्मान देंगे और स्वस्थ आदतें विकसित करेंगे।

 

रोजाना थोड़ा समय

अगर आप रोजाना बच्चों को थोड़ा समय नो फायर कुकिंग के लिए दें तो यह उनकी आदत बन जाएगी और वे खाना बनाने में निपुण हो जाएंगे। रोजाना थोड़ी-सी कुकिंग से वे लगातार सीखेंगे, नई-नई चीजें ट्राई करेंगे और खाना बनाने का शौक विकसित करेंगे। इससे बच्चों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वे अपने भोजन के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे। इस प्रक्रिया से बच्चों का खान-पान भी बेहतर होगा, क्योंकि वे खुद अपने लिए हेल्दी और पौष्टिक विकल्प चुनेंगे। यह आदत जीवन भर उनके काम आएगी और वे भविष्य में स्वस्थ आहार का ही चयन करेंगे।

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बिना आग के बच्चे खाने में क्या बना सकते हैं - फोटो : Freepik.com

ये भी बना सकते हैं
 

  • वेज सैंडविच : ब्रेड में बटर लगाकर उसमें खीरा, टमाटर, उबला आलू, नमक और चाट मसाला डालें।
  • फ्रूट चाट : कटे हुए मौसमी फल, जैसे केला, सेब, पपीता और अंगूर में नींबू और काला नमक मिलाएं।
  • दही सलाद : खीरा, टमाटर, प्याज, दही और थोड़ा-सा भुना जीरा मिलाकर ठंडी-ठंडी सलाद बनाएं।
  • मसाला कॉर्न : उबले हुए स्वीट कॉर्न में नींबू रस, नमक, चाट मसाला और बटर मिलाएं।
  • फ्रूट योगर्ट बाउल : दही में कटे फल, शहद और थोड़े नट्स मिलाकर हेल्दी स्नैक तैयार करें।
  • बिस्किट डेजर्ट : बिस्कुट पर क्रीम या पीनट बटर लगाकर फल सजाएं या चॉकलेट सिरप डालें।
  • मिक्स फ्रूट स्मूदी (ब्लेंडर में) : केले, सेब, दूध और थोड़ा शहद ब्लेंड करके ठंडी स्मूदी बनाएं।
  • बटर-जैम रोल : ब्रेड स्लाइस को बेलकर उस पर बटर और जैम लगाकर रोल करें।
  • मूंगफली चाट : भुनी मूंगफली में टमाटर, प्याज, धनिया, नींबू और मसाले मिलाकर चटपटी चाट बनाएं।
  • नट्स-ट्रेल मिक्स : किशमिश, बादाम, अखरोट, मखाने और गुड़ के छोटे टुकड़े मिलाकर हेल्दी स्नैक तैयार करें।
 

सैंडविच के इस महत्व को समझें

 

कुकरी एक्सपर्ट सरिता खुराना बताती हैं, 10 साल तक की उम्र बच्चों के बौद्धिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। इस समय उन्हें न सिर्फ पढ़ाई, बल्कि स्वस्थ जीवन-शैली और खान-पान की समझ देना भी जरूरी है। माता-पिता को बच्चों को मौखिक रूप से फलों, सब्जियों और खाद्य सामग्री की पहचान करानी चाहिए, साथ ही यह सिखाना चाहिए कि भोजन का शरीर पर क्या प्रभाव होता है। ऐसे में बच्चों को आग से दूर रखते हुए ‘नो-फायर कुकिंग’ सिखाना एक सुरक्षित और रचनात्मक तरीका है।

उदाहरण के लिए, ब्रेड से सैंडविच बनाना, स्प्राउट्स या सफेद चने का सलाद तैयार करना, फ्रूट क्रीम, पपीता सलाद या पाइनएप्पल शिकंजी जैसे हेल्दी ड्रिंक्स बनाकर वे अपनी छोटी-छोटी भूख को मिटा सकते हैं। इसलिए आप चाहें तो उन्हें ऐसी कुकिंग वर्कशॉप में दाखिला दिला सकती हैं, जहां पोषण, स्वच्छता और रचनात्मकता को प्राथमिकता दी जाती हो। खुद से खाना बनाना बच्चों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। कोरोना के बाद स्वस्थ भोजन की अहमियत और भी बढ़ गई है। ऐसे में बचपन में ही उन्हें भोजन के प्रति सतर्क कर आप उनका भविष्य सुधार सकती हैं। नो फायर कुकिंग सिर्फ खाना बनाना नहीं है, बल्कि यह बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है।

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