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संत रविदास के ये दोहे पढ़ पल में बदल सकती है किस्मत

Tue, 19 Feb 2019 03:12 PM IST
मंजू ममगाईं लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
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ravidas - फोटो : facebook
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार संत रविदास जयंती माघ महीने की पूर्णिमा पर मनाई जाती है।इस बार ये दिन मंगलवार, 19 फरवरी को पड़ रहा है।इस वर्ष पूरा भारतवर्ष उनका 642 वां जन्मदिन मना रहा है।रविदास ने हमेशा जातिवाद को त्यागकर लोगों को आपस में प्यार से रहने की शिक्षा दी।रविदास को कभी भी धन से मोह नहीं रहा।आज इस खास मौके पर जानते हैं संत रविदास के वो खास दोहे जिनकी वजह से उन्हें दूर-दूर तक ख्याति मिली।  
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ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन,
पूजिए चरण चंडाल के जो होवे गुण प्रवीन।।

अर्थ- इस दोहे में रविदास जी कहते हैं कि किसी को सिर्फ इसलिए नहीं पूजना चाहिए क्योंकि वह किसी पूजनीय पद पर है।यदि व्यक्ति में उस पद के योग्य गुण नहीं हैं तो उसे नहीं पूजना चाहिए।इसकी जगह अगर कोई ऐसा व्यक्ति है, जो किसी ऊंचे पद पर तो नहीं है लेकिन बहुत गुणवान है तो उसका पूजन अवश्य करना चाहिए।
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मन ही पूजा मन ही धूप,
मन ही सेऊं सहज स्वरूप।।

अर्थ- इस पंक्ति में रविदासजी कहते हैं कि निर्मल मन में ही भगवान वास करते हैं। अगर आपके मन में किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है तो आपका मन ही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप है। ऐसे पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं।

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मन चंगा तो कठौती में गंगा’
अर्थ- इस कहावत के जरिए एक बार फिर रविदास जी मन की पवित्रता पर जोर देते हैं। रविदास कहते हैं, जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके बुलाने पर मां गंगा एक कठौती में भी आ जाती हैं।
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- फोटो : social media
रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच,
नर कूँ नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच

अर्थ- सिर्फ जन्म लेने से कोई नीच नही बन जाता है, इन्सान के कर्म ही उसे नीच बनाते हैं।
 
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- फोटो : Social Media
रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम
सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम।।

इस दोहे में संत रविदास भक्ति की शक्ति का वर्णन करते हैं। रैदासजी कहते हैं, जिस हृदय में दिन-रात बस राम के नाम का ही वास रहता है, ऐसा भक्त स्वयं राम के समान हो ता है। राम नाम की ऐसी माया है कि इसे दिन-रात जपनेवाले साधक को न तो किसी के क्रोध से क्रोध आता है और न ही कभी कामभावना उस पर हावी होती है। 
 
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