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Future Proofing: फ्यूचर प्रूफ क्या है? जो नए जमाने की शादियों में है बेहद जरूरी

Sat, 30 Aug 2025 12:55 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Future Proofing Relationship: सिचुएशनशिप, कैजुअल और नो-अटैच्ड जैसे रिश्तों के नाम आज की पीढ़ी में आम हैं। ये आधुनिक संबंध क्षण भर के सुख पर केंद्रित हैं। लेकिन परिवार में दादा-दादी, मम्मी-पापा जैसे स्थायी रिश्तों को देखकर आज की युवा पीढ़ी भी स्थायित्व चाहती है। इसी सोच ने जन्म दिया, फ्यूचर प्रूफिंग रिलेशनशिप को।-
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फ्यूचर प्रूफिंग रिलेशनशिप - फोटो : Adobe
लक्ष्मी कुमारी

आराध्या और रोहन की मुलाकात परिवार की रजामंदी से एक कॉफी शॉप में हुई थी। दोनों के ही अपने-अपने सपने थे, जिनमें वे व्यस्त थे, लेकिन जब उनकी आंखें मिलीं तो दोनों को एक अजीब-सा कनेक्शन महसूस हुआ। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ी और वे एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताने लगे। आराध्या एक स्वतंत्र विचारों वाली लड़की थी, जो अपने करियर और निजी जीवन में संतुलन बनाने की कोशिश कर रही थी। रोहन भी महत्वाकांक्षी व्यक्ति था और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। जैसे-जैसे उनकी मुलाकातें बढ़ीं, उनके रिश्ते गहरे होते चले गए। आराध्या और रोहन ने महसूस किया कि वे एक-दूसरे के साथ सहज और सुरक्षित महसूस करते हैं। दोनों ने अपने विचारों और भावनाओं को साझा किया और एक दिन शादी के खूबसूरत बंधन में हमेशा के लिए बंध गए।

मगर इस रिश्ते में ऐसा क्या खास था? दरअसल, आराध्या और रोहन का यह रिश्ता नई पीढ़ी में आ रहे उस बदलाव को दर्शाता है, जिसको अभी तक पुराना चलन कहकर यह पीढ़ी खारिज करती आ रही थी। एक मुलाकात में ही सारी जन्म-कुंडली खंगाल कर हां या न कर देना सामज की रीत है। रिश्ता बन गया तो आगे चलकर ‘जो भी होगा, अच्छा होगा और सब देखा जाएगा’ की सोच पर नई पीढ़ी को यकीन नहीं है, बल्कि वो जीवन के इस सबसे बड़े फैसले को सोच-समझ कर लेने में भरोसा करती है। अब उसे कोई शॉर्ट टर्म पसंद नहीं और भविष्य को अदृश्य समझ रिश्ते में आगे बढ़ने की कोई जल्दबाजी भी नहीं, क्योंकि जो भी होगा, फ्यूचर प्रूफ होगा! यही आज का ट्रेंड है, जिसे नाम मिला है- ‘फ्यूचर प्रूफिंग’।
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भविष्य सुरक्षा का बंधन - फोटो : istock
भविष्य सुरक्षा का बंधन

फ्यूचर प्रूफिंग यानी भविष्य की सुरक्षा। अपने भविष्य को समाज, पैसे, करियर और रिश्ते के नजरिए से मजबूत और टिकाऊ बनाने के प्रयासों को फ्यूचर प्रूफिंग कह सकते हैं। नई पीढ़ी की महिलाएं अब अपने प्यार भरे रिश्ते को तभी आगे बढ़ाना पसंद करती हैं, जब उन्हें भरोसा हो जाए कि जिसके साथ आगे जीवन बिताना है, वह बस नाम का ही साथी न हो। वह पैसे और रिश्तों की कद्र करे, साथ में करियर को आगे बढ़ाने में भी मददगार हो और सबसे बड़ी बात उसे समझे। अब सिर्फ आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा भी फ्यूचर प्रूफिंग में महत्वपूर्ण है।

एक तरह से कह सकते हैं कि फ्यूचर प्रूफिंग स्थायी बंधन में बंधने से पहले, आगे रिश्तों का स्वरूप कैसा होगा, इसका सटीक अनुमान लगाकर आगे बढ़ने का एक ट्रेंड है। जब भरोसा हो जाए कि आगे चलकर उनके काम, उनकी भावनात्मक, आर्थिक, सामाजिक, कॅरिअर जैसे मुद्दों की अनदेखी नहीं की जाएगी, उन्हें समर्थन मिलेगा और साथी के साथ परिवार का साथ मिलेगा, तभी वे उस रिश्ते में आगे बढ़ने का औचित्य समझ रही हैं।
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सम्मान और सहयोग - फोटो : Adobe
सम्मान और सहयोग

आधुनिक दौर में रिश्ते समानता और आपसी सम्मान पर आधारित हैं। इसका अर्थ है, पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ना और घर के अंदर एवं बाहर एक-दूसरे के प्रयासों की सराहना करना। इसका मतलब एक-दूसरे के व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास में सहयोग करना भी है। जब एक साथी करियर में बदलाव, व्यक्तिगत चुनौती या कठिन पारिवारिक स्थिति का सामना कर रहा हो तो दूसरे का सहयोग बहुत बड़ा अंतर ला सकता है। एक टीम होने का यह अहसास, खासकर मुश्किल समय में वास्तव में एक रिश्ते को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाता है। भारत में विवाह को अक्सर दो परिवारों के मिलन के रूप में देखा जाता है।

जहां पारिवारिक सहयोग एक बड़ी ताकत हो सकता है, वहीं ससुराल वालों की अपेक्षाओं और विचारों को समझना तनाव का कारण भी हो सकता है। किसी रिश्ते को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने में दोनों परिवारों के साथ स्पष्ट लकीरें खींचना और उनकी परंपराओं तथा मूल्यों का सम्मान करना शामिल है, जो आज की पीढ़ी अपने और नए परिवार में चाहती है।

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भावनात्मक साथी - फोटो : Adobe stock
भावनात्मक साथी

फ्यूचर प्रूफिंग डेटिंग चलन का ही एक आधुनिक रूप है। डेटिंग में आप थोड़ी देर के लिए किसी से मिलती हैं। छोटी और कम गंभीर बातें करती हैं। एक-दूसरे को थोड़ा-बहुत जानने की कोशिश करती हैं। फ्यूचर प्रूफिंग भावनात्मक जुड़ाव के साथ भावनात्मक सुरक्षा का भी एक नाम है। ऐसे रिश्ते में महिला अपने लिए एक सुरक्षित स्थान खोज लेती है और विचारों तथा भावनाओं को बिना किसी झिझक के साझा कर सकती है। इस रिश्ते में दोनों अपने विचारों और भावनाओं को साझा तथा महसूस करते हैं कि वे एक-दूसरे के साथ सहज एवं सुरक्षित हैं। यह भावनात्मक सुरक्षा भविष्य को सुंदर और सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसके बिना कोई भी रिश्ता बेमानी होता है।
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विचारों की स्वतंत्रता - फोटो : Adobe
विचारों की स्वतंत्रता

पहले के दौर में आर्थिक चिंताएं लड़की की प्राथमिकता में नहीं होती थीं। जिसके साथ रिश्ता तय होता था, उसका कर्तव्य होता था कि वह उसके साथ ही परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी उठाए। लेकिन आज के समय में छोटे-बड़े शहरों में ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छी जिंदगी जीने के लिए आर्थिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए।

महानगरों में तो एक की आमदनी से आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं आ सकती। ऐसे में महिलाएं शादी के बाद भी उनकी शिक्षा और नौकरी बनी रहे, इसकी गारंटी मांग रही हैं। कई रिश्ते तो इसी कारण नहीं चल पाते कि लड़का नहीं चाहता, लड़की शादी के बाद नौकरी करे। फ्यूचर प्रूफिंग में लड़की इस बात को भी परखती है और अपने आर्थिक लक्ष्य साझा करती है।

अगर दोनों लोग आर्थिक लक्ष्यों को साझा करते हैं और उन्हें महसूस होता है कि वे एक-दूसरे के साथ मिलकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और भविष्य को संवार सकते हैं तो यह रिश्ता आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ जाता है।
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पारदर्शिता को अधिक महत्व - फोटो : Adobe Stock
पारदर्शिता को अधिक महत्व

आराध्या और रोहन ने अपने रिश्ते में शुरू से ही पारदर्शिता को बढ़ावा देने की कोशिश की। उन्होंने एक-दूसरे के साथ खुलकर तथा ईमानदारी से बात करनी शुरू की और अपने विचारों एवं भावनाओं को साझा किया। नतीजतन, आपस में एक-दूसरे से सब कुछ साझा करने और पारदर्शी बनने से एक भरोसा पैदा हुआ। यह आसान काम नहीं है। भरोसा एक-दो दिनों में नहीं पैदा होता और न ही बढ़ता है। इसके लिए समय और धैर्य, दोनों चाहिए। आप फ्यूचर को बेहतर बनाने के लिए ये सब कर रही हैं। पारदर्शिता नहीं होगी तो कोई भी रिश्ता आगे नहीं चल सकेगा और कुछ दिन बाद बिखर जाएगा। वहीं, पारदर्शिता रिश्ते को अधिक खूबसूरत बना देती है।
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ज्यादा फायदे तो कुछ नुकसान भी - फोटो : Adobe
ज्यादा फायदे तो कुछ नुकसान भी

फ्यूचर प्रूफिंग के फायदे स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। इससे रिश्ते में मजबूती आती है, एक-दूसरे के साथ अधिक सहज और सुरक्षित महसूस करते हैं। भावनात्मक सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आपसी सम्मान और सहयोग, पारदर्शिता एक मजबूत तथा लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते की नींव रखने में मदद करते हैं।

असल में, फ्यूचर प्रूफिंग रिश्तों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है और हमें अपने रिश्ते में अधिक सहज एवं सुरक्षित महसूस करा सकती है। जीवन के किसी भी अन्य पहलू की तरह रिश्तों को भी समय की कसौटी पर खरा उतरने के लिए सक्रिय रख-रखाव की आवश्यकता होती है, यानी रिश्तों को सहेजना पड़ता है। हमारे यहां पारंपरिक मूल्य अक्सर आधुनिकता के साथ टकराते दिखाई देते हैं। किसी रिश्ते को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने का अर्थ है, आने वाली चुनौतियों से निपटना। ये चुनौतियां पहले से नहीं होतीं, बल्कि समय के साथ पैदा होने लगती हैं, इसलिए इनका पहले से अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इनसे निपटने का कोई तय फॉर्मूला नहीं हो सकता।

एकल परिवारों का उदय, महिलाओं की बढ़ती वित्तीय स्वतंत्रता और ग्लोबल संस्कृति के प्रभाव से समाज तथा रिश्तों में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आज के रिश्ते केवल साथी ही नहीं हैं, वे सबसे अच्छे दोस्त, अभिभावक और वित्तीय सहयोगी भी हैं। यह बदलाव अपने साथ नई अपेक्षाएं और संभावित तनाव भी लेकर आया है।

फ्यूचर प्रूफिंग एक नया ट्रेंड भले ही है, लेकिन किसी भी सफल रिश्ते की बुनियाद भरोसे, पारदर्शिता, आपसी सहयोग और वित्तीय आत्मनिर्भरता पर ही टिकी होती है। इनके न होने पर कोई भी रिश्ता सफल नहीं हो सकता। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इतनी सारी कसौटियों पर खरा उतरने के लिए आपको भी मेहनत करनी होगी, बदलाव के लिए तैयार रहना होगा और आपसी समझ का सम्मान करना होगा। अपेक्षाएं दोनों तरफ से हो सकती हैं। बाकी कुछ सुखद संयोग भी होते हैं, जो किसी भी रिश्ते को सफलता के पायदान पर बहुत ऊंचा पहुंचा देते हैं। उस संयोग पर भी नजर रखें।
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अपनी जिंदगी की कप्तान बनने की इच्छा - फोटो : Adobe Stock
अपनी जिंदगी की कप्तान बनने की इच्छा

मनोवैज्ञानिक और फैमिली रिलेशनशिप काउंसलर शिल्पी शर्मा बताती हैं, ‘फ्यूचर प्रूफिंग‘ का मतलब है, भविष्य के लिए खुद को तैयार करना। मसलन, स्किल बढ़ाना, पैसों की प्लानिंग करना या कॅरिअर पर ध्यान देना। जब महिलाएं ऐसा करने लगती हैं तो अपने पैरों पर खड़ी होती हैं और ज्यादा आत्मनिर्भर बनती हैं। इसका अच्छा असर यह हो सकता है कि रिश्तों में बराबरी आए, महिलाएं अपने फैसले खुद ले सकें और साथी के साथ एक मजबूत टीम की तरह काम कर सकें। लेकिन कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। हो सकता है, कुछ लोगों को यह बदलाव पसंद न आए और रिश्ते में टकराव हो। कुछ पारंपरिक सोच रखने वालों को यह लगे कि महिला ‘ज्यादा आगे’ बढ़ रही है। कुल मिलाकर, अगर समझदारी और आपसी सम्मान हो तो फ्यूचर प्रूफिंग से रिश्ते बेहतर हो सकते हैं, लेकिन सोच और रवैये में बदलाव लाना जरूरी है।

फ्यूचर प्रूफिंग से महिलाएं ज्यादा आत्मविश्वासी हो सकती हैं, क्योंकि जब वे खुद कमाने लगती हैं, तो अपने फैसले खुद लेती हैं और उन्हें लगता है कि वे अपनी जिंदगी की कप्तान हैं। यह जिंदगी में संतुलन लाता है, क्योंकि मुश्किल समय में उनके पास पहले से योजना होती है, चाहे संकट नौकरी से जुड़ा हो, घर चलाना हो या बच्चों की परवरिश। इससे महिलाएं सिर्फ दूसरों पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि खुद भी अपनी और परिवार की जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। यही आत्मनिर्भरता उन्हें अंदर से मजबूत बनाती है।
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