Krishna Janmashtami 2022: हाल ही में फ्रेंडशिप डे यानी मित्रता दिवस मनाया गया है। आज के युवा दोस्ती को बहुत अहमियत देते हैं। माता पिता और गुरु के अलावा दोस्ती का रिश्ता भी बहुत खास होता है। दोस्त सुख-दुख में आपका साथ देते हैं। अच्छे और बुरे के बारे में दोस्त बेहतर सलाह देते हैं। हालांकि दोस्ती भारतीय परंपरा में नई बात नहीं है। भारत में सच्ची मित्रता की कहानी सदियों पुरानी है, जिनका जिक्र पुराणों में मिलता है। दोस्ती का जिक्र आता है तो उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का दिया जाता है। कृष्ण एक राजा थे और सुदामा एक गरीब ब्राह्मण। फिर भी कृष्ण और सुदामा की दोस्ती एक मिसाल है। कृष्ण और सुदामा की दोस्ती के कई किस्से आपने सुने होंगें। जैसे, गरीब सुदामा कृष्ण से मिलने उनके महल पहुंचे थे तो वह भगवान कृष्ण के लिए महज तीन मुट्ठी चावल लेकर गए थे। प्रभु श्रीकृष्ण ने दोस्त के लाए चावलों को खुशी खुशी ग्रहण किया और उन्हें पूरी सृष्टि देने को तैयार हो गए। एक राजा होते हुए भी कृष्ण सुदामा को अपने महल लाए, खुद उनके पैर धोए, सुदामा के पैरों में चुभे कांटों को देख रोने लगे। ये सारी कहानियां बचपन से बच्चों को दादी नानी सुनाती आ रही हैं। पुराणों में इन कहानियों को सच बताया गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि नटखट नंद गोपाल की दोस्ती एक साधारण से ब्राह्मण बालक सुदामा से कैसे हो गई? कृष्ण और सुदामा की पहली बार कब और कहां मुलाकात हुई? कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर जानिए कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की कहानी।